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ढोल बजाकर खोली भ्रष्टाचार की पोल !

साल 2013 में लाखों रुपये के घोटाले के मामले में चर्चित रह चुका चूरू जिला परिवहन विभाग आज फिर सुर्खियों में है. एक ग्रामीण शख्स द्वारा चूरू जिला परिवहन विभाग में हो रही कारगुजारियों की ढोल बजाकर पोल खोली गई.

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शरत कुमार [Edited By:अमित दुबे]जयपुर, 26 July 2017
ढोल बजाकर खोली भ्रष्टाचार की पोल ! ढोल बजाते हुए शख्स

साल 2013 में लाखों रुपये के घोटाले के मामले में चर्चित रह चुका चूरू जिला परिवहन विभाग फिर सुर्खियों में है. एक ग्रामीण शख्स द्वारा  चूरू जिला परिवहन विभाग में हो रही कारगुजारियों की ढोल बजाकर पोल खोली गई.

विभाग के अधिकारियों पर रजिस्ट्रेशन और नम्बर प्लेट देने के नाम पर यहां जो भ्रष्टाचार का खेल खेला जा रहा था उससे परेशान इस शख्स ने ढोलक बजवाकर पोल खोल डाली. अचानक हुए इस तरह के प्रर्दशन के बाद एकबारगी तो परिवहन विभाग में हड़कम्प सा मच गया.

 दरअसल चूरू जिले की सादुलपुर तहसील के गांव राधा छोटी के रमेश कुमार ने चार महीने पहले दो ट्रक खरीदे थे जिनका रजिस्ट्रेशन करवाने और नम्बर प्लेट के लिए उसने जिला परिवहन विभाग में अप्लाई किया था, लेकिन यहां उससे 232 रुपये की नम्बर प्लेट की एवज में 2 हजार रुपये मांगे गये और रजिस्ट्रेशन के लिए भी मोटी रकम की मांग की गई.

मांग पूरी ना किये जाने पर रमेश को पिछले चार महीने से चक्कर कटवाये जा रहे हैं जिसके कारण उसके दोनों ट्रक घर पर ही खड़े हैं और उसे मजबूरी में खड़े ट्रकों के 1 लाख 40 हजार रुपये किश्तों के जमा कराने पड़ रहे हैं.

तकरीबन एक घंटे तक बजाए गए ढोल

इस दौरान रमेश ने आरटीआई के तहत रजिस्ट्रेशन और नम्बर प्लेट की फीस को लेकर आरटीआई भी लगायी, लेकिन तीन महीने बीत जाने के बाद भी इसका जवाब विभाग द्वारा नहीं दिया गया.

करीब 180 किलोमीटर का अप—डाउन करके चूरू जिला परिवहन विभाग के चक्कर लगाने वाले रमेश कुमार ने आखिर परेशान होकर मंगलवार को ढोल ​बजाकर विभाग के अधिकारियों को कुम्भकर्णी नींद से जगाने का फैसला किया और दो ढोलकियों के साथ जिला परिवहन विभाग पहुंच गया, जहां तकरीबन एक घंटे तक उसने ढोल बजवाए.

इसके बाद जिला परिवहन अधिकारी दयाशंकर गुप्ता ने दोषियों के खिलाफ कार्यवाही का आश्वासन देते हुए रजिस्ट्रेशन और नम्बर प्लेट निर्धारित शुल्क पर दिलवाने की बात कही. इस अनूठे प्रर्दशन को देखकर ऐसे कई लोग सामने आये जो डीटीओ ऑफिस में भ्रष्टाचार को लेकर परेशान थे.

 

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