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अयोध्या केसः CJI का इशारा- 16 अक्टूबर तक खत्म हो जाए सुनवाई

रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सुन्नी वक्फ बोर्ड के चेयरमैन जफर फारूकी को पुलिस सुरक्षा मुहैया कराने का आदेश दिया है.

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aajtak.in
संजय शर्मा / अनीषा माथुर नई दिल्ली, 14 October 2019
अयोध्या केसः CJI का इशारा- 16 अक्टूबर तक खत्म हो जाए सुनवाई अयोध्या केस पर फाइनल सुनवाई... (फोटो: India Today)

  • सुप्रीम कोर्ट में 38वें दिन की सुनवाई पूरी
  • मुस्लिम पक्ष की जिरह खत्म, कल हिंदू पक्ष देगा जवाब

रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में 38वें दिन की सुनवाई पूरी हुई. 38वें दिन मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने अपनी जिरह खत्म की. वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने सुन्नी वक्फ बोर्ड के चेयरमैन जफर फारूकी को पुलिस सुरक्षा मुहैया कराने का आदेश दिया है.  मंगलवार को हिंदू पक्ष की ओर से दलीलें पेश की जाएंगी. 

आज हो रही सुनवाई के अपडेट:

05.14 PM: मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने जिरह खत्म की. वहीं. सुप्रीम कोर्ट ने सुन्नी वक्फ बोर्ड के चेयरमैन जफर फारूकी को पुलिस सुरक्षा देने को कहा है. सीजेआई चाहते हैं कि सुनवाई 16 अक्टूबर तक समाप्त हो जाए. आज की सुनवाई खत्म हो चुकी है.

4.15 PM: राजीव धवन ने कहा कि उनका सूट लिमीटेशन के दायरे में है. मुस्लिम पक्ष ने लिमिटेशन की अवधि खत्म होने से चार दिन पहले दाखिल किया था. जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा 23 दिसंबर 1949 में के बाद वहां नमाज नहीं हुई, लेकिन पूजा होती रही? इस पर धवन ने कहा मस्जिद में अगर किसी कारण से नमाज नहीं हो सकी तो इसका मतलब ये नहीं कि मस्जिद का अस्तित्व खत्म हो गया. राम जन्मभूमि न्यास का गठन इसलिए किया गया ताकि मस्जिद को गिराया जा सके. 

राजीव धवन ने कहा हिंदू पक्ष के पास इस बाबत कोई सबूत नहीं की भगवान राम का जन्म आंतरिक अहाते में हुआ था. इस बात के भी कोई सबूत नहीं की आंतरिक अहाते में पूजा होती थी. राजीव धवन ने कहा कि इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले में जस्टिस खान और जस्टिस शर्मा की राय एक दूसरे अलग थी.

जस्टिस खान ने कहा था कि मस्जिद बनाने के लिए किसी स्ट्रक्चर को ध्वस्त नहीं किया गया था, जबकि जस्टिस शर्मा की राय इससे अलग थी. धवन ने कहा जिलानी ने सही कहा था कि 1885 से पहले के किसी भी दस्तावेज को नहीं स्वीकार किया जाना चाहिए. 

1885 से पहले के जो दस्तावेज हिंदू पक्ष के पास है वो सिर्फ विदेशी यात्रियों की किताब और स्कंद पुराण और दूसरी किताबे हैं. राजीव धवन ने कहा कि मस्जिद को भले ही ध्वस्त कर दिया गया हो, लेकिन मस्जिद हमेशा मस्जिद ही रहती है.  अयोध्या में ध्वस्त या गिराई गई इमारत आज भी मस्जिद है.

राजीव धवन ने कहा कि औरंगजेब बेहद लिबरल राजा था. मुहम्मद गोरी सहित दूसरे लोग जिन्होंने भारत में युद्ध किया, क्या उन्होंने मस्जिदों का निर्माण किया? - एक नई तरह का इतिहास लिखने की कोशिश न कि जाए. अगर बाबर के काम की समीक्षा होगी तो अशोक की भी करनी होगी.

03.30 PM: सुप्रीम कोर्ट में राजीव धवन ने कहा कि हम यहां पर हेडलाइन बनाने नहीं बैठे हैं, हम चाहते हैं कि कोर्ट वक्फ बोर्ड के हिसाब से फैसला ले. मुस्लिम पक्ष की ओर से कहा गया कि मुस्लिम पक्ष के पास यहां का कब्जा था और लगातार नमाज़ पढ़ रहे थे. राजीव धवन ने कहा कि अमर्त्य सेन ने कहा था कि बंगाल में राम नहीं, दुर्गा की पूजा होती है. जस्टिस बोबड़े ने कहा कि इस मामले को यहां नहीं लाएं.

राजीव धवन ने कहा कि हम यहां पर उत्तर प्रदेश राज्य की बात कर रहे हैं, जहां यूपी सरकार के राज में विध्वंस किया गया.

02.55 PM: सुनवाई के दौरान जस्टिस चंद्रचूड़ ने मुस्लिम पक्ष से पूछा कि आप मान रहे हैं कि वहां पर जुम्मा की नमाज़ होती थी. और आखिरी बार 16 दिसंबर, 1949 को नमाज़ हुई. इसपर राजीव धवन ने कहा कि पूजा करना या न करना जमीन पर हक को स्थापित नहीं करता. मस्जिद तो मस्जिद ही रहेगी, हमने मुस्लिम स्कॉलर्स से भी बात की है.

इसपर जस्टिस बोबड़े ने कहा कि कल जफरयाब जिलानी इंटरव्यू दे रहे थे. राजीव धवन ने जवाब दिया कि हमने किसी भी इंटरव्यू देने से मना किया है, लेकिन वह नेता हैं इसलिए हम कैसे उन्हें रोक सकते हैं.

02.20 PM: मुस्लिम पक्ष की ओर से राजीव धवन ने अदालत में कहा कि गवाहों की बातों पर ध्यान ना देकर जो आसान तर्क हैं उनपर ध्यान दिया जाए, क्योंकि ऐसे कई सबूत हैं जिनमें गवाहों को सैलरी देने की बात सामने आई है. राजीव धवन की ओर से अब लिमिटेशन एक्ट पर बहस की जा रही है. उन्होंने कहा कि कई बार कब्जे की बात होती है, लेकिन आखिरी फैसला क्या होगा. अंतत: सुप्रीम कोर्ट को ही कानून के हिसाब से कुछ करना होगा. राजीव धवन बोले कि हम यहां क्रिमिनल लॉ से सिविल लॉ में जा रहे हैं.

01.50 PM: सुप्रीम कोर्ट में मुस्लिम पक्ष की ओर से राजीव धवन ने कहा कि हम हमेशा ये नहीं सोच सकते हैं कि 1992 नहीं हुआ. 1950 में हिंदुओं ने पूजा की मांग की. मुस्लिम पक्ष की मांग है कि अयोध्या को फिर 5 दिसंबर 1992 जैसा बसाया जाए, जैसा कि बाबरी मस्जिद विध्वंस से पहले था.

पूरी खबर पढ़ें: सुप्रीम कोर्ट से मुस्लिम पक्ष की मांग- हमें 6 दिसंबर 1992 के पहले जैसा अयोध्या चाहिए

12.35 PM: मुस्लिम पक्ष की ओर से राजीव धवन ने अदालत में कहा कि श्रद्धा से जमीन नहीं मिलती है, स्कन्द पुराण से अयोध्या की जमीन का हक नहीं मिलता है. उन्होंने कहा कि अगर बेंच मोल्डिंग ऑफ रिलीफ के तहत किसी एक पक्ष को मालिकाना हक देकर दूसरे को विकल्प देती है तो मुस्लिम पक्षकारों का ही दावा बनता है.

उन्होंने कहा कि तीन पहलू टाइटल के सवाल पर बंटवारा ही गलत था, इस्लामिक कानून और कुरान बहुत पेचीदा है. हिन्दू पक्षकार इसके एक पक्ष के आधार पर हमारी वक़्फ़ की गई मस्जिद को खारिज नहीं कर सकते हैं, दूसरा लिमिटेशन और तीसरा एडवर्स पजेशन को लेकर है.

इसे पढ़ें: अयोध्या: SC से बोले मुस्लिम पक्ष के वकील- आप मुझसे सवाल करते हैं, हिंदू पक्ष से नहीं!

12.14 PM: मुस्लिम पक्ष की ओर से राजीव धवन ने कहा कि मैं किसी डायरी, श्रद्धा या विश्वास की बात नहीं करूंगा. हिंदू पक्ष का विवादित स्थल पर कभी कब्जा नहीं रहा था, उन्हें सिर्फ पूजा का अधिकार मिला था. किसी ने आजतक नहीं माना है कि हिंदू पक्ष का आंतरिक अहाते पर कब्जा था.

11.55 PM: मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने अदालत में कहा कि ब्रिटिश सरकार ने 1854 में बाबरी मस्जिद के लिए ग्रांट दिया था. 1885 से 1989 तक हिंदू पक्ष की ओर से जमीन पर कोई दावा नहीं किया गया.

11.30 AM: सुप्रीम कोर्ट में मुस्लिम पक्ष के राजीव धवन और हिंदू पक्ष के वकील वैद्यनाथन की ओर से लिखित दलीलें पेश की घई. राजीव धवन ने कहा कि गुम्बद के नीचे रामजन्म होने के श्रद्धालुओं के फूल चढ़ाने का दावा सिद्ध नहीं हुआ है, वहां तो ट्रेसपासिंग कर लोग घुस आए थे.

राजीव धवन ने कहा कि जब वहां पर पूजा चल रही थी, तो घुसने का क्या था. उन्होंने कहा कि कभी भी मंदिर तोड़कर मस्जिद नहीं बनाई, वहां लगातार नमाज़ होती रही है.

11.15 AM: सोमवार को अयोध्या केस की सुनवाई शुरू हो गई है. मुस्लिम पक्ष की ओर से राजीव धवन अपनी दलीलें रख रहे हैं. राजीव धवन ने कहा कि जब शुक्रवार को चार दिन की बात तय हुई तो मैं हिंदू पक्ष की दलील का जवाब नहीं दे सका था. अब मैं पूरी रफ्तार से अपनी दलीलें रखूंगा, फैक्ट्स बता दिए गए हैं और अब सिर्फ कानून की बात रखूंगा.

अयोध्या में लागू है धारा 144

सोमवार को शुरू हो रही अंतिम सुनवाई से पहले प्रशासन भी पूरी तरह मुस्तैद है. अयोध्या जिले में 10 दिसंबर तक के लिए धारा 144 लगा दी गई है, चप्पे-चप्पे पर सुरक्षाबल मुस्तैद हैं. ताकि अगर फैसले से कुछ असर होता है तो उसे संभाला जा सके. हालांकि, धारा 144 के इस फैसले से अयोध्या में दिवाली के मौके पर होने वाले दीपोत्सव पर कोई असर नहीं होगा.

चार दिन में पूरी होगी सुनवाई?

सुप्रीम कोर्ट की ओर से जो समयसीमा तय की गई है, उसके हिसाब से अब सुनवाई के लिए कुल चार दिन का समय है. सोमवार को मुस्लिम पक्ष की ओर से दलील रखी जाएगी, फिर 16 अक्टूबर तक का समय हिंदू पक्ष के जवाब के लिए रखा गया है. 17 अक्टूबर को इस मामले में दलीलों का आखिरी दिन हो सकता है.

चीफ जस्टिस के रिटायर होने तक आएगा फैसला?

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई 17 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं, ऐसे में उम्मीद लगाई जा रही है कि इस मामले का फैसला जल्द ही आ सकता है. बीते दिनों टिप्पणी करते हुए चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा था कि इस मामले की सुनवाई 17 अक्टूबर तक खत्म नहीं होती है तो जल्द फैसला आने में दिक्कत हो सकती है.

कौन कर रहा है इस मसले की सुनवाई?

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के अलावा इस मामले की सुनवाई कर रही संविधान पीठ में जस्टिस एस.ए. बोबड़े, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस एसए नज़ीर भी शामिल हैं. मध्यस्थता की कोशिशें असफल होने के बाद से 6 अगस्त को इस मामले की रोजाना सुनवाई शुरू हुई थी, तब से लेकर अबतक हफ्ते में पांच दिन इस मसले की सुनवाई हो रही है.

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