एडवांस्ड सर्च

जानें- कौन हैं गोसेवा करने वाले मुन्ना मास्टर जिन्हें मिलेगा पद्मश्री

मुन्ना मास्टर का असली नाम रमजान खान है. ये वही रमजान हैं जिनके बेटे फिरोज को पिछले दिनों बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में संस्कृत का असिस्टेंट प्रोफेसर नियुक्त किए जाने के बाद खूब बवाल हुआ था. मुन्ना मास्टर को कला वर्ग में पद्मश्री अवॉर्ड के लिए चुना गया है.

Advertisement
aajtak.in
शरत कुमार नई दिल्ली, 26 January 2020
जानें- कौन हैं गोसेवा करने वाले मुन्ना मास्टर जिन्हें मिलेगा पद्मश्री मुन्ना मास्टर को मिलेगा पद्मश्री

  • मुन्ना मास्टर को कला वर्ग में पद्मश्री के लिए चुना गया
  • मंदिरों में करते हैं भजन गायिकी, गोसेवा का भी शौक

जयपुर के मुन्ना मास्टर को जैसे ही पद्मश्री अवार्ड देने की घोषणा हुई, बगरू कस्बे में खुशी की लहर दौड़ गई. वहीं मुन्ना मास्टर इस घोषणा को अकल्पनीय बता रहे हैं. वो कहते हैं कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि यह सम्मान मिलेगा. उन्होंने इस सम्मान का श्रेय गोसेवा को दिया है. जब उन्हें इस सम्मान के बारे में जानकारी मिली तब भी वो गोसेवा ही कर रहे थे. 

मुन्ना मास्टर का असली नाम रमजान खान

मुन्ना मास्टर का असली नाम रमजान खान है. ये वही रमजान हैं जिनके बेटे फिरोज को पिछले दिनों बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में संस्कृत का असिस्टेंट प्रोफेसर नियुक्त किए जाने के बाद खूब बवाल हुआ था. मुन्ना मास्टर को कला वर्ग में पद्मश्री अवार्ड के लिए चुना गया है.

मुन्ना मास्टर, भक्ति गीत और भजन गाने के लिए मशहूर हैं. वे राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ, विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कई कार्यक्रमों में भजन गायन का काम करते रहे हैं. इनके पिता गफूर खान भजन गायक थे. यानी भजन गायकी इन्हें विरासत में मिली है.

विरासत में मिली भजन गायिकी

रमजान खान बताते हैं कि जब वो महज सात साल के थे, तभी पिता गफूर खान का निधन हो गया. तब ये सिद्धू बुआ के साथ रहने लगे, जिन्होंने इन्हें भजन गाना सिखाया. बाद में मुन्ना मास्टर, अपनी जीविका चलाने के लिए मंदिरों में भजन गाने लगे. नतीजा यह हुआ कि वो मुसलमान समुदाय से दूर होने लगे.

मुस्लिमों ने कर दी थी पिटाई

एक बार जब रमजान खान उर्फ मुन्ना मास्टर ने लाके के साधु-संतों के संपर्क में आकर अपना यज्ञोपवीत संस्कार करा लिया तो उसके बाद इलाके के मुस्लिमों ने इनकी पिटाई कर दी. हालांकि इस घटना के बाद भी मुन्ना मास्टर ने मंदिरों में गायन नहीं छोड़ा. आगे चलकर उन्होंने संस्कृत की पढ़ाई भी की. इतना ही नहीं अपने बच्चों को भी संस्कृत की शिक्षा दी.

छोटे बेटे फिरोज की BHU में नियुक्ति पर हुआ था बवाल

रमजान खान के छोटे बेटे फिरोज ने संस्कृत में पीएचडी कर जयपुर के संस्कृत कॉलेज में बतौर प्रोफेसर पढ़ाने लगे. बाद में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में उनकी नियुक्ति हुई जिसको लेकर काफी विवाद हुआ. विवाद के बाद फिरोज निराश होकर वापस जयपुर लौट गए. लेकिन बाद में उनका डिपार्टमेंट बदल कर फिर से नियुक्ति दी गई. उसी दौरान लोगों को रमजान खान उर्फ मुन्ना मास्टर के बारे में पता चला.

इस घटना को याद करते हुए मुन्ना मास्टर कहते हैं कि जो हुआ अच्छा हुआ और बाद में अच्छी जगह नौकरी मिल गई.

और पढ़ें- कौन हैं सिर पर मैला ढोने वाली ऊषा चोमर? जिन्हें मिलेगा पद्मश्री सम्मान

गुरू चंपालाल चौधरी ने गोसेवा का दिया था ज्ञान

मुन्ना मास्टर ने अपने गुरू चंपालाल चौधरी को याद करते हुए कहा, 'उन्होंने कहा था कि तुम अपनी जिंदगी गोसेवा में लगा दो. गाय माता तुम्हें सब कुछ देंगी. इसी वजह से मैंने अपने दोस्त भंवर बलाई के साथ मिलकर गोशाला शुरू की. यहीं पर हमने एक एक छोटा सा मंदिर भी बनाया है, जहां सुबह-शाम मैं भजन गाता हूं.'

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें. डाउनलोड करें
Advertisement
Advertisement

संबंधित खबरें

Advertisement

रिलेटेड स्टोरी

No internet connection

Okay