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योगी सरकार का वादा फेल, 1.5 करोड़ बच्चों को नहीं मिले किताब और जूते-मोजे

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार एक बार फिर प्रदेश के बच्चों से किए वादे को पूरा करने में विफल रही है. उन्हें 31 जुलाई तक प्रदेश के बच्चों को किताबें, जूते और मोजे नहीं मिल पाए हैं. सरकार ने इसके लिए एक महीने का समय मांगा है.

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aajtak.in [Edited by: अजीत तिवारी]लखनऊ, 02 August 2018
योगी सरकार का वादा फेल, 1.5 करोड़ बच्चों को नहीं मिले किताब और जूते-मोजे योगी आदित्यनाथ (फाइल फोटो)

पिछले साल प्रदेश के बच्चों को स्वेटर बांटने में विफल रही उत्तर प्रदेश की योगी सरकार की बेपरवाही एक फिर उजागर हुई है. योगी सरकार स्कूली बच्चों से किया हुआ वादा पूरा करने में नाकाम रही है. 31 जुलाई की मियाद गुजर चुकी है लेकिन अभी तक सभी बच्चों को किताबें, जूते और मोजे नहीं मिले हैं. हालत ऐसी है कि बच्चे स्कूल में फटे हुए जूते, फटा हुआ बस्ता और फटे हुए कपड़े पहनकर आने को मजबूर हैं.

सरकार ने ही तय किया था कि 31 जुलाई तक सबको किताबें दे देंगे. साथ ही सरकार ने सभी बच्चों को जूते-मोजे देने की बात भी कही थी. लेकिन योगी सरकार के शिक्षा विभाग इन सब बातों से अनभिज्ञ है. न टेंडर का पता है, न खरीद का, न भुगतान का और न बंटवारे का.

गौर हो कि राज्य में पहली से आठवीं तक 1 करोड़ 54 लाख बच्चे हैं. सभी बच्चों को किताबें, जूते और बस्ते सरकार द्वारा दिया जाना है. लेकिन सरकार की अनदेखी और बेपरवाही के कारण 1.5 करोड़ बच्चे किताब और जूतों के इंतजार में हैं.

बच्चे बोले- नहीं मिला किताब और जूता-मोजा

लखनऊ के जियामऊ स्कूल के सैकड़ों बच्चे बिना किताबों, बिना जूते और बिना बस्ते के हैं. इस स्कूल के पांचवी क्लास के छात्र सोनू कुमार का कहना है कि उन्हें अभी तक सरकार से जूते और मोजे नहीं मिले, इसलिए वो चप्पल पहनकर स्कूल आने पर मजबूर हैं. वहीं, इसी स्कूल क छठी क्लास की छात्रा का कहना है कि उसे स्कूल से किताबें नहीं मिली हैं. इस बाबत जब स्कूल की प्रिंसिपल ज्योति तिवारी से बात की तो उन्होंने कहा कि सरकार का सारा इंतजाम हवा हवाई है. बच्चों के पास न किताबें हैं, न जूते हैं न बस्ते हैं.

गौर हो कि सर्दियों में सरकार ने स्कूली बच्चों को स्वेटर देने का वादा पूरा नहीं किया था, परिणाम स्वरूप बच्चों ने बिना स्वेटर के ही पूरी सर्दी निकाल दी थी. अब सवाल ये है कि बिना किताबों के बच्चे कैसे पढ़ेंगे. उत्तर प्रदेश की प्राथमिक शिक्षा मंत्री अनुपमा जायसवाल ने कहा कि बच्चों को 31 जुलाई तक किताबें और जूते वितरित किए जाने थे लेकिन प्रक्रियात्मक कारणों से इसमें देरी हो रही है. सरकार जल्द ही बच्चों को सभी चीजें उपलब्ध करवाएगी.

5 महीने बिना किताब के बच्चे

योगी सरकार ने नाक बचाने के लिए 31 अगस्त की तारीख तय की है. मतलब एक अप्रैल से बच्चों की पढ़ाई शुरू हुई और 31 अगस्त तक उन्हें किताब नहीं मिलेगा. 5 महीने बिना किताब के बच्चे कैसे पढ़ेंगे. साल में केवल 9 महीने ही पढ़ाई होती है और तीन महीने छुट्टी होती है. ऐसे में 5 महीने बच्चों को बिना किताब के ही पढ़ना होगा और किताब से पढ़ने के लिए केवल 4 महीने का समय मिलेगा.

ये उस उत्तर प्रदेश की कहानी है जहां पहली से आठवीं तक के स्कूलों में 1,53,307 शिक्षकों के पद खाली हैं. 5390 सहायक शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं. 15013 स्कूलों में हेडमास्टर तक नहीं हैं. बच्चों के पास किताबें नहीं हैं, ड्रेस और बस्ता भी नहीं है.

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