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ये है मुलायम सिंह यादव का सियासी कुनबा

उत्तर प्रदेश में सबसे ताकतवर राजनीतिक परिवार माना जाने वाला सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव का सियासी कुनबा हाल में सम्पन्न पंचायत चुनावों में तीन और सदस्यों के निर्वाचन के साथ और मजबूत हो गया है.

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aajtak.in
लव रघुवंशी लखनऊ, 30 December 2016
ये है मुलायम सिंह यादव का सियासी कुनबा अपने परिवार के साथ मुलायम सिंह यादव. साथ में लालू यादव

यूपी चुनावों से पहले सपा चीफ मुलायम सिंह यादव के परिवार में फिर घमासान जारी है. उत्तर प्रदेश में सबसे ताकतवर राजनीतिक परिवार माना जाने वाला सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव का सियासी कुनबा इसी साल सम्पन्न पंचायत चुनावों में तीन और सदस्यों के निर्वाचन के साथ और मजबूत हो गया था. मुलायम सिंह के बेटे अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश से सीएम हैं तो भाई शिवपाल यादव सपा के प्रदेश अध्यक्ष और खुद मुलायम सिंह पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं.

इसी साल सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव के परिवार के और तीन सदस्यों ने राजनीति में कदम रखा है. 20 सदस्यों के साथ मुलायम का कुटुंब अब किसी भी पार्टी में सबसे बड़े राजनीतिक परिवार के होने का दावा कर सकता है. जिला पंचायत चुनाव में सपा सुप्रीमो परिवार के दो सदस्यों ने राजनीतिक एंट्री करने से सबसे बड़ा सियासी कुनबा बन गया. संध्या यादव को मैनपुरी से जबकि अंशुल यादव को इटावा से निर्विरोध जिला पंचायत अध्यक्ष चुना गया है. बता दें कि संध्या यादव सांसद धर्मेंद्र यादव की बहन हैं, जबकि अंशुल यादव, राजपाल और प्रेमलता यादव के बेटे हैं.

मुलायम सिंह यादव
मुलायम सिंह यादव समाजवादी पार्टी के अगुआ और पार्टी संस्थापक हैं. उन्होंने 4 अक्टूबर 1992 को समाजवादी पार्टी का गठन किया था. अपने राजनीतिक करियर में वह तीन बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री भी रहे.

राजनीति में परिवारवाद को बढ़ावा देने की शुरुआत वैसे तो पं. जवाहरलाल नेहरू ने ही कर दी थी पर लोहिया के चेले कहे जाने वाले मुलायम सिंह ने इसे खूब आगे बढ़ाया. पिछले कुछ वर्षों में जब भी देश में तीसरे मोर्चे की चर्चा होती है, मुलायम सिंह यादव का नाम सबसे पहले लिया जाता है. पेशे से शिक्षक रहे मुलायम सिंह यादव के लिए शिक्षा के क्षेत्र ने राजनीतिक द्वार भी खोले.

शिवपाल सिंह यादव
शिवपाल यादव मुलायम सिंह यादव के अनुज 1988 में पहली बार इटावा के जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष चुने गए. 1996 में सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने अपनी जसवंतनगर की सीट छोटे भाई शिवपाल के लिए खाली कर दी थी. इसके बाद से ही शिवपाल का जसवंतनगर की विधानसभा सीट पर कब्जा बरकरार है.

रामगोपाल सिंह यादव
मुलायम सिंह ने 2004 में संभल सीट रामगोपाल के लिए छोड़ दी थी और खुद मैनपुरी से सांसद का चुनाव लड़ा था. रामगोपाल इस सीट से जीत हासिल करके संसद पहुंचे थे. अभी वह राज्यसभा सांसद हैं.

अखिलेश यादव
मुलायम ने 1999 की लोकसभा चुनाव संभल और कन्नौज दोनों सीटों से लड़ा और जीता. इसके बाद सीएम अखिलेश के लिए कन्नौज की सीट खाली कर दी. हम आपको बता दे कि अखिलेश ने इसके पहले फिरोजाबाद से भी चुनाव लड़ा था और वहां से जीत हासिल की थी लेकिन बाद में उन्होने अपनी पत्नी डिंपल यादव के लिये सीट छोड़ दी थी. लेकिन में डिंपल यादव को वहां से करारी शिकस्त मिली. डिंपल ने कन्नौज की सीट से चुनाव लड़ा और बाद में निर्विरोध चुनी गई. इसी के साथ उनकी भी राजनीति में एंट्री हो चुकी थी. अखिलेश यादव 2012 में उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री बने. खास बात यह कि अखिलेश यादव ने सबसे कम उम्र में मुख्यमंत्री बनने का रिकॉर्ड अपने नाम दर्ज किया.

धर्मेंद्र यादव
2004 में सीएम रहते हुए मुलायम सिंह यादव के समय धर्मेन्द्र ने मैनपुरी से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की. उस वक्त उन्होंने 14वीं लोकसभा में सबसे कम उम्र के सांसद बनने का रिकॉर्ड बनाया.

डिंपल यादव
अखिलेश यादव ने 2009 के लोकसभा चुनाव में कन्नौज और फिरोजाबाद से जीतकर फिरोजाबाद की सीट की अपनी पत्नी डिंपल यादव के लिए छोड़ दी, लेकिन इस बार पासा उलट पड़ गया और डिंपल को कांग्रेस उम्मीदवार राजबब्बर ने हरा दिया. पहली बार में इस खेल में मात खाने के बावजूद अखिलेश का भरोसा इस फार्मूले से नहीं टूटा. 2012 में मुख्यमंत्री बनने के बाद अखिलेश ने अपनी कन्नौज लोकसभा सीट एक बार फिर डिंपल के लिए खाली की. इस बार सूबे में सपा की लहर का आलम ये था कि किसी भी पार्टी की डिंपल के खिलाफ प्रत्याशी उतारने की हिम्मत नहीं हुई और वो निर्विरोध जीतीं.

तेज प्रताप यादव
तेजप्रताप यादव सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव के पोते हैं. वे मैनपुरी से सांसद हैं. 2014 के लोकसभा चुनाव में मुलायम सिंह यादव ने मैनपुरी और आजमगढ़ दोनों सीटों से चुनाव लड़ा था और दोनों जगहों से जीते. इसके बाद उन्होंने अपनी पारंपरिक सीट मैनपुरी खाली कर दी थी. इस सीट पर उन्होंने अपने पोते तेज प्रताप यादव को चुनाव लड़ाया. तेजप्रताप ने भी अपने दादा को निराश नहीं किया और बंपर वोटों से चुनाव में जीत हासिल की. साथ ही राजनीति में धमाकेदार एंट्री की.

इंग्लैंड की लीड्स यूनिवर्सिटी से मैनेजमेंट साइंस में एमएससी करके लौटे तेजप्रताप सिंह सक्रिय राजनीति में उतरने वाले मुलायम सिंह के परिवार की तीसरी पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करते हैं. मुलायम के बड़े भाई रतन सिंह के बेटे रणवीर सिंह के बेटे तेजप्रताप सिंह यादव उर्फ तेजू इस समय सैफई ब्लॉक प्रमुख निर्वाचित हुए हैं. क्षेत्र में समाजवादी पार्टी को मजबूत करने की पूरी जिम्‍मेदारी तेज प्रताप सिंह ने अपने कंधों पर उठा रखी है. परिवार के सदस्‍य इन्‍हें तेजू के नाम से भी पुकारते हैं.

अक्षय यादव
अक्षय यादव मौजूदा समय में फिरोजाबाद से सपा सांसद हैं. अक्षय यादव भी पहली बार चुनाव जीतकर सक्रिय राजनीति में उतरे हैं. यह सीट यादव परिवार की पारंपरिक संसदीय सीट रही है. जब अखिलेश यादव ने वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में फिरोजाबाद और कन्नौज से चुनाव लड़ा था, उस समय फिरोजाबाद के चुनाव प्रबंधन की कमान अक्षय यादव ने संभाली थी. इसके बाद अखिलेश ने फिरोजाबाद सीट छोड़ दी और उपचुनाव में पत्नी डिंपल यादव को चुनाव लड़ाया. भाभी डिंपल का चुनाव प्रबंधन भी अक्षय ने संभाला था, लेकिन कांग्रेस नेता राज बब्बर ने डिंपल को हरा दिया था.

प्रेमलता यादव
मुलायम सिंह के छोटे भाई राजपाल यादव की पत्‍नी प्रेमलता यादव इस समय इटावा में जिला पंचायत अध्‍यक्ष हैं. आमतौर पर गृहिणी के तौर पर जीवन के अधिकतर वर्ष गुजारने के बाद 2005 में प्रेमलता यादव ने राजनीति में कदम रखा. यहां उन्‍होंने पहली बार इटावा की जिला पंचायत अध्‍यक्ष का चुनाव लड़ा और जीत गईं. 2005 में राजनीति में आने के बाद ही प्रेमलता मुलायम परिवार की पहली महिला बन गईं, जिन्‍होंने राजनीति में कदम रखा. उनके बाद शिवपाल यादव की पत्‍नी और मुलायम की बहू डिंपल यादव का नाम आता है.

प्रेमलता के पति राजपाल यादव इटावा वेयर हाउस में नौकरी करते थे और अब रिटायर हो चुके हैं. रिटायरमेंट के बाद से ही वह समाजवादी पार्टी में अहम भूमिका अदा कर रहे हैं. 2005 में चुनाव जीतने के बाद प्रेमलता ने अपना कार्यकाल बखूबी पूरा किया. इसके बाद 2010 में भी वह दोबारा इसी पद पर निर्विरोध चुनी गई हैं.

सरला यादव
यूपी के कैबिनेट मिनिस्टर शिवपाल यादव की पत्नी हैं सरला यादव. 2007 में जिला सहकारी बैंक इटावा की राज्य प्रतिनिधि बनाया गया था. सरला को दो बार जिला सहकारी बैंक का राज्य प्रतिनिधि बनाया गया. 2007 के बाद लगातार दूसरी बार चुनी गई थी और अब कमान बेटे के हाथ में है.

आदित्य यादव
शिवपाल यादव के बेटे आदित्य यादव जसवंत नगर लोकसभा सीट से एरिया इंचार्ज थे. मौजूदा समय में वह यूपीपीसीएफ के चेयरमैन हैं.

अंशुल यादव
राजपाल और प्रेमलता यादव के बेटे हैं अंशुल यादव. 2016 में इटावा से निर्विरोध जिला पंचायत अध्यक्ष चुने गए हैं अंशुल यादव.

संध्या यादव
सपा सुप्रीमो की भतीजी और सांसद धर्मेंद्र यादव की बहन संध्या यादव ने जिला पंचायत अध्यक्ष के जरिए राजनीतिक एंट्री की है. उन्हें मैनपुरी से जिला पंचायत अध्यक्ष के लिए निर्विरोध चुना गया है.

अरविंद यादव
वैसे परिवार की बात करें तो मुलायम सिर्फ अपने ही परिवार नहीं, चचेरे भाई प्रोफेसर रामगोपाल यादव के परिवार को भी पूरा संरक्षण देते रहते हैं. इसी क्रम में मुलायम की चचेरी बहन और रामगोपाल यादव की सगी बहन 72 वर्षीया गीता देवी के बेटे अरविंद यादव ने 2006 में सक्रिय राजनीति में कदम रखा और मैनपुरी के करहल ब्लॉक में ब्लॉक प्रमुख के पद पर निर्वाचित हुए. अरविंद क्षेत्र की जनता में काफी पहचान रखते हैं. करहल में अरविंद ने समाजवादी पार्टी को काफी मजबूती दिलाई है. लेकिन 2011 के चुनाव में वह आजमाइश के लिए मैदान में नहीं उतर सके. कारण था कि इस चुनाव में करहल ब्लॉक प्रमुख की सीट सुरक्षित हो चुकी थी. लेकिन अरविंद ने हार नहीं मानी है और इस समय वे मैनपुरी लोकसभा सीट के तहत आने वाले करहल ब्लॉक में सपा की मजबूती के लिए काम कर रहे हैं.

शीला यादव
शीला यादव मुलायम के कुनबे की पहली बेटी है जिन्होंने राजनीति में प्रवेश किया. शीला यादव जिला विकास परिषद की सदस्य निर्वाचित हुई हैं, साथ ही बहनोई अजंत सिंह यादव बीडीसी सदस्य चुन गए हैं.

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