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पद्मावत देखकर बोले जज, जनता को अच्छी फिल्म देखने से रोक रहे

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि हमने फिल्म देखी है और इसमें ऐतिहासिक पात्रों को बहुत सम्मानजनक तरीके से प्रस्तुत किया गया है, इसलिए राज्य सरकार यह सुनिश्चित करें कि पद्मावत राजस्थान में रिलीज हो ताकि आम जनता उसे देख सके. पद्मावत फिल्म के रिलीज होने से आम जनता को एक अच्छी फिल्म देखने को मिलेगी. कोर्ट ने कहा कि  इसके रिलीज नहीं होने से आम जनता को एक अच्छी फिल्म देखने से रोका जा रहा है.

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शरत कुमार [Edited By: राहुल विश्वकर्मा]जोधपुर, 07 February 2018
पद्मावत देखकर बोले जज, जनता को अच्छी फिल्म देखने से रोक रहे पद्मावत

राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर खंडपीठ ने पद्मावत फिल्म देखने के बाद अपने आदेश में कहा है कि फिल्म में किसी भी तरह से ऐतिहासिक पात्रों का चरित्र हनन नहीं किया गया है. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि हमने फिल्म देखी है और इसमें ऐतिहासिक पात्रों को बहुत सम्मानजनक तरीके से प्रस्तुत किया गया है, इसलिए राज्य सरकार यह सुनिश्चित करें कि पद्मावत राजस्थान में रिलीज हो ताकि आम जनता उसे देख सके. पद्मावत फिल्म के रिलीज होने से आम जनता को एक अच्छी फिल्म देखने को मिलेगी. कोर्ट ने कहा कि  इसके रिलीज नहीं होने से आम जनता को एक अच्छी फिल्म देखने से रोका जा रहा है.

संजय लीला भंसाली के खिलाफ फरवरी 2017 में नागौर के डीडवाना में लोगों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का मुकदमा दर्ज करवाया गया था. पद्मावत फिल्म के निर्माता संजय लीला भंसाली अभिनेता रणवीर सिंह और दीपिका पादुकोण पर एक मुकदमा दर्ज कराया गया था. इसमें कहा गया था कि इस फिल्म के जरिए धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाया जा रहा है. इसे खारिज कराने के लिए संजय लीला भंसाली के वकील ने जोधपुर हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी. इसी पर सुनवाई के दौरान जोधपुर में जज साहब ने कड़ी सुरक्षा के बीच जोधपुर के पिक्चर हाल में बैठकर फिल्म देखी थी.

कोर्ट ने कहा कि यह शिकायत प्रीमैच्योर थी क्योंकि तब फिल्म बनी नहीं थी और दूसरी बात है कि अगर फिल्म में कुछ आपत्तिजनक है तो यह सेंसर बोर्ड तय करेगा कि फिल्म रिलीज हो या नहीं हो. अगर फिर भी किसी को लगता है फिल्म में कुछ आपत्तिजनक है तो आप सेंसर बोर्ड के सर्टिफिकेट को चैलेंज कर सकते हैं, लेकिन इस तरह से रिपोर्ट नहीं दर्ज करवा सकते हैं.

हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि रानी पद्मिनी धार्मिक पात्र नहीं थीं, बल्कि ऐतिहासिक चरित्र थीं. इसलिए धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का मामला नहीं बनता है. सेंसर बोर्ड एक इंडिपेंडेंट संस्था है और सब कुछ देखने के बाद ही सर्टिफिकेट दिया है. अगर उसमें किसी को ऑब्जेक्शन है तो उसको चैलेंज कर सकता है. राजस्थान हाईकोर्ट के फैसले के बाद करणी सेना के संयोजक लोकेंद्र सिंह कालवी ने कहा किस तरह का फैसला सुप्रीम कोर्ट पहले ही दे चुका है, लेकिन हमने जनता कर्फ्यू के जरिए फिल्म को रिलीज नहीं होने दी है और आगे भी जनता कर्फ्यू जारी रहेगा.

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