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विरोध के बावजूद क्या अयोध्या पर सफल रहेगी श्रीश्री की मध्यस्थता?

अयोध्या मामले में प्रमुख मुस्लिम पक्षकार हाशिम अंसारी के बेटे इकबाल अंसारी श्रीश्री रविशंकर को स्वतंत्र मध्यस्थ नहीं मानते. तो वहीं राम जन्मभूमि न्यास भी श्रीश्री रविशंकर को बाहरी मानता है क्योंकि वे राम मंदिर आंदोलन का हिस्सा नहीं थे.

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विवेक पाठकनई दिल्ली, 14 March 2019
विरोध के बावजूद क्या अयोध्या पर सफल रहेगी श्रीश्री की मध्यस्थता? आध्यात्मिक गुरू श्रीश्री रविशंकर (फाइल फोटो)

अयोध्या राम जन्मभूमि विवाद में सुप्रीम कोर्ट की तरफ से गठित मध्यस्थों की कमेटी बुधवार से विभिन्न पक्षकारों से विवाद सुलझाने की दिशा में मुलाकात करने जा रही है. लेकिन इस 3 सदस्यीय मध्यस्थ कमेटी में शामिल सदस्यों में से एक आध्यात्मिक गुरु श्रीश्री रविशंकर के नाम पर कुछ पक्षकारों की आपत्ति बरकरार है. ऐसे में बड़ा सवाल है कि पूरी दुनिया में जारी संघर्षों में लोगों को शांति का पाठ पढ़ाने वाले श्रीश्री रविशंकर क्या अपने ही देश में दशकों से चले आ रहे इस विवाद को सुलझाने में कामयाबी हासिल कर पाएंगे?

अयोध्या मामले की सुनवाई कर रहे सुप्रीम कोर्ट ने राम जन्मभूमि विवाद सुलझाने के लिए तीन सदस्यों की कमेटी गठित की. इस कमेटी में जस्टिस एफएम इब्राहिम खलीफुल्ला, वरिष्ठ वकील श्रीराम पंचू और आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्रीश्री रविशंकर शामिल हैं. अयोध्या मामले में प्रमुख मुस्लिम पक्षकार हाशिम अंसारी के बेटे इकबाल अंसारी श्रीश्री को स्वतंत्र मध्यस्थ नहीं मानते. अंसारी का कहना है कि उन्होंने पत्र लिखकर मुस्लिमों को विवादित जमीन से अपना दावा खत्म करने के लिए कहा था. इसके अलावा राम मंदिर आंदोलन की अगुवा रहा राम जन्मभूमि न्यास भी श्रीश्री रविशंकर को बाहरी मानता है क्योंकि वे इस आंदोलन का हिस्सा नहीं थे.

आर्ट ऑफ लिविंग से संबंधित अधिकारी गौतम विज ने aajtak.in से बातचीत में कहा कि श्रीश्री रविशंकर को इस मध्यस्थता से कोई निजी लाभ नहीं मिलना है. उन्होंने तमाम नकारात्मकता के बावजूद इस चुनौती को स्वीकार किया है, जो वर्षों से दो समुदायों के बीच विवाद का कारण बना हुआ है. कुछ लोग उनके (श्रीश्री रविशंकर) खिलाफ हैं लेकिन बहुत सारे लोग उनके साथ भी हैं. अयोध्या मसले पर शुरू से ही श्रीश्री रविशंकर का मत रहा है इसका हल ऐसा हो जिसमें सभी पक्षों को जिताने वाली स्थिति हो.

उन्होंने बताया कि इससे पहले दुनिया के विभिन्न देशों में जारी संघर्षों में भी श्रीश्री रविशंकर ने मध्यस्थता के जरिए हल निकालने के प्रयास किए हैं. फिर चाहे जॉर्डन, सीरिया और लेबनान में जारी संघर्ष में शरणार्थी शिविरों में किया गया काम हो या दक्षिण अमेरिकी देशों में शुरू की गई शांति प्रक्रिया. इसके अलावा उन्होंने इराक के कुर्दिस्तान में याजीदी महिलाओं के लिए भी कार्य किया. बिहार में रणबीर सेना और सीपीआई-एमएल के लंबे समय से चले खूनी संघर्ष को खत्म कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई व कश्मीर के युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए अभियान चलाया.

उल्लेखनीय है आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्रीश्री रविशंकर अपने संदेश के जरिए पूरी दुनिया में चल रहे संघर्ष को खत्म करने के लिए प्रेम का मंत्र देने के लिए जाने जाते हैं. उन्होंंने दुनिया में लंबे समय से चल रहे खूनी संघर्षों में अपनी संस्था के माध्यम से प्रेम और सद्भाव का पाठ पढ़ाया. ऐसे में राम मंदिर विवाद को सुलझाने में वे कितना कामयाब होते हैं यह तो समय ही तय करेगा.

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