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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद बोले- बहुत महंगी हो गई है न्यायिक प्रक्रिया

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने शनिवार को कहा कि न्यायिक प्रक्रिया बहुत महंगी हो गई है. उन्होंने कहा, 'गरीब आदमी के लिए सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट तक पहुंचना बहुत मुश्किल हो गया है. ऐसी स्थिति में हमें देश के लोगों को सस्ता और त्वरित न्याय प्रदान करने के लिए सामूहिक प्रयास करने होंगे.'

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aajtak.in जोधपुर, 08 December 2019
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद बोले- बहुत महंगी हो गई है न्यायिक प्रक्रिया  राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद (फाइल फोटो-PTI)

  • गरीब आदमी के लिए कोर्ट पहुंचना बहुत मुश्किल
  • फैसलों की जानकारी हिंदी में उपलब्ध कराई जाए

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने शनिवार को कहा कि न्यायिक प्रक्रिया बहुत महंगी हो गई है. उन्होंने कहा, 'गरीब आदमी के लिए सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट तक पहुंचना बहुत मुश्किल हो गया है. ऐसी स्थिति में हमें देश के लोगों को सस्ता और त्वरित न्याय प्रदान करने के लिए सामूहिक प्रयास करने होंगे.'

कोविंद ने शनिवार को जोधपुर में राजस्थान हाई कोर्ट की नई इमारत का उद्घाटन करते हुए कहा, "इसके अलावा गरीबों और वंचितों को मुफ्त कानूनी सहायता मुहैया कराने का दायरा भी व्यापक करना होगा."

राष्ट्रपति ने राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायाधीशों से आग्रह किया कि दिए गए निर्णयों की जानकारी हिंदी में उपलब्ध कराई जाए. उन्होंने कहा कि उच्चतम तकनीक का उपयोग करते हुए सुप्रीम कोर्ट नौ भाषाओं में अपने निर्णयों के बारे में जानकारी दे रहा है. उन्होंने कहा कि सत्य हमारे गणतंत्र की नींव बनाता है और संविधान ने न्यायपालिका को सत्य की रक्षा की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है.

उन्होंने कहा, "ऐसी स्थिति में न्यायपालिका की जिम्मेदारी बढ़ जाती है. हमारे देश में अतीत में राजाओं और बादशाहों से न्याय पाने के लिए कोई भी व्यक्ति उनके निवास के बाहर घंटी बजा सकता था और न्याय पा सकता था, लेकिन अब स्थिति बदल गई है."

राष्ट्रपति ने कहा, "न्यायिक प्रणाली बहुत महंगी हो गई है. देश के किसी भी गरीब व्यक्ति के लिए हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच स्थापित करना मुश्किल हो गया है. ऐसी स्थिति में हम सभी की जिम्मेदारी है कि देश के प्रत्येक नागरिक की सस्ते न्याय तक पहुंच हो. सभी को इस दिशा में प्रयास करने होंगे."

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने न्याय की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा कि सभी के लिए न्‍याय सुलभ होना चाहिए. उन्होंने कहा, 'मेरी सबसे बड़ी चिंता यह है कि क्या हम, सभी के लिए न्याय सुलभ करा पा रहे हैं?' साथ ही उन्होंने न्याय प्रक्रिया के खर्चीला होते जाने की बात भी की.  

उन्होंने कहा, ‘‘यह सवाल सर्वाधिक महत्वपूर्ण है, क्योंकि संविधान की प्रस्तावना में ही हम सब ने, सभी के लिए न्याय सुलभ कराने का दायित्व स्वीकार किया है.'' उन्होंने कहा, ‘‘मेरी सबसे बड़ी चिंता यह है कि क्या हम, सभी के लिए न्याय सुलभ करा पा रहे हैं?''

(एजेंसियों के इनुपट के साथ)

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