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बच्चों को शुरुआती 3 वर्षों में होता है इस बीमारी का खतरा

जीवन के शुरुआती वर्षों में अत्यधिक वजन बढ़ने से शिशुओं में लंग फंक्शन और अस्थमा के खतरे को बढ़ा सकता है.
बच्चों को शुरुआती 3 वर्षों में होता है इस बीमारी का खतरा प्रतीकात्मक फोटो
aajtak.in [Edited by: नेहा फरहीन]नई दिल्ली, 04 September 2018

बच्चों में शुरुआती तीन वर्षों में विकास होने के कारण उनके फेफड़ों पर बुरा असर पड़ता है, जिससे 10 साल की आयु में दमा का खतरा बढ़ जाता है. एक स्टडी की रिपोर्ट में सामने आया है कि जीवन के शुरुआती वर्षों में अत्यधिक वजन बढ़ने से शिशुओं में लोवर लंग फंक्शन और बचपन के अस्थमा के खतरे को बढ़ सकता है.

नीदरलैंड के एरास्मस यूनिवर्सिटी में हुए नई स्टडी में बताया गया है कि जिन शिशुओं का वजन सर्वाधिक रफ्तार से सबसे ज्यादा बढ़ा है, ऐसे बच्चों में 10 वर्ष की आयु में लोवर लंग फंक्शन की समस्या देखी गई है.

शोधकर्ताओं और प्रमुख लेखक मेरिबेल कासस ने कहा कि स्टडी में यह भी बताया गया है कि बच्चे का बॉडी मास इंडेक्स जितनी देर में अपने शिखर पर पहुंचेगा, उसके फेफड़ें उतना ही अच्छा काम करेंगे, जिससे दमा का खतरा कम हो जाएगा.

उन्होंने बताया कि स्टडी के परिणामों इस बात की पुष्टि की गई है कि शुरुआती वर्षों में बच्चों के विकास में फेफड़ें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.

शोधकर्ताओं ने स्टडी में 10 साल तक के लगभग 4,435 बच्चों को शामिल किया था. स्टडी के दौरान उनके जन्म से पहले तीन साल तक उनके वजन और लंबाई पर नजर रखी गई है.

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