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लखनऊः दशहरे पर ऐशबाग की रामलीला में शिरकत करेंगे पीएम मोदी, 'आतंकवाद का खात्मा' है थीम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 अक्टूबर को लखनऊ के ऐशबाग की रामलीला में शिरकत करेंगे. प्रधानमंत्री शाम छह से सात बजे तक करीब 1 घंटे तक रामलीला में रहेंगे. यहां पीएम भगवान राम की आरती करेंगे और रामलीला का आखिरी प्रसंग रावणवध भी देखेंगे.

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कुमार अभिषेक / मोनिका शर्मा लखनऊ, 10 October 2016
लखनऊः दशहरे पर ऐशबाग की रामलीला में शिरकत करेंगे पीएम मोदी, 'आतंकवाद का खात्मा' है थीम पीएम मोदी रामलीला में करेंगे शिरकत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 अक्टूबर को लखनऊ के ऐशबाग की रामलीला में शिरकत करेंगे. प्रधानमंत्री शाम छह से सात बजे तक करीब 1 घंटे तक रामलीला में रहेंगे. यहां पीएम भगवान राम की आरती करेंगे और रामलीला का आखिरी प्रसंग रावणवध भी देखेंगे.

'आतंकवाद का खात्मा' है थीम
उसके बाद पीएम सीधे एयरपोर्ट से विमान में बैठकर दिल्ली वापस लौट आएंगे. प्रधानमंत्री की आगवानी गृहमंत्री राजनाथ सिंह करेंगे जो लखनऊ के सांसद भी हैं. राजनाथ सिंह सोमवार दोपहर ही पीएम के इस कार्यक्रम के लिए लखनऊ पंहुच जाएंगे. ऐशबाग की रामलीला हर बार किसी न किसी थीम के नाम पर होती है और इसबार रामलीला की थीम है 'आतंकवाद का खात्मा'.

पहली बार किसी पीएम ने स्वीकारा न्योता
प्रधानमंत्री 400 साल पुरानी ऐशबाग की उस रामलीला में शिरकत करने लखनऊ आ रहे हैं जिसके बारे में माना जाता है कि खुद गोस्वामी तुलसीदास ने इसकी बुनियाद रखी. रामलीला कमेटी के सदस्यों के मुताबिक ये कमिटी आजादी के बाद से सभी प्रधानमंत्री को हर साल रामलीला में मुख्य अतिथि बनाने के लिए आमंत्रित करती रही है लेकिन पहली बार किसी पीएम ने हमारे आमंत्रण को स्वीकार किया है. आयोजन समिति पीएम मोदी के आगमन को लेकर खासी उत्साहित है. मंच पर सिर्फ पीएम मोदी, गृहमंत्री राजनाथा सिंह और लखनऊ के मेयर के अलावे किसी और को आने ती अनुमति नहीं होगी.

रामलीला में पीएम का कार्यक्रम
कार्यक्रम के मुताबिक पीएम मोदी शाम छह बजे रामलीला स्थल पर पंहुच जाऐंगे, जहां परंपरागत तरीके से उनका स्वागत किया जाएगा. पीएम मोदी वहां भगवान राम की आरती करेंगे और इस दौरान उनके साथ गृहमंत्री राजनाथ सिंह भी होंगे. कुछ मिनटों के स्वागत समारोह के बाद पहले राजनाथ सिंह बोंलगे और फिर प्रधानमंत्री अपनी बात रखेंगे. आखिर में पीएम मोदी रावणवध का प्रसंग देखेंगे और उसके बाद वापस एयरपोर्ट के लिए रवाना हो जाएंगे. उनके जाने के बाद इसी ऐशबाग में रावण दहन का कार्यक्रम होगा.

एतिहासिक स्वागत की तैयारी
सर्जिकल सट्राइक के बाद पहली बार पीएम लखनऊ आ रहे हैं, जिसे देखते हुए इस विजयादशमी को एतिहासिक बनाने की तैयारी में बीजेपी भी जुट गई है. अगर बीजेपी को अनुमति मिली तो पार्टी ने एयरपोर्ट से रामलीला मैदान तक मानवश्रृंखला बनाने की तैयारी कर ली है. एयरपोर्ट से रामलीला मैदान तक करीब 12 किलोमीटर तक बीजेपी इसे झंडे और बैनर से पाट देने की तैयारी में है. लोग पीएम की आगवानी के लिए रास्तों पर खड़े होगें जिसकी वजह से सुरक्षा एजेंसियां ज्यादा ही सतर्क हो गई हैं.

सुरक्षा की व्यापक तैयारी
सर्जिकल स्ट्राइक के बाद पीएम मोदी की सुरक्षा को लेकर सुरक्षा एजेसिंयां काफी सतर्क हैं. लखनऊ के पुलिस मुख्यालय में पुलिस के आला अधिकारियों की बैठकों का दौर जारी है. एनएसजी और एसपीजी ने पीएम की सुरक्षा को लेकर मॉकड्रिल भी किया है और पीएम की एयरपोर्ट से लेकर ऐशबाग तक के रूट का सैनिटाइजेशन भी किया गया.

बुलावे के बावजूद नहीं आएंगे सीएम अखिलेश
इस बार राम लीला समिति की करफ से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को भी न्योता दिया गया है लेकिन वो इस कार्यक्रम में शामिल नहीं होंगे. हालांकि माना जा रहा कि सरकार में से कोई मंत्री इसमें हिस्सा ले सकता है. अखिलेश भले ही कार्यक्रम में शिरकत न कर रहे हों लेकिन उन्होंने उम्मीद जताई है कि पीएम इस बार यूपी को कोई बड़ा तोहफा देकर जाएंगे.

गंगा-जमुनी तहजीब का प्रतीक है ऐशबाग की रामलीला
गंगा-जमुनी तहजीब का प्रतीक, ऐशबाग की रामलीला के बारे में कहा जाता है कि खुद तुलसीदास ने इसकी शुरुआत की थी लेकिन ऐशबाग की रामलीला को असल पहचान दी अवध के नवाब असफउद्दौला ने, जिसने लखनऊ के ऐशबाग इलाके में रामलीला के लिए साढ़े छह एकड़ जमीन दी थी. इस नवाब असफउद्दौला को इस गंगा-जमुनी तहजीब का जनक माना जाता है क्योंकि कहा जाता कि नवाब ने न सिर्फ रामलीला के लिए जमीन दी बल्कि खुद भी इस रामलीला मे बतौर पात्र शिरकत करते रहे. यही असफउद्दौला हैं, जिन्होंने लखनउ में एक साथ बराबर-बराबर ईदगाह और रामलीला को 6.5 एकड़ जमीन एक साथ दी थी जो गंगा-जमुनी तहजीब के प्रतीक के तौर पर खड़ा है.

क्या है ऐशबाग की रामलीला का इतिहास?
इस रामलीला के बारे में माना जाता है कि करीब पांच सौ साल पहले सबसे पहले रामलीला की शुरुआत यहीं से हुई थी जब गोस्वामी तुलसीदास ने एक साथ चित्रकूट, वाराणसी और लखनऊ में इसकी नींव रखी. कहते हैं कि पहले यहां रामलीला नहीं बल्कि राम कथा का मंचन होता था, जिसमें इस जगह पर अयोध्या से आए साधु-संत रामकथा का नाटक खेलते थे.

पीएम मोदी के आने पर राजनीति भी शुरू
बहरहाल प्रधानमंत्री मोदी के रामलीला में शिरकत करने से सियासत भी गरमा रही है. मायावती ने अपनी लखनऊ रैली में मोदी के रामलीला में आने पर निशाना साधा था अब दूसरे दल भी इसे शायद ही पचा पाएं.

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