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पवार ने जो बोया वही काटा, वसंतराव पाटिल की पत्नी ने याद दिलाया 41 साल पुराना वाकया

अजित पवार ने 41 साल पुरानी घटना को ताजा कर दिया है, जब शरद पवार 1978 में कांग्रेस नेता वसंतदादा पाटिल को झटका देते हुए जनता पार्टी के साथ मिलकर सीएम बन गए थे और कांग्रेस देखती रह गई थी. महाराष्ट्र के ताजा घटनाक्रम में वसंतदादा पाटिल की पत्नी शालिनी पाटिल ने कहा कि शरद पवार के साथ 'जैसे को तैसा' वाली बात हुई है.

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aajtak.in
aajtak.in नई दिल्ली, 25 November 2019
पवार ने जो बोया वही काटा, वसंतराव पाटिल की पत्नी ने याद दिलाया 41 साल पुराना वाकया अजित पवार और शरद पवार

  • महाराष्ट्र की सियासत में महासंग्राम
  • चाचा-भतीजे के बीच वर्चस्व की जंग
  • शरद ने 1987 में किया था बगावत

महाराष्ट्र की सत्ता के खेल में अजित पवार अपने चाचा एनसीपी प्रमुख शरद पवार के नक्शे कदम पर चल रहे हैं. कांग्रेस-शिवसेना-एनसीपी सरकार बनाने के लिए मंथन ही कर रहे थे कि अजित पवार ने शरद पवार से बगावत कर बीजेपी के साथ हाथ मिलाकर सरकार बना ली.

अजित पवार ने 41 साल पुरानी घटना को ताजा कर दिया है, जब शरद पवार 1978 में कांग्रेस नेता वसंतदादा पाटिल को झटका देते हुए जनता पार्टी के साथ मिलकर सीएम बन गए थे और कांग्रेस देखती रह गई थी. महाराष्ट्र के ताजा घटनाक्रम के बीट वसंतदादा पाटिल की पत्नी शालिनी पाटिल ने कहा कि शरद पवार के साथ 'जैसे को तैसा' वाली बात हुई है.

वसंतदादा पाटिल की पत्नी ने कहा, 'शरद पवार ने जिस तरह का बर्ताव वसंत राव के साथ किया था, उनके साथ वैसा बर्ताव होना ही चाहिए था, जो अजित पवार ने बीजेपी के साथ जाकर किया है.' शालिनी पाटिल ने कहा कि शरद पवार ने 1978 में जो बोया वही काट रहे हैं, वह भी सत्ता हथियाने के लिए पीठ में खंजर मारने जैसा था. उन्होंने कहा कि शरद पवार गुप्त रूप से बगावत करने की बजाय वह वसंत दादा पाटिल से सीधे तौर पर भी अपनी बात कह सकते थे.

बता दें कि देश में आपातकाल के बाद 1977 में हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की दिग्‍गज नेता और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को हार मिली और जनता पार्टी की सरकार बनी थी. ऐसे में महाराष्‍ट्र में भी कांग्रेस पार्टी को कई सीटों से हाथ धोना पड़ा था, जिसके चलते राज्‍य के तत्कालीन मुख्‍यमंत्री शंकर राव चव्‍हाण ने हार की नैतिक जिम्‍मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्‍तीफा दे दिया था. ऐसे में वसंतदादा पाटिल उनकी जगह महाराष्‍ट्र के सीएम बने थे.

यही दौर था जब कांग्रेस में टूट हो गई और पार्टी कांग्रेस (एस) और कांग्रेस (आई) दो धड़ों में बंट गई थी. ऐसे में शरद पवार कांग्रेस (एस) में शामिल हो गए थे. साल 1978 में महाराष्‍ट्र में विधानसभा चुनाव हुआ और कांग्रेस के दोनों धड़ों ने अलग-अलग चुनाव लड़ा था. तब कांग्रेस (एस) को 69 सीटें मिली थीं और कांग्रेस (आई) को 65 सीटें हासिल हुई थीं. जबकि, जनता पार्टी ने 99 सीटों पर कब्जा जमाया था. इस तरह से तीनों ही दल अपने दम पर सरकार गठन की स्थिति में नहीं थी. 

ऐसे में वसंतदादा पाटिल के नेतृत्व में कांग्रेस के ही दोनों धड़ों ने साथ आने का फैसला लिया था. कांग्रेस के दोनों धड़े मिलकर सरकार बनाती इससे पहले ही शरद पवार ने कांग्रेस (एस) को तोड़ दिया. शरद पवार ने कांग्रेस (एस) के 38 विधायकों को लेकर जनता पार्टी के साथ प्रोग्रेसिव डेमोक्रैटिक फ्रंट बनाकर सरकार बना ली थी.

इस तरह से 37 साल के उम्र में महाराष्ट्र के सबसे युवा मुख्‍यमंत्री बने थे. बाद में यशवंतदादा पाटिल भी शरद पवार की पार्टी में शामिल हो गए थे. पवार की यह सरकार दो साल चली थी. इंदिरा गांधी के दोबारा सत्‍ता में आने के बाद फरवरी 1980 में पवार के नेतृत्‍व वाली सरकार गिर गई थी. हालांकि बाद में शरद पवार भी कांग्रेस में वापसी कर गए थे.

महाराष्ट्र की सियासत ने एक बार फिर करवट ली है और 41 साल पुराने इतिहास को दोहराया है. अजित पवार ने भी अपने चाचा और गुरु शरद पवार के नेतृत्‍व वाली एनसीपी को तोड़ दिया है और बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बनाई है और डिप्टी सीएम बने हैं. ऐसे में देखना है कि अजित पवार कितने एनसीपी विधायकों को अपने साथ जोड़कर रख पाते हैं, क्योंकि शरद पवार सक्रिय हो गए हैं पार्टी को बचाने के लिए. ऐसे में देखना होगा कि चाचा-भतीजे की जंग में कौन भारी पड़ता है.

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