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उत्तराखंड में विद्रोह के स्‍वर, रावत का इस्‍तीफा

कांग्रेस को आज उत्तराखंड में विद्रोह का सामना करना पड़ा. पार्टी के वरिष्ठ नेता हरीश रावत के खेमे ने साफ कर दिया कि वह मुख्यमंत्री पद के लिए अपनी दावेदारी नहीं छोड़ेंगे लेकिन इस बात का संकल्प जताया कि वह यह लड़ाई पार्टी के भीतर ही लड़ेंगे.
उत्तराखंड में विद्रोह के स्‍वर, रावत का इस्‍तीफा हरीश रावत
भाषादेहरादून, 13 March 2012

कांग्रेस को आज उत्तराखंड में विद्रोह का सामना करना पड़ा. पार्टी के वरिष्ठ नेता हरीश रावत के खेमे ने साफ कर दिया कि वह मुख्यमंत्री पद के लिए अपनी दावेदारी नहीं छोड़ेंगे लेकिन इस बात का संकल्प जताया कि वह यह लड़ाई पार्टी के भीतर ही लड़ेंगे.

ऐसा समझा जाता है कि मुख्यमंत्री पद के लिए दावेदारी को खारिज किए जाने के बाद रावत ने अपने समर्थक विधायकों के साथ बैठक की जिसमें भावी कार्रवाई की रणनीति तैयार की गई. उस बैठक में उत्तराखंड में पार्टी के 32 विधायकों में से अच्छी खासी संख्या में विधायक मौजूद थे.

विजय बहुगुणा के शपथ ग्रहण समारोह से रावत समर्थकों की गैर मौजूदगी से ऐसा समझा जाता है कि कांग्रेस चिंतित है. नवनिर्वाचित विधायकों में से एक ने कहा कि नयी सरकार 10-15 दिन भी नहीं चलेगी.

हरीश रावत ने आज रात संवाददाताओं से कहा कि उनकी कांग्रेस छोड़ने की कोई योजना नहीं है लेकिन मुख्यमंत्री पद पर अपने दावे के लिए लड़ाई जारी रखेंगे.

उन्होंने कई सवालों के जवाब में कहा, ‘मैं कांग्रेस कार्यकर्ता हूं और कांग्रेस के मंच के भीतर अपनी शिकायतों के निवारण की मांग करूंगा.’ हालांकि, उन्होंने अपनी भावी कार्रवाई के बारे में बताने से इंकार कर दिया.

हालांकि, रावत का समर्थन कर रहे पार्टी के वरिष्ठ नेता और विधायक हरक सिंह रावत ने साफ-साफ कहा, ‘उत्तराखंड में नयी सरकार का भविष्य बहुत अंधकारमय है. यह सिर्फ 10-15 दिन चल सकती है.’
बहुगुणा का विरोध करते हुए हरक सिंह रावत ने कहा, ‘उनका राज्य में कोई योगदान नहीं है और उन्हें हमपर थोप दिया गया है.’ गौरतलब है कि बहुगुणा को आज शाम उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ दिलाई गई.

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को मिली जीत में हरीश रावत ने बड़ी भूमिका निभाई.

हरीश रावत के करीबी सूत्रों ने बताया बहुगुणा के शपथग्रहण समारोह में महज 10 के करीब कांग्रेस विधायकों की मौजूदगी ने इस बात की पुष्टि कर दी कि वह वहां पर पार्टी के ‘असली नेता’ हैं.

ऐसी अटकलें थी कि हरीश रावत ने सोमवार रात भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी से मुलाकात की लेकिन इसका रावत के एक अन्य समर्थक सांसद प्रदीप टम्टा ने खंडन किया.

केंद्रीय मंत्री गुलाम नबी आजाद ने इन अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि वह कभी सोच नहीं सकते कि रावत गडकरी से मिलेंगे या किसी अन्य पार्टी में जाएंगे. पार्टी के राज्य मामलों के प्रभारी आजाद ने ही मुख्यमंत्री के तौर पर बहुगुणा के नाम की घोषणा की थी.

आजाद ने कहा, ‘वह (रावत) प्रतिबद्ध कांग्रेस कार्यकर्ता हैं और कांग्रेस में बने रहेंगे. वह केंद्रीय मंत्रिपरिषद के सदस्य हैं और उन्हें वहां योगदान देना है.’

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