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उत्तराखंड के पूर्व CM हरीश रावत पर गिरफ्तारी का संकट, FIR की तैयारी में CBI

उत्तराखंड के बहुचर्चित विधायकों की खरीद-फरोख्त के स्टिंग मामले में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को कभी भी सीबीआई गिरफ्तार कर सकती है. सीबीआई की ओर से नैनीताल हाई कोर्ट में मॉडिफिकेशन एप्लीकेशन दायर की गई जिसमें कहा गया कि इस मामले में सीबीआई की प्रारंभिक जांच पूरी हो चुकी है.

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aajtak.in
दिलीप सिंह राठौड़ देहरादून, 04 September 2019
उत्तराखंड के पूर्व CM हरीश रावत पर गिरफ्तारी का संकट, FIR की तैयारी में CBI उत्तराखंड के पूर्व CM हरीश रावत पर मंडरा रहा गिरफ्तारी का संकट (फाइल-ANI)

कांग्रेस के नेताओं के लिए बेहद बुरे दिन चल रहे हैं. आए दिन कहीं न कहीं कांग्रेस के नेताओं पर कानूनी शिकंजा कसा जा रहा है. पहले पी चिदंबरम और अब कर्नाटक के कद्दावर कांग्रेसी नेता डीके शिवकुमार की मंगलवार को हुई गिरफ्तारी के बाद उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत पर भी गिरफ्तारी का संकट मंडरा रहा है. पूर्व मुख्यमंत्री को सीबीआई एफआईआर दर्ज कर कभी भी गिरफ्तार कर सकती है.

उत्तराखंड के बहुचर्चित विधायकों की खरीद-फरोख्त के स्टिंग मामले में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को कभी भी सीबीआई गिरफ्तार कर सकती है. सीबीआई की ओर से आज मंगलवार को नैनीताल हाई कोर्ट में मॉडिफिकेशन एप्लीकेशन दायर की गई जिसमें कहा गया कि इस मामले में सीबीआई की प्रारंभिक जांच पूरी हो चुकी है और अब हरीश रावत को गिरफ्तारी करना चाहती है. हाई कोर्ट द्वारा सीबीआई की एप्लीकेशन स्वीकार कर ली गई है जिसके बाद रावत पर गिरफ्तारी की गाज कभी भी गिर सकती है.

2017 में आया खरीद-फरोख्त का मामला

2017 में उत्तराखंड के तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत द्वारा विधायकों की खरीद-फरोख्त का मामला सामने आया था. जिसके बाद से उत्तराखंड में कांग्रेस सरकार गिरी और सरकार गिरने के बाद राज्यपाल की संस्तुति से हरीश रावत के खिलाफ सीबीआई जांच शुरू हुई.

सीबीआई हरीश रावत की गिरफ्तारी की तैयारी कर रहा था, लेकिन इसी बीच रावत ने स्टिंग को फर्जी बताते हुए नैनीताल हाई कोर्ट की शरण ली और अपनी गिरफ्तारी पर रोक तथा सीबीआई जांच को खत्म करने की मांग कर डाली. मामले की सुनवाई करते हुए नैनीताल हाई कोर्ट की एकल पीठ ने हरीश रावत को सीबीआई जांच में सहयोग करने के आदेश दिए थे.

हाई कोर्ट ने गिरफ्तारी पर लगाई रोक

हाई कोर्ट ने साथ ही सीबीआई को यह भी निर्देश दिए थे कि वह हरीश रावत की गिरफ्तारी न करें. इसके अलावा सीबीआई को आदेश दिए थे कि अगर रावत की गिरफ्तारी करने की जरूरत पड़ेगी तो सीबीआई गिरफ्तारी से पहले हाई कोर्ट की एकल पीठ को अवगत कराएगी जिसके बाद से सीबीआई मामले की जांच कर रही थी.

साथ ही स्टिंग मामले में 15 जून 2017 की कैबिनेट बैठक में हरीश रावत पर चल रही सीबीआई को जांच को हटाकर एसआईटी से जांच करने का फैसला लिया था जिसको हरक सिंह रावत ने नैनीताल हाई कोर्ट में चुनौती देते हुए कहा कि अगर राज्यपाल किसी मामले में एक बार सीबीआई जांच की संस्तुति दे देते हैं तो उसे हटाया नहीं जा सकता.

राज्य सरकार द्वारा 15 जून को हुई बैठक में हरीश रावत पर चल रही सीबीआई जांच को हटाने की संस्तुति कर दी जो नियम विरुद्ध है साथ ही हरक सिंह रावत ने हरीश रावत पर एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी. जिसके बाद से मामला सीबीआई के पाले में था और सीबीआई मामले में गहनता से विधायकों की खरीद-फरोख्त पर जांच कर रही थी. अब करीब डेढ़ साल बाद सीबीआई ने जांच पूरी कर अपनी रिपोर्ट कोर्ट में पेश कर दी है. अब मामले में 20 सितंबर को सुनवाई होगी.

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