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गणित के डर से कहीं आपके बच्चे को भी तो नहीं हो रही ये बीमारी, जानकारी है जरूरी

क्या आपका बच्चा भी अक्सर गणित के सवाल देखकर घबरा जाता है, या टेस्ट में पूरे नंबर लाने का प्रेशर हर समय उसके दिमाग पर बना रहता है? अगर इन सवालों का जवाब हां में है तो सतर्क हो जाएं, वो मासूम इस गंभीर बीमारी का शिकार बन रहा है. जी हां हाल ही में हुई एक रिसर्च में यह बात खुलकर सामने आई है.

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aajtak.in [Edited by: सुधांशु माहेश्वरी]नई दिल्ली, 20 March 2019
गणित के डर से कहीं आपके बच्चे को भी तो नहीं हो रही ये बीमारी, जानकारी है जरूरी प्रतीकात्मक तस्वीर

गणित एक ऐसा विषय है जिसे कई बच्चे तो बेहद पसंद करते हैं तो वहीं कुछ इस विषय से बेहद खौफ में रहते हैं. आपने भी कई बार अपने बच्चे के दिल में इस विषय के प्रति  इंटरेस्ट पैदा करने के लिए उसे कहा होगा कि यह एक स्कोरिंग सब्जेक्ट है. इस विषय पर थोड़ी से मेहनत करने पर आप आसानी से फुल मार्क्स ला सकते हैं. लेकिन उस समय क्या वाकई आप अपने बच्चे की मनोवस्था समझ रहे होते हैं. बता दें, बच्चों पर इस विषय को लेकर जरूरत से ज्यादा दबाव बनाने पर वो तनाव में आने लगता है. इसकी वजह से थोड़े समय बाद उन्हें इस विषय से ही नफरत हो जाती है. हाल ही में हुई एक स्टडी की मानें तो बच्चों में मैथ्स के लिए बढ़ती नफरत की वजह से अब वो 'मैथ्स एंजाइटी' का भी शिकार होने लगे हैं.

सेंटर फॉर न्यूरोसाइंस इन एजुकेशन द्वारा की गई एक स्टडी में पता चला कि ज्यादातर बच्चे मैथ्स की वजह से तनाव का शिकार हो रहे हैं. इस स्टडी में बच्चों के माता पिता और स्कूल टीचर्स को उनके तनाव का कारण बताया गया. यह शोध 1000 इटालियन बच्चों और 1700 लंदन में रहने वाले बच्चों पर किया गया.

इन अध्यन को अच्छी तरह करने के बाद शोधकर्ता इस नतीजे पर पहुंचे कि प्राइमरी और सेकेंडरी स्कूल में पढ़ने वाले लड़कों की तुलना में लड़कियां मैथ्स एंजाइटी की ज्यादा शिकार होती हैं. स्टडी में इस बात का भी खुलासा हुआ कि ऐसा इसलिए होता है क्योंकि बच्चे पहले ही इस विषय को मुश्किल समझ लेते हैं. जिसकी वजह से उन्हें तनाव होने लगता है. इसके अलावा इस विषय में कम अंग प्राप्त करने का डर भी उन्हें इस तनाव से उबरने नहीं देता है. इस शोध को करने वाले डेनिस कहते हैं, ' ये सच है कि 'मैथ्स एंजाइटी' हर बच्चे में अलग कारण से हो सकती है लेकिन हमने अपनी रिसर्च के माध्यम से कुछ ऐसे कारण खोज लिए हैं जो प्राइमरी और सेकेंडरी दोनों बच्चों में एक समान हैं.'

इस शोध में एक और बात जो सामने निकलकर आई वो थी कि स्कूल में टीचर्स के पढ़ाने का स्टाइल. जी हां, इस स्टडी में खुद बच्चों ने इस बात की शिकायत की है कि उनके स्कूल में इस विषय को अलग-अलग ढंग से पढ़ाया जाता है जिसके चलते वो अक्सर कंफ्यूज हो जाते हैं. वहीं सेकेंडरी स्कूल के बच्चों का कहना था कि पेरेंट्स और दोस्तों के साथ खराब रिश्तों की वजह से उन्हें तनाव रहता है. इसके अलावा हर क्लास के साथ पढ़ाई के बढ़ते दवाब की वजह से भी बच्चों को तनाव हो रहा है. वैसे हैरानी तो इस बात की है कि जो बच्चे मैथ्स में मजबूत है, वो भी कई मौकों पर तनाव महसूस करते हैं. दरअसल जो बच्चे मैथ्स में अच्छे होते हैं, उनके पेरेंट्स को हमेशा सिर्फ उनके मार्क्स से ही मतलब होता है. ऐसा करने से उन बच्चों में धीरे-धीरे तनाव बढ़ने लगता है और वो भविष्य में उस फील्ड में भी परफॉर्म नहीं कर पाते जहां वो बेहतर होते हैं.

शोधकर्ताओं की मानें तो वो इस बढ़ते ट्रेंड को काफी चिंताजनक मानते हैं. उनके अनुसार बच्चे इस तरह से एक तरह के चक्रव्यू में फंस जाते हैं. जहां से भविष्य में उनका निकलना बहुत मुश्किल होगा. उनके मुताबिक पहले मैथ्स एंजाइटी के चलते बच्चे अच्छा परफॉर्म नहीं करेंगे और फिर कम मार्क्स लाने की वजह से तनाव से पीड़ित होंगे.

इस स्टडी में शोधकर्ताओं ने इस परेशानी को हल करने के लिए कुछ महत्वपूर्ण विकल्पों पर भी जोर दिया गया है. उन्होंने बताया कि इस परेशानी से निजात पाने के लिए सबसे पहले स्कूल के टीचर्स को इस बात को स्वीकार करना होगा कि बच्चों भी मैथ्स एंजाइटी का शिकार हो सकते हैं. जिसका सीधा असर  उनकी परफॉर्मेंस पर पड़ता है. इसके अलावा टीचर्स को बच्चों को पढ़ाने के अपने स्टाइल में भी जरूरी परिवर्तन लाना चाहिए. इतना ही नहीं बच्चों के माता- पिता भी इस बात का ख्याल रखें कि मैथ्स के लिए बच्चों पर दवाब बनाने से बच्चों पर इसका बुरा असर पड़ सकता है.

शोधकर्ताओं ने उम्मींद जताई कि अगर इन समाधानों पर अमल किया जाए तो जल्द ही स्थिति में सुधार लाया जा सकता है. उन्होंने इस बात को भी स्वीकार किया कि वर्तमान स्थति काफी चिंताजनक है. एक शोध के मुताबिक यूके में हर पांच में से एक इंसान को मैथ्स की प्रॉब्लम सुलझाने में दिक्कत होती है.

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