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सेक्स न करने से जल्द होती है मेनोपॉज की समस्या, शोध में खुलासा

अध्ययन में कहा गया है कि जो महिलाएं मिड लाइफ (35 व इससे अधिक उम्र) में बार-बार संभोग नहीं करती हैं उनमें जल्द मेनोपॉज देखने को मिलती है.

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aajtak.in
aajtak.in नई दिल्ली, 16 January 2020
सेक्स न करने से जल्द होती है मेनोपॉज की समस्या, शोध में खुलासा प्रतीकात्मक तस्वीर

जो महिलाएं अधिक संभोग करती हैं उनमें पीरियड्स के बंद होने की संभावना कम होती है. हफ्ते में एक बार सेक्स करने वाली महिलाओं में पीरियड्स (मेनोपॉज) की संभावना महीने में एक बार संभोग करने वाली औरतों से 28 फीसदी कम होती है. एक शोध में यह जानकारी मिली है. शोधकर्ताओं ने कहा कि संभोग के भौतिक संकेत शरीर को संकेत दे सकते हैं कि गर्भवती होने की संभावना है.

अध्ययन में कहा गया है कि जो महिलाएं मिड लाइफ (35 व इससे अधिक उम्र) में बार-बार संभोग नहीं करती हैं, उनमें जल्द मेनोपॉज देखने को मिलती है.

यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ लंदन की अध्ययनकर्ता मेगन अर्नोट ने कहा, "अध्ययन के निष्कर्ष बताते हैं कि अगर कोई महिला यौन संबंध नहीं बना रही है और गर्भधारण का कोई मौका नहीं है, तो शरीर अंडोत्सर्ग (ओव्यूलेशन) बंद कर देता है क्योंकि यह व्यर्थ होगा."

अध्ययन में कहा गया है कि अंडोत्सर्ग के दौरान महिला की प्रतिरक्षा क्षमता बिगड़ जाती है, जिससे शरीर में बीमारी होने की संभावना अधिक होती है. यह शोध 2,936 महिलाओं से एकत्र किए गए आंकड़ों पर आधारित है, जो कि 1996/1997 में एसडब्ल्यूएएन अध्ययन के तहत किया गया था.

इस दौरान महिलाओं को कई सवालों के जवाब देने के लिए कहा गया था जिसमें यह भी शामिल था कि पिछले छह महीनों में उन्होंने अपने साथी के साथ संभोग किया है या नहीं.

संभोग करने के अलावा उनसे पिछले छह महीनों के दौरान कामोत्तेजना से जुड़े अन्य प्रश्न भी किए गए, जिनमें मुख मैथुन, यौन स्पर्श और आत्म-उत्तेजना या हस्तमैथुन के बारे में भी विस्तृत जानकारी ली गई.

यौन क्रियाओं में भाग लेने संबंधी सबसे अधिक उत्तर साप्ताहिक (64 फीसदी) देखने को मिले. दस साल की अनुवर्ती अवधि में देखा गया कि 2,936 महिलाओं में से 1,324 (45 फीसदी) ने 52 वर्ष की औसत उम्र में प्राकृतिक पीरियड्स का अनुभव किया.

बता दें कि मेनोपॉज उस स्थिति को कहा जाता है जब महिलाओं में मासिक धर्म चक्र बंद हो जाता है. असल में इसे प्रजनन क्षमता का अंत माना जाता है. शोध की रिपोर्ट को जर्नल रॉयल सोसायटी ओपन साइंस नामक पत्रिका में प्रकाशित किया गया है. इस पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन में इसके कारण का उल्लेख नहीं किया गया है.

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