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लॉकडाउन में गैजेट एडिक्शन का शिकार न हो जाए आपका बच्चा, ऐसे रखें ख्याल

लॉकडाउन में बोरियत से बचने के लिए ज्यादातर बच्चे मोबाइल, टीवी या किसी दूसरे गैजेट पर ज्यादा समय बिता रहे हैं. लेकिन वक्त काटने के लिए लिए यह जरिया कितना सही है, इसके बारे में देश की प्रसिद्ध चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट शैलजा सेन ने जानकारी दी है.

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aajtak.in
aajtak.in नई दिल्ली, 10 April 2020
लॉकडाउन में गैजेट एडिक्शन का शिकार न हो जाए आपका बच्चा, ऐसे रखें ख्याल लॉकडाउन के दौरान गैजेट के साथ ज्यादा समय बिताना बच्चों के लिए कितना सुरक्षित

  • लॉकडाउन के दौरान बच्चों की एक्टिविटी को करें मॉनिटर
  • रोजाना आधा घंटा बच्चों के साथ बालकनी में खेलें

कोरोना वायरस के कारण लॉकडाउन के कारण बीते 17 दिनों में हमारे दिनचर्या में जो बदलाव आया है वो कहीं न कहीं बच्चों के लिए अच्छा नहीं है. लॉकडाउन में बोरियत से बचने के लिए ज्यादातर बच्चे मोबाइल, टीवी या किसी दूसरे गैजेट पर ज्यादा समय बिता रहे हैं. लेकिन वक्त काटने के लिए यह जरिया कितना सही है, इसके बारे में देश की प्रसिद्ध चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट शैलजा सेन ने जानकारी दी है.

गैजेट का समय तय करें

शैलजा सेन ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान बच्चे अपना ज्यादा समय पसंदीदा गैजेट के साथ ही बिताएंगे और ये बड़ी सामान्य सी बात है. लॉकडाउन के बाद जैसे ही स्कूल खुलेंगे और बच्चों के सामने उनके दोस्त और टीचर्स आएंगे वह खुद-ब-खुद पहले की तरह अपने डेली रूटीन में आ जाएंगे.

ये भी पढ़ें: घर पर बच्चों को कैसे दें बाहर की तरह का माहौल

शैलजा सेन ने आगे बताया गैजेट की लत को बच्चों के लिए बिल्कुल अच्छा नहीं माना जाता है. इसलिए बच्चों को टाइम पास के लिए गैजेट जरूर दें, लेकिन उनके टाइम को भी मॉनिटर करते रहें. उनके लाइफस्टाइल को बैलेंस करने की कोशिश करें.

इन बातों का रखें खास ध्यान

आपके बच्चे लॉकडाउन में गैजेट का शिकार न हों, इसलिए उनके लिए समय निकालें. बच्चे छोटे हैं तो उन्हें किस्से कहानियां सुनाएं. रोजाना दिन में आधा घंटा उनके साथ बालकनी में खेलें. साथ ही इस वक्त को घर पर ही समर वेकेशन की तरह बिताएं.

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