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यूपी के स्वास्थ्य विभाग में घोटाले की सुगबुगाहट, मंत्री ने सीएम योगी से की जांच कराने की मांग

स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह ने मुख्यमंत्री को चिट्ठी लिखकर मामले मे जांच करवाने का अनुरोध किया है. स्वास्थ्य मंत्री के आरोपों के मुताबिक, उनके विभाग मे टेंडर पास होने के बावजूद नियमों को दरकिनार कर बगैर प्रक्रिया के पैसे भेजे गए.

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aajtak.in
शिवेंद्र श्रीवास्तव लखनऊ, 29 May 2020
यूपी के स्वास्थ्य विभाग में घोटाले की सुगबुगाहट, मंत्री ने सीएम योगी से की जांच कराने की मांग उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ (फाइल फोटो)

  • स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह ने सीएम योगी आदित्यनाथ को लिखी चिट्ठी
  • मंत्री ने सीएम योगी से की मामले की जांच करवाने की मांग

उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग में घोटाले की सुगबुगाहट है. स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को चिट्ठी लिखकर मामले मे जांच करवाने का अनुरोध किया है. स्वास्थ्य मंत्री के आरोपों के मुताबिक, उनके विभाग मे टेंडर पास होने के बावजूद नियमों को दरकिनार कर बगैर प्रक्रिया के पैसे भेजे गए.

राष्ट्रीय कैंसर, ह्रदय रोग, मधुमेह एवं स्ट्रोक नियंत्रण एवं रोकथाम कार्यक्रम (NPCDCS) के तहत जिलों मे कई तरह की मुद्रित सामग्री वितरण करने के लिए प्रिंटिग का ठेका टेंडर के माध्यम से दिया जाना था, जिसके लिए पूरी प्रक्रिया होने के बाद एक कंपनी को ठेका दे दिया गया था. मंत्री के आरोपों के मुताबिक, निदेशक स्वास्थ्य मिशन ने बगैर मंजूरी के ये कार्य किया.

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इससे पहले उत्तर प्रदेश में पावर कारपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) के पीएफ घोटाले का भी मामला सामने आया था. मामले में सीबीआई ने 2 आईएएस अफसरों से पूछताछ भी की और उनके बयान दर्ज किए. ये अफसर पूर्व प्रमुख सचिव ऊर्जा आलोक कुमार और पूर्व मैनेजिंग डायरेक्टर अपर्णा यू हैं. सूत्रों के मुताबिक, इन दोनों अफसरों से प्रदेश में हुए 22 अरब के पीएफ घोटाले के मामले में कई नियम कायदे कानून के बारे में पूछताछ की गई. वहीं, डीएचएफएल में निवेश करने वाली ब्रोकर फर्मों के बारे में भी सीबीआई ने अफसरों से लिखित जानकारी ली है.

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दरअसल, पीएफ के पैसे के निवेश का यह घोटाला पिछले साल तब सामने आया था जब ऊर्जा विभाग में काम करने वाले कर्मचारी नेताओं ने यह सवाल उठाया था कि आखिरकार उनके पीएफ का पैसा एक दागी कंपनी में क्यों निवेश किया गया है? मामला बढ़ते देख योगी सरकार ने पहले जांच ईओडब्ल्यू को दी, लेकिन बाद में पूरा मामला सीबीआई को सौंप दिया. सीबीआई ने इस मामले में एफआईआर दर्ज होने के 2 दिन बाद ही विभाग के वित्त निदेशक सुधांशु त्रिवेदी, सचिव पीके गुप्ता और उसके बाद पूर्व एमडी एपी मिश्र को गिरफ्तार कर लिया था.

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