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चुनावी हार के बाद तकरार, 112 दिन बाद टूट की कगार पर सपा-बसपा गठबंधन

प्रेस कॉन्फ्रेंस में मायावती ने कहा था कि यह प्रेस कॉन्फ्रेंस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह की नींद उड़ाने वाली है. हालांकि, 23 मई को जब नतीजे आए तो सब कुछ पलट गया और हालात अब ये हैं कि 112 दिन बाद सपा-बसपा का यह ऐतिहासिक गठबंधन अतीत बनता दिखाई दे रहा है.

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aajtak.in
जावेद अख़्तर नई दिल्ली, 04 June 2019
चुनावी हार के बाद तकरार, 112 दिन बाद टूट की कगार पर सपा-बसपा गठबंधन 20 मई को मायावती से मिले थे अखिलेश यादव

12 जनवरी 2019 को लखनऊ के ताज होटल से एक ऐसी तस्वीर सामने आई जिसने पूरे देश की सियासत पर छाप छोड़ी. बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती व अखिलेश ने एक-साथ एक-मंच पर बैठकर लोकसभा चुनाव 2019 की लड़ाई मिलकर लड़ने का ऐलान किया. दो धुर विरोधी विचारधारा वाले इन दलों के संगम की आधिकारिक सूचना देते हुए मायावती ने कहा कि आज की यह प्रेस कॉन्फ्रेंस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह की नींद उड़ाने वाली है. हालांकि, 23 मई को जब नतीजे आए तो सब कुछ पलट गया और हालात अब ये हैं कि 112 दिन बाद सपा-बसपा का यह ऐतिहासिक गठबंधन अतीत बनता दिखाई दे रहा है.

लोकसभा चुनाव में करारी शिकस्त मिलने के बाद बसपा अध्यक्ष मायावती ने 2 जून से दिल्ली में परिणामों की समीक्षा पर बैठक शुरू की. पहले ही दिन कई राज्यों के प्रभारियों को बदल दिया गया. इसके बाद 3 जून को यूपी के नतीजों की समीक्षा हुई और इस बैठक में मायावती के साथ सभी नवनिर्वाचित 10 सांसद और तमाम जिलाध्यक्ष मौजूद रहे. इस बैठक के बाद मंगलवार को मायावती ने बाकायदा प्रेस कॉन्फ्रेंस की और बताया कि अगर अखिलेश ने पार्टी में बदलाव किया तो साथ बने रहेंगे. साथ ही उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि उनकी पार्टी विधानसभा उपचुनाव में अकेले लड़ेगी.

सूत्रों के मुताबिक, मायावती ने कह दिया कि अखिलेश यादव सपा का कोर यादव वोटबैंक ट्रांसफर कराने में सफल नहीं हुए हैं, यहां तक कि वो अपनी पत्नी डिंपल यादव को कन्नौज से चुनाव नहीं जिता पाए हैं. मायावती ने साफ कहा कि गठबंधन से उन्हें अपेक्षित परिणाम नहीं मिले हैं. मायावती का यह तेवर जैसे ही सामने आया, सपा-बसपा गठबंधन के खात्मे की चर्चा ने जोर पकड़ लिया. 11 सीटों पर विधानसभा उपचुनाव में अकेले लड़ने का ऐलान करते हुए मायावती ने इस रिश्ते के खत्म होने के संकेत भी दे दिए.

akhilesh-mayawati-a_060419082612.jpg12 जनवरी को मायावती और अखिलेश ने किया था गठबंधन का ऐलान

मायावती का यह रुख देखकर अखिलेश यादव ने भी कह दिया कि अब वो अपने साधन और अपने संसाधन से चुनाव लड़ेंगे. दोनों नेताओं के ये अंदाज देखकर इस गठजोड़ का भविष्य खत्म माना जा रहा है. एक और दिलचस्प बात ये है कि 19 मई को आखिरी चरण का मतदान होने के बाद जब एग्जिट पोल के अनुमान एकतरफा बीजेपी के पक्ष में आए तो गठबंधन की समीकरण फेल होने की चर्चा होने लगी. अगले दिन 20 मई को अखिलेश यादव ने मायावती से मुलाकात की और ट्विटर पर एक फोटो शेयर करते हुए लिखा 'अब अगले क़दम की तैयारी...'

हालांकि, इस मुलाकात के बाद 23 मई को जब नतीजे आए और गठबंधन को महज 15 सीटें मिलीं, दोनों दलों का गठजोड़ धराशाई हो गया. इसके बाद मायावती और अखिलेश यादव की कोई मुलाकात नहीं हुई और 3 जून को मायावती ने दिल्ली में हार की समीक्षा करते हुए साइकिल का साथ छोड़ने के संकेत भी दे दिए. इस तरह 112 दिन बाद सपा-बसपा के ऐतिहासिक गठबंधन का एक बार फिर समापन होता दिखाई दे रहा है.

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