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कोरोना वायरस: लॉकडाउन में राशन के पैकेट घर-घर पहुंचा रहा ये किसान परिवार

जनता कर्फ्यू के बाद पूरे देश में लगाए गए लाकडॉउन के कारण बहुत लोग इधर-उधर फंसे हुए हैं. इनमें कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो रोज कमाकर खाने वाले हैं. लॉकडाउन की वजह से इन लोगों के लिए खाने का संकट पैदा हो गया है.

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aajtak.in
दिलीप सिंह राठौड़ देहरादून, 03 April 2020
कोरोना वायरस: लॉकडाउन में राशन के पैकेट घर-घर पहुंचा रहा ये किसान परिवार जरूरतमंदों को मदद पहुंचा रहा किसान परिवार

  • लोगों को राशन बांटने के लिए पत्नी के साथ निकलते हैं प्रवीण
  • राशन के पैकेट में आटा, दाल, चावल समेत जरूरी सामान

देश में चल रहे लॉकडॉउन की वजह से लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है. इससे मजदूर और गरीब तबका सबसे ज्यादा परेशान है. कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए लगाए गए लॉकडाउन की वजह से लोगों का काम ठप हो गया है, जिसके चलते गरीबों और मजदूरों को खाने, पीने और रोजमर्रा की जरूरत की चीजों की कमी से जूझना पड़ रहा है.

इन सबके बीच बहुत से लोग ऐसे भी हैं, जो इन जरूरतमंद लोगों की मदद कर रहे हैं. उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में भी इसी तरह एक किसान परिवार लगातार जरूरतमंद लोगों की सहायता में लगा है. यह किसान परिवार लॉकडाउन में खुद ही बाहर निकलता है और राशन बांटता है, ताकि इस संकट की घड़ी में कोई भूखा न रहे और सभी तक मदद पहुंच जाए.

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जनता कर्फ्यू के बाद पूरे देश में लगाए गए लाकडॉउन के कारण बहुत लोग इधर-उधर फंसे हुए हैं. इनमें कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो रोज कमाकर खाने वाले हैं. लॉकडाउन की वजह से इन लोगों के लिए खाने का संकट पैदा हो गया है. यह किसान परिवार खुद जरूरतमंद लोगों से सम्पर्क करता है और उन तक कम से कम एक हफ्ते का राशन पहुंचाता है. इससे लोगों को घरों से बाहर नहीं निकलना पड़ता है.

एक बार में हफ्तेभर का देते हैं राशन

किसान प्रवीण भारद्वाज का कहना है कि वो इस मदद को लगातार जारी रखेंगे. उन्होंने बताया कि कई बार जरूरतमंद लोग उनके पास खुद भी पहुंच जाते हैं. किसान प्रवीण भारद्वाज और उनकी पत्नी ने मदद के रूप मे हर जरूरत के खाने के सामान की व्यवस्था की है, जिसमें कम से कम एक हफ्ते का राशन भी शामिल है.

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लॉकडाउन में लोगों को राशन बांटने के लिए किसान प्रवीण भारद्वाज अपनी पत्नी के साथ निकलते हैं. दोनों अपनी गाड़ी से पहले जाकर मुहल्ले या बस्ती में किसी बड़े बुजुर्ग से मिलते हैं और उससे पूछते हैं कि राशन की सबसे ज्यादा जरूरत किसको है? इसके बाद लोगों की जरूरत के हिसाब से राशन के पैकेट देना शुरू करते हैं.

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क्या-क्या है राशन के पैकेट में?

प्रवीण भारद्वाज और उनकी पत्नी राशन के जो पैकेट बांटते हैं, उसमें 5 किलो चावल, 5 किलो आटा, दाल, तेल और मसाले समेत अन्य सामान होते हैं. इतना राशन मिलने पर लोगों को कम से कम एक हफ्ते तक परेशान नहीं होना पड़ता है. जिन लोगों के घर में छोटे बच्चे हैं, उन तक दूध भी यह किसान परिवार पहुंचाता है. प्रवीण भारद्वाज का कहना है कि वो रोजाना राशन के डेढ़ सौ पैकेट बांटते हैं.

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