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मुनव्वर राना ने छोड़ी उर्दू अकादमी की सरपरस्ती

मशहूर शायर मुनव्वर राना ने सोमवार को उत्तर प्रदेश उर्दू अकादमी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया. वह महज साढ़े तीन महीने पहले ही अकादमी के अध्यक्ष बनाए गए थे.

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आशीष मिश्रा [Edited By: संदीप कुमार सिन्हा]नई दिल्ली, 28 May 2014
मुनव्वर राना ने छोड़ी उर्दू अकादमी की सरपरस्ती

मशहूर शायर मुनव्वर राना ने सोमवार को उत्तर प्रदेश उर्दू अकादमी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया. वह महज साढ़े तीन महीने पहले ही अकादमी के अध्यक्ष बनाए गए थे. इस्तीफे का जाहिर कारण उन्होंने अकादमी में भ्रष्टाचार बताया है. हालांकि, इस इस्तीफे को एक प्रभावशाली मंत्री की दखलंदाजी और अंदरुनी खींचतान के परिणाम के रूप में देखा जा रहा है.

राज्य सरकार ने इसी साल पांच फरवरी को उर्दू अकादमी का गठन किया था. जिसमें मुनव्वर राना को अध्यक्ष व नवाज देवबंदी को चेयरमैन नियुक्त किया गया था. राना ने अकादमी के कामकाज को रफ्तार देने का प्रयास किया. हालांकि, सफल न हो सके. सूत्रों का कहना है कि एक प्रभावशाली मंत्री के अप्रत्यक्ष दखल से अध्यक्ष व चेयरमैन में खींचतान शुरू हुई. कहा जाता है कि चेयरमैन ने अध्यक्ष के फैसलों में फेरबदल करना शुरू कर दिया. जिससे तल्खियां और बढ़ गईं. चेयरमैन को मंत्री का वरदहस्त हासिल होना बताया जाता है.

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को इस्तीफा भेजने के बाद मुनव्वर राना ने कहा, 'अकादमी में चारों ओर भ्रष्टाचार है. कुछ लोग शायरों, लेखकों की मदद और योजनाओं में भी पार्टी फंड के नाम पर वसूली कर रहे हैं. इस वजह से शायरों और लेखकों मिलने वाला पुरस्कार सालों से नहीं बंटा है. शायरों की बेवा को पेंशन जैसी संवेदनशील योजना पर अड़ंगेबाजी की जा रही है. अकादमी में कर्मचारियों की संख्या पहले ही कम है. ऊपर से दो कर्मचारी प्रमुख सचिव भाषा के घर पर तैनात हैं. अकादमी हर माह दस हजार रुपये से अधिक की धनराशि प्रमुख सचिव भाषा की टैक्सी पर खर्च करती है. संविदा पर काम कर रहे कर्मचारियों में से ज्यादातर एक-दूसरे के रिश्तेदार हैं.'

मुनव्वर राना का यह भी कहना था कि उन्हें जो पद दिया गया था, वह उनके कद से छोटा था. उर्दू की सेवा के लिए उन्होंने यह पद स्वीकार किया था. अपने छोटे से कार्यकाल में उन्होंने कभी भी अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठकर काम नहीं किया. न ही अकादमी से कोई सुविधा ली थी. चूंकि उर्दू की तरक्की में जुटे लोगों के हित के लिए फैसला लेने की स्थिति नहीं थी, इसलिए उन्होंने इस्तीफा देना बेहतर समझा. उन्होंने किसी का नाम लेने से इनकार करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री अगर कुछ जानना चाहेंगे तो वह उन्हें पूरी स्थिति जरूरत बताएंगे.

दूसरी ओर अकादमी के चेयरमैन नवाज देवबंदी का कहना है कि अध्यक्ष को कोई अख्तियार नहीं होता है. फिर भी वह उनके प्रस्तावों पर अमल कर रहे थे.

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