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इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मथुरा के जवाहर बाग़ मामले की CBI जांच के दिए आदेश

यूपी में मथुरा के चर्चित जवाहर बाग हिंसा मामले में अखिलेश सरकार की मुश्किलें बढ़ सकती हैं. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस मामले की सुनवाई करते हुए मामले की सीबीआई जांच के आदेश दिए है.

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पंकज श्रीवास्तव/कुमार अभ‍िषेक [Edited by : दिनेश अग्रहरि]लखनऊ, 02 March 2017
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मथुरा के जवाहर बाग़ मामले की CBI जांच के दिए आदेश मथुरा में जयगुरुदेव समर्थकों ने किया था जमकर हंगामा

यूपी में मथुरा के चर्चित जवाहर बाग हिंसा मामले में अखिलेश सरकार की मुश्किलें बढ़ सकती हैं. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस मामले की सुनवाई करते हुए मामले की सीबीआई जांच के आदेश दिए है.

अधिवक्ता अश्वनी उपाध्याय और इस हिंसा में शहीद हुए सीओ मुकुल दिवेदी की पत्नी अर्चना दिवेदी की तरफ से दायर इस याचिका में सुनवाई के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट की दो जजों की बेंच ने मामले की जांच सीबीआई से कराने के आदेश देने के साथ सीबीआई को मामले की जांच की प्रगति रिपोर्ट दो महीने में देने के आदेश भी दिए हैं.

अधिवक्ता अश्वनी उपाध्याय और इस हिंसा में शहीद हुए डिप्टी एसपी मुकुल दिवेदी की पत्नी अर्चना दिवेदी की तरफ से दायर याचिका में सीबीआई जांच की मांग की गई थी.

आरोप है कि इस मामले की जांच में राज्य सरकार आरोपियों को बचाने में लगी है, साथ ही हिंसा के इतने बड़े मामले में सरकार ने एक भी व्यक्ति के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की. महज स्थानीय डीएम और एसपी का तबादला कर इसे ठंढे बस्ते में डाल दिया गया था.

याचिका पर कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा था कि मामले के मुख्य आरोपी रामवृक्ष के खिलाफ 1 जनवरी 2014 से अब तक कितनी शिकायत दर्ज हुई? कितने एफआईआर दर्ज हुये? कितनी चार्जशीट फाइल हुई?

कोर्ट ने पूछा है की जवाहर बाग़ में रुकने के लिए जब प्रशासन द्वारा दो दिनों के लिए ही इजाजत दी गई थी, तब ये लोग इतने दिनों तक कैसे रुके रहे? कोर्ट ने यह भी पूछा है कि इस मामले में जनवरी 2014 से अब तक कौन-कौन डीएम एवं एसपी मथुरा में पोस्टेड थे और उन्होंने पार्क को खाली कराने के लिए क्या-क्या कार्रवाई की गई.

इन सवालों के जवाब मिलने के बाद कोर्ट कार्रवाई से संतुष्ट नहीं हुई और आज इस मामले में सीबीआई जांच के आदेश जारी कर दिए गए. चीफ जस्टिस डीबी भोसले और जस्टिस यशवंत वर्मा की खंडपीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए सीबीआई को यह आदेश भी जारी किया है कि वह इस मामले की जांच की प्रगति रिपोर्ट दो माह में कोर्ट में जमा करे.

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