एडवांस्ड सर्च

यूपीकोका विधेयक हुआ पास, सपा-बसपा ने किया वॉकआउट

विपक्षी दलों के विरोध के बाद भी उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने यूपीकोका को सदन में पास करा लिया है. इस नए कानून के कई नियम बेहद सख्त हैं.

Advertisement
aajtak.in
aajtak.in नई दिल्ली, 21 December 2017
यूपीकोका विधेयक हुआ पास, सपा-बसपा ने किया वॉकआउट यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

योगी सरकार की ओर से संगठित अपराध पर नकेल कसने के लिए विधेयक यूपीकोका (UPCOCA) विपक्षी दलों के लगातार विरोध के बावजूद उत्तर प्रदेश विधानसभा में पास हो गया है. नए कानून के तहत अंडरवर्ल्ड, जबरन वसूली, जबरन मकान और जमीन पर कब्जा, वेश्यावृत्ति, अपहरण, फिरौती, धमकी और तस्करी जैसे अपराध शामिल होंगे.

विपक्षी दल सपा-बसपा की गैरमौजूदगी में यह बिल पास हुआ. यूपी विधानसभा के शीतकालीन सत्र में 20 दिसंबर को इस विधेयक को पेश किया गया था. महाराष्ट्र के बाद उत्तर प्रदेश दूसरा ऐसा प्रदेश बन गया है, जो इतना सख्त कानून लागू करने जा रहा है.

विपक्ष कर रहा विरोध

बसपा सुप्रीमो और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती लगातार यूपीकोका का विरोध कर रही हैं. उनका कहना है कि इसका इस्तेमाल दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के खिलाफ होगा. बीएसपी इस कानून का विरोध करती है और व्यापक जनहित में इसे वापस लेने की मांग करती है. उन्होंने यूपीकोका को जनता के लिए अभिशाप तक कह डाला.

मायावती ने आरोप लगाया कि बीजेपी जाति और संप्रदाय के आधार पर पक्षपात करते हुए तमाम कानून का गलत इस्तेमाल करती है. ऐसे में नया कानून उत्तर प्रदेश की जनता के लिए बड़ा सिर दर्द साबित हो सकता है. विपक्षी पार्टी समाजवादी पार्टी भी इसके खिलाफ है और उसका कहना है कि इस कानून का दुरुपयोग सरकार विरोधियों को दबाने के लिए कर सकती है.

नए यूपीकोका (UPCOCA) यानि उत्तर प्रदेश कंट्रोल ऑफ आर्गेनाइज्ड क्राइम एक्ट के तहत निम्नलिखित प्रावधान हैं-

- किसी भी तरह का संगठित अपराध करना वाला व्यक्ति इस कानून की जद में आएगा.

- इस कानून के तहत गिरफ्तार व्यक्ति को 6 महीने तक जमानत नहीं मिलेगी.

- इस कानून के तहत केस तभी दर्ज होगा, जब आरोपी कम से कम दो संगठित अपराधों में शामिल रहा हो. उसके खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई हो.

- यूपीकोका में गिरफ्तार अपराधी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल करने के लिए 180 दिन का समय मिलेगा. अभी तक के कानूनों में 60 से 90 दिन ही मिलते हैं.

- यूपीकोका के तहत पुलिस आरोपी की रिमांड 30 दिन के लिए ले सकती है, जबकि बाकी कानूनों में 15 दिन की रिमांड ही मिलती है.

- इस कानून के तहत कम से कम अपराधी को 5 साल की सजा मिल सकती है. अधिकतम फांसी की सजा का प्रावधान होगा.

केस दर्ज करने और जांच के लिए अलग से नियम

- राज्य स्तर पर ऐसे मामलों की मॉनिटरिंग गृह सचिव करेंगे.

- मंडल के स्तर पर आईजी रैंक के अधिकारी की संस्तुति के बाद ही केस दर्ज किया जाएगा.

- जिला स्तर पर यदि कोई संगठित अपराध करने वाला है, तो उसकी रिपोर्ट कमिश्नर, डीएम देंगे.

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें. डाउनलोड करें
Advertisement
Advertisement

संबंधित खबरें

Advertisement

रिलेटेड स्टोरी

No internet connection

Okay