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पहलू खान केस: राजस्थान HC ने सरकार और परिजनों की अपील को अटैच करने का दिया आदेश

पहलू खान मॉब लिंचिंग मामले में आज राजस्थान हाईकोर्ट में परिजनों की अपील पर सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान राजस्थान हाईकोर्ट ने सरकार और पहलू खान के परिजनों की अपील को अटैच करने का आदेश दिया.

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aajtak.in
देव अंकुर अलवर , 08 November 2019
पहलू खान केस: राजस्थान HC ने सरकार और परिजनों की अपील को अटैच करने का दिया आदेश  पहलू खान केस में सुनवाई (प्रतीकात्मक फोटो- Aajtak)

  • पहलू खान केस में राजस्थान हाईकोर्ट में सुनवाई
  • सरकार की अपील को अटैच करने का आदेश

पहलू खान मॉब लिंचिंग मामले में शुक्रवार को राजस्थान हाईकोर्ट में परिजनों की अपील पर सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान राजस्थान हाईकोर्ट ने सरकार और पहलू खान के परिजनों की अपील को अटैच करने का आदेश दिया. जस्टिस सबीना की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की.

इस दौरान न्यायालय ने आदेश दिया कि इस मामले में सरकार की अपील को पहलू खान के परिजनों द्वारा की गई अपील के साथ अटैच किया जाए. इससे पहले सरकार की अपील आज के लिए लिस्ट नहीं हुई थी.

पहलू खान मामले में गहलोत सरकार और पहलू खान के परिजनों ने एडीजे कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी थी जिसने अगस्त महीने की 14 तारीख को छह आरोपियों को पहलू खान मामले में बरी कर दिए गए थे.

6 आरोपियों को कर दिया गया था बरी

एडीजे कोर्ट की मजिस्ट्रेट डॉ. सविता स्वामी ने अगस्त माह में पहलू खान मॉब लिंचिंग केस में अपना फैसला सुनाया था, जिसमें 6 आरोपियों को बरी कर दिया गया था. कोर्ट ने माना था कि अभियोजन पक्ष संशय से परे आरोप साबित करने में सक्षम साबित नहीं हो पाई थी. पहलू खान के साथ हुई मारपीट के वीडियो को भी सबूत के तौर पर एडीजे कोर्ट ने मानने से मना कर दिया था.

पहलू खान की मॉब लिंचिंग राजस्थान के अलवर जिले में हुई थी जब वह अपने बेटों के साथ राजस्थान के जयपुर से गाय और बछड़े लेकर हरियाणा की तरफ जा रहे थे.

अस्पताल में हो गई थी पहलू खान की मौत

यह घटना 1 अप्रैल 2017 को हुई थी और पहलू खान की मौत अप्रैल 4 को अलवर के एक अस्पताल में हो गई थी. इस साल की 30 अक्टूबर को राजस्थान उच्च न्यायालय ने पहलू खान के बेटों के खिलाफ गौ तस्करी की एफआईआर को रद्द करने का आदेश दिया था. यह एफआईआर पहलू खान के बेटों के खिलाफ गौ तस्करी मामले में दर्ज की गई थी.

राजस्थान उच्च न्यायालय के मुताबिक, दस्तावेज यह दिखाते थे कि गायों को तस्करी के लिए नहीं बल्कि डेयरी उपयोग के लिए लेकर जाया जा रहा था. राजस्थान उच्च न्यायालय का कहना था कि जिन गायों को लेकर जाया जा रहा था वह दुधारू गाय थी और बछड़े एक और दो साल के थे, इसलिए यह नहीं माना जा सकता कि उन्हें काटने के लिए लेकर जाया जा रहा था.

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