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उपचुनावों में हार के बाद राजस्थान BJP में बवाल, MLA को निलंबित करने की सिफारिश

ज्ञानदेव आहूजा का एक ऑडियो सामने आया था. इसमें ज्ञानदेव आहूजा ने एक BJP कार्यकर्ता को यह कहा था कि राजस्थान के उपचुनाव में हार मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और राजस्थान बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष अशोक परनामी की वजह से हुई है. अगर राज्य में पार्टी के हालात मजबूत करने हैं तो इन दोनों को बदलना होगा.

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aajtak.in
अंकुर कुमार / शरत कुमार नई दिल्ली, 15 February 2018
उपचुनावों में हार के बाद राजस्थान BJP में बवाल, MLA को निलंबित करने की सिफारिश ज्ञानदेव आहूजा

राजस्थान में तीन उपचुनाव में हार का असर अब बीजेपी में दिखने लगा है. बीजेपी के रामगढ़ के विधायक ज्ञानदेव आहूजा ने कहा है कि बहुत जल्द ही बड़ा खुलासा करने वाला हूं. इससे पहले राजस्थान बीजेपी ने अनुशासनहीनता के आरोप में ज्ञानदेव आहूजा को पार्टी से निलंबित करने के लिए केंद्रीय नेतृत्व को सिफारिश कर दी है.

ज्ञानदेव आहूजा का एक ऑडियो सामने आया था. इसमें ज्ञानदेव आहूजा ने एक BJP कार्यकर्ता को यह कहा था कि राजस्थान के उपचुनाव में हार मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और राजस्थान बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष अशोक परनामी की वजह से हुई है. अगर राज्य में पार्टी के हालात मजबूत करने हैं तो इन दोनों को बदलना होगा.

इस ऑडियो के सामने आने के बाद जब ज्ञानदेव आहूजा से पूछा गया था कि क्या ऑडियो में उन्हीं की आवाज है तो उन्होंने कहा था कि हां, मेरी आवाज है और मैंने जो कुछ कहा है, उससे इनकार नहीं करता हूं. इसके बाद अलवर लोकसभा सीट से हारे हुए प्रत्याशी और राज्य के श्रम मंत्री जसवंत सिंह यादव पर भी ज्ञानदेव आहूजा ने गंभीर आरोप लगाए थे. इस सब से नाराज होकर राजस्थान में बीजेपी अनुशासन समिति के सदस्यों ने आहूजा के निलंबन की सिफारिश कर दी है. माना जा रहा है कि राजस्थान का बीजेपी नेतृत्व आहूजा को सबक सिखा कर पार्टी में यह संदेश देना चाहती है कि कोई भी विरोधी आवाज को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा .

हालांकि यह भी हैरत की बात है कि BJP के विधायक घनश्याम तिवारी खुलेआम वसुंधरा राजे के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं और रोज बयानबाजी कर रहे हैं, लेकिन उनका निलंबन आज तक नहीं किया गया. ऐसे में 5 दिनों के अंदर ही आहूजा के निलंबन पर सवाल उठ रहे हैं .कहा जा रहा है कि आहूजा मंत्री नहीं बनाए जाने से लंबे समय से वसुंधरा राजे से नाराज थे. आहूजा अलवर से लोकसभा चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन पार्टी ने प्रत्याशी नहीं बनाया था. इसके बाद वह नाराज चल रहे थे.

आपको बता दें कि ज्ञानदेव आहूजा ने विपक्ष में रहने के दौरान जब वसुंधरा राजे को बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाया जा रहा था तो वसुंधरा राजे के पक्ष में केंद्रीय नेतृत्व के खिलाफ बयानबाजी की थी. इसके बाद जेएनयू में लाखों की संख्या में कंडोम मिलने के अपने बयान को लेकर भी सुर्खियों में रहे थे. बाद में गौ तस्करी के आरोप में मारे गए गुलफाम के आरोपियों के पक्ष में भी आहूजा ने जमकर बयानबाजी की थी.

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