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मोदी सरकार का फैसला, इंदिरा और राजीव गांधी के नाम पर नहीं होंगे राजभाषा पुरस्कार

नरेंद्र मोदी की सरकार ने हिंदी दिवस पर दिए जाने वाले राजभाषा पुरस्कारों के नाम से पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के नाम पर कैंची चला दी है. सरकार ने इन पुरस्कारों के नाम बदल दिए हैं. सरकार के इस कदम से विवाद पैदा हो सकता है. ये पुरस्कार सरकार में हिंदी के प्रगतिशील तरीके से उपयोग के लिए दिए जाते हैं.

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aajtak.in [Edited By: स्वपनल सोनल]नई दिल्ली, 21 April 2015
मोदी सरकार का फैसला, इंदिरा और राजीव गांधी के नाम पर नहीं होंगे राजभाषा पुरस्कार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फाइल फोटो

नरेंद्र मोदी की सरकार ने हिंदी दिवस पर दिए जाने वाले राजभाषा पुरस्कारों के नाम से पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के नाम पर कैंची चला दी है. सरकार ने इन पुरस्कारों के नाम बदल दिए हैं. सरकार के इस कदम से विवाद पैदा हो सकता है. ये पुरस्कार सरकार में हिंदी के प्रगतिशील तरीके से उपयोग के लिए दिए जाते हैं.

राजभाषा विभाग की ओर से 25 मार्च 2015 को जारी आदेश के मुताबिक, दोनों पूर्व प्रधानमंत्रियों के नाम पर दिए जाने वाले पुरस्कारों को बदल दिया गया है. 1986 में शुरू किया गया 'इंदिरा गांधी राजभाषा पुरस्कार' अब 'राजभाषा कीर्ति पुरस्कार' के नाम से जाना जाएगा, जबकि 'राजीव गांधी राष्ट्रीय ज्ञान-विज्ञान मौलिक पुस्तक लेखन पुरस्कार' को अब 'राजभाषा गौरव पुरस्कार' कहा जाएगा.

यह आदेश मंत्रालय की ज्वॉइंट सेक्रेटरी पूनम जुनेजा की ओर से जारी किया गया है. नई पुरस्कार योजनाएं 2015-16 से शुरू की गई हैं और ये 1986 और 2005 में जारी पुराने निर्देश की जगह लेंगी. गृह मंत्रालय की ओर से यह निर्देश सभी राज्यों, मंत्रियों, प्रधानमंत्री कार्यालय, राष्ट्रपति सचिवालय, कैबिनेट सचिवालय और लोकसभा, राज्यसभा सचिवालयों को भेजा गया है. ये पुरस्कार राष्ट्रपति 14 सितंबर को हिंदी दिवस के मौके पर मंत्रालयों, पीएसयू, केंद्र सरकार के अधिकारियों और प्राइवेट सिटीजंस को देते हैं.

क्या था पहले और अब क्या
गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि यह फैसला मंत्रालयों और जनता के बीच मौजूदा पुरस्कार योजनाओं को लेकर भ्रम को समाप्त करने के लिए लिया गया है. अभी तक इंदिरा गांधी राजभाषा पुरस्कार के तहत हिंदी का सबसे प्रगतिशील उपयोग करने वाले मंत्रालयों या सरकारी कंपनियों या बैंकों को पुरस्कार के तौर पर शील्ड दी जाती थी, जबकि हिंदी में सर्वश्रेष्ठ मौलिक पुस्तकें लिखने वाले केंद्र सरकार के कर्मचारियों को 40,000 रुपये से एक लाख रुपये तक के नकद पुरस्कार मिलते थे.

राजीव गांधी राष्ट्रीय ज्ञान-विज्ञान मौलिक पुस्तक लेखन पुरस्कार के तहत विज्ञान आधारित विषयों पर हिंदी में किसी व्यक्ति की ओर से लिखी गई पुस्तकों को 10,000 रुपये से दो लाख रुपये तक के पुरस्कार दिए जाते थे.

नए आदेश के तहत राजभाषा कीर्ति पुरस्कार योजना के तहत मंत्रालयों, पीएसयू, ऑटोनोमस बोर्ड्स और सरकारी बैंकों को 39 शील्ड्स दी जाएंगी. नई राजभाषा गौरव पुरस्कार योजना के तहत ज्ञान और विज्ञान विषयों पर क्वॉलिटी वाली पुस्तकें लिखने वाले नागरिकों को 10,000 रुपये से दो लाख रुपये के 13 पुरस्कार दिए जाएंगे. लेकिन हिंदी में मौलिक पुस्तकें लिखने वाले केंद्र सरकार के कर्मचारियों को 30,000 रुपये से एक लाख रुपये के चार नकद पुरस्कार दिए जाएंगे.

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