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अशोक गहलोत ने खुद को और अपने मंत्रियों को दिया बड़ा फायदा

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य में विधानसभा चुनाव की घोषणा के दिन खुद को और अपने मंत्रियों को बड़ा तोहफा दिया. गहलोत ने आचार संहिता लगने के दिन सर्कुलर निकाला है कि नेताओं के घर पर लगाए गए सुविधा के समानों का सभी भुगतान माफ होगा और ये नियम 1 दिसंबर 2008 से लागू होगा. विपक्ष ने इसे सरकारी खजाने की लूट बताते हुए कहा है कि चुनाव आयोग से इसकी शिकायत की जाएगी.

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शरत कुमार [Edited By: पंकज विजय]जयपुर, 18 October 2013
अशोक गहलोत ने खुद को और अपने मंत्रियों को दिया बड़ा फायदा अशोक गहलोत

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य में विधानसभा चुनाव की घोषणा के दिन खुद को और अपने मंत्रियों को बड़ा तोहफा दिया. गहलोत ने आचार संहिता लगने के दिन सर्कुलर निकाला है कि नेताओं के घर पर लगाए गए सुविधा के समानों का सभी भुगतान माफ होगा और ये नियम 1 दिसंबर 2008 से लागू होगा. विपक्ष ने इसे सरकारी खजाने की लूट बताते हुए कहा है कि चुनाव आयोग से इसकी शिकायत की जाएगी.

मंत्रिमंडल ने घर पर इस्तेमाल होने वाले ऑफिस से लिए मुफ्त के सामानों की लिस्ट निकाली है. मुख्यमंत्री के 34 सामानों की लिस्ट ही देख लीजिए. घर पर बने ऑफिस में 120 अलमारी और रैक फ्री ले सकते हैं. घर में बने दफ्तर में 50 एसी और 25 सेट सोफासेट, 780 कुर्सियां मुफ्त में लगाइए.

मंत्री भी अपने घरों पर ऑफिस के लिए तीन एसी, चार कूलर, 3 सेट सोफासेट, 95 कुर्सियां समेत 25 समान जिसमें अलमारी, कारपेट, गीजर, रूम हीटर बहुतायत मात्रा में ले सकते हैं. जबकि नियम के अनुसार मुख्यमंत्री पहले चार एसी, चार सोफासेट और मंत्रियों को एक-एक सामानों के अलावा सभी के लिए किराया देना पड़ता था. किराया 2 रुपये कुर्सी से लेकर 50 रुपये महीने एसी तक देना पड़ता है. मंत्रियों का कहना है कि हमें तो मंत्रिमंडल के इस सर्कुलर पर हस्ताक्षर करने के लिए कहा गया और हमने कर दिया वरना हम तो पैसे दे देते.

राज्य सरकार में शिक्षा मंत्री ब्रजकिशोर शर्मा ने कहा, 'सर्कुलर मुख्यमंत्री जी फैसला था, फैसले पर हमने भी हस्ताक्षर किए हैं. ये मंत्रिमंडल की सामूहिक जिम्मदारी थी.'

राज्य के समान्य प्रशासन विभाग, जिसके मंत्री खुद अशोक गहलोत हैं, ने 4 अक्टूबर को ये आदेश निकाला है कि मुख्यमंत्री, मंत्री और विधायकों को अब अपने घर पर सरकारी पैसे से खरीदे गए समानों के लिए कोई पैसा नही देना है. 1 दिसंबर 2008 से यानी खुद के मुख्यमंत्री बनने से भी 12 दिन पहले से ये आदेश प्रभावी होगा.

आदेश की कॉपी देखकर साफ पता चलता है कि सब पहले से ही तैयार था बस चुनाव के घोषणा होते ही कलम से डेट डाल दी गई. अमूमन मुख्यमंत्री का किराया एक लाख तक का होता है और मंत्रियों को 15 से 20 हजार, लेकिन उसे भी देने से मना करने के इस आदेश के खिलाफ विपक्ष चुनाव आयोग जाएगा.

बीजेपी नेता कैलाश नाथ भट्ट ने कहा, 'ये आदेश लागू करना नैतिक रूप से गलत है और आचार संहिता लगने के दिन इस तरह से किराया माफ करवाना गलत है. हम इसकी चुनाव आयोग में शिकायत करेंगे.'

किसी भी मंत्री ने नहीं लौटाया सामान
हैरत की बात है कि 5 साल में 12 मंत्री हटाए गए हैं लेकिन किसी ने भी सामान नहीं लौटाया है. उन्हें अब किराया भी नहीं देना है. दरअसल दफ्तर के नाम पर उन समानों का प्रयोग नेता अपने घर में करते हैं. कार्मिक विभाग की ओर से यह बताया गया कि सभी मंत्रियों की मांग थी कि 'नो ड्यूज' के लिए भटकना पड़ता है. चुनाव लड़ने के लिए और पैसे जमा कराने के लिए लिस्ट बनवाने में बहुत समय लगता है. लिहाजा किराए के सिस्टम को ही खत्म कर दिया जाए. इसके बाद सरकार ने कदम उठाया है. हालांकि एक भी मंत्री ने आजतक से बातचीत में यह मांग किए जाने की खबर की पुष्टि नहीं की.

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