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13 साल से जेल में बंद हैं मुख्तार, लेकिन कम नहीं हुआ सियासी रसूख

मुख्तार अंसारी ने अपना सियासी सफर बसपा से ही शुरू किया था. वो पिछले पांच  विधानसभा चुनाव में जीतकर विधायक बनते आ रहे हैं.

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aajtak.in
कुबूल अहमद नई दिल्ली, 09 January 2018
13 साल से जेल में बंद हैं मुख्तार, लेकिन कम नहीं हुआ सियासी रसूख बसपा विधायक मुख्तार अंसारी

पूर्वांचल की सियासत के बाहुबली मुख्तार अंसारी की राजनीतिक ताकत लंबे समय से जेल में बंद रहने के बाद भी फीकी नहीं पड़ी है. वो फिलहाल यूपी की बांदा जेल में बंद हैं, आज उन्हें दिल का दौरा पड़ा जिसके बाद लखनऊ शिफ्ट किया गया है. बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय की हत्या के आरोप में मुख्तार अंसारी जेल में बंद हैं. इसके बावजूद पूर्वांचल के मऊ और गाजीपुर में उनका सियासी वर्चस्व कम नहीं हुआ है. हालत ये है कि जेल में रहते हुए वो कई बार विधायक बने हैं.

उत्तर प्रदेश के 2017 विधानसभा चुनाव से पहले मुख्तार अंसारी की पार्टी कौमी एकता दल का शिवपाल यादव की पहल पर समाजवादी पार्टी में विलय किया गया. इस पर अखिलेश यादव ने खासा एतराज जताया था, जिसके बाद उन्हें सपा में शामिल नहीं किया गया. इसके बाद मुख्तार अंसारी ने पूरे परिवार के साथ बसपा का दामन थाम लिया.

मुख्तार अंसारी ने अपना सियासी सफर बसपा से ही शुरू किया था. वो पिछले पांच  विधानसभा चुनाव में जीतकर विधायक बनते आ रहे हैं.  मुख्तार 1996 में पहली बार विधानसभा चुनाव में बसपा के उम्मीदवार के तौर पर उतरे और जीत हासिल की. इसके बाद उन्होंने पलटकर नहीं देखा. निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर 2002 और 2007 में चुनाव जीता. इसके बाद 2012 में अंसारी कौमी एकता दल का गठन करके चुनाव मैदान में उतरे और जीत हासिल की. 2017 विधानसभा चुनाव में बीएसपी से उतरे और मोदी लहर में भी जीतने में कामयाब हुए.

मुख्तार अंसारी के बड़े भाई अफजाल अंसारी ने 1985 से 1996 तक लगातार जीत हासिल की. वो विधायक से लेकर सांसद तक बने. अफजल अंसारी ने वामपंथी पार्टी से लेकर सपा तक से जीत हासिल की, लेकिन 2002 के विधानसभा चुनाव में वो बीजेपी उम्मीदवार कृष्णानंद राय से चुनाव हार गए.

मुख्तार का सियासी वर्चस्व सिर्फ मऊ विधानसभा तक ही नहीं है, बल्कि मऊ जिले के साथ-साथ गाजीपुर और बलिया की कुछ सीटों पर भी वो खासा प्रभाव रखते हैं. मुख्तार अंसारी 2005 से जेल में बंद हैं. वो जेल में रहते हुए भी पिछले तीन विधानसभा चुनाव जीते हैं. 2009 के लोकसभा चुनाव में मुख्तार अंसारी वाराणसी से उतरे और बीजेपी के दिग्गज नेता मुरली मनोहर जोशी के पसीने छुड़ा दिए. जोशी ने बहुत कम वोटों से जीत हासिल की थी.

2017 के विधानसभा चुनाव में मुख्तार अंसारी के अलावा उनके बेटे और भाई भी उतरे लेकिन उनके अलावा कोई दूसरा नहीं जीत सका. फिलहाल उनके  बड़े बेटे अब्बास अंसारी पिता की सियासी विरासत संभाल रहे हैं.

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