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Lucy Wills 131st Birthday: प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए वरदान थीं लूसी विल्स, Google ने बनाया Doodle

आज गूगल प्रसिद्ध हीमेटॉलजिस्ट लूसी विल्स (lucy wills) का 131वां जन्मदिन मना रहा है. लुसी विल्स (lucy wills) को गर्भवती महिलाओं के लिए प्रसवपूर्व एनीमिया से बचाने के लिए की गई उनकी खोज के लिए जाना जाता है.

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aajtak.in/ मंजू ममगाईं नई दिल्ली, 10 May 2019
Lucy Wills 131st Birthday: प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए वरदान थीं लूसी विल्स, Google ने बनाया Doodle लूसी विल्स

आज गूगल प्रसिद्ध रुधिर विज्ञानी (हीमेटॉलजिस्ट) लूसी विल्स (lucy wills) का 131वां जन्मदिन मना रहा है. लुसी विल्स (lucy wills) को गर्भवती महिलाओं के लिए प्रसवपूर्व एनीमिया से बचाने के लिए की गई उनकी खोज के लिए जाना जाता है. गूगल ने रंगबिरंगा डूडल बनाकर लूसी विल्स को उनकी लैब में काम करते हुए दिखाया है. डूडल में उनके पास प्लेट में ब्रेड का टुकड़ा और चाय का कप भी दिखाई दे रहा है.  

प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए वरदान जैसी दवा की खोज करने वाली लुसी विल्स पेशे से डॉक्टर थी. लुसी विल्स (lucy wills) मूल रूप से इंग्लैंड की रहने वाली थी. उनका जन्म 10 मई 1888 को हुआ था. साल 1911 में लूसी ने कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के न्यूहैम कॉलेज से बॉटनी और जियोलॉजी में ऑनर्स की डिग्री हासिल की थी. लूसी (lucy wills) ने भारत में महिलाओं के शरीर में होने वाले खून की कमी (एनीमिया) के रोकधाम को लेकर कई रिसर्च पर काम किया.

गर्भवती महिलाओं के लिए फोलिक एसिड के महत्व को लुसी विल्स (lucy wills) ने ही साबित किया था. आज दुनियाभर में डॉक्टर फोलिक एसिड को गर्भवती महिलाओं के लिए जरूरी मानते हैं. साल 1928 में लूसी मुंबई के टेक्सटाइल इंडस्ट्री में काम करने वाली गर्भवती महिलाओं को हो रहे गंभीर एनीमिया की जांच के लिए भारत आईं.

लुसी विल्स (lucy wills) ने महिलाओं से जुड़ी अपनी जांच में एनीमिया के पीछे खराब आहार को सबसे बड़ा कारण माना. उन्होंने देखा कि खराब आहार की वजह से मिल में काम करने वाली महिलाओं को मैक्रोसाइटिक एनीमिया की बीमारी हो रही थी. इस बीमारी के चलते महिलाओं के गर्भधारण करने पर उनके शरीर में लाल रक्त कणिकाओं का आकार सामान्य से काफी ज्यादा हो रहा था.

लूसी विल्स (lucy wills) ने महिलाओं को एनीमिया से बचने के लिए बंदरों और चूहों पर कई प्रयोग किए. उन्होंने अपने प्रयोग में देखा कि खाने में यीस्ट मिलाकर देने से इन जीवों में भी खून की कमी दूर हो रही थी. इस प्रयोग को विल्स फैक्टर कहा जाता है. आज खाने में मिलाए गए इस यीस्ट को लोग फॉलिक एसिड के नाम से पहचानते हैं.

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