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पंजाब के बाढ़ प्रभावित इलाकों में नहीं पहुंची सरकारी मदद

देश  का पेट भरने वाला पंजाब राज्य आज बुरे दौर से गुजर रहा है. बाढ़ के पानी ने हर घर के कीमती सामान को बर्बाद कर दिया है. यहां तक कि पहनने के लिए कपड़े और खाने के लिए कुछ नहीं बचा है. यह लोग सिर्फ धार्मिक संस्थाओं और स्थानीय गुरुद्वारे से आने वाले खाने पर जिंदा हैं.

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aajtak.in
मनजीत सहगल फूलकलां/रूपनगर, 25 August 2019
पंजाब के बाढ़ प्रभावित इलाकों में नहीं पहुंची सरकारी मदद पंजाब के बाढ़ प्रभावित इलाके (फोटो-मनजीत सहगल)

  • बाढ़ के कहर के बाद अब कच्चे मकान गिरने का खतरा
  • फुलकलां गांव में गिर चुके हैं कई घर, डर के साए में जी रहे लोग
  • लोगों को खाने और कपड़ों की मदद, पर नुकसान की भरपाई नहीं

इस वक्त पंजाब के रूपनगर जिला के अंतर्गत आने वाले फुलकलां गांव बाढड क कहर झेल रहा है. गांव में जहां भी नजरें दौडाएं, चारों तरफ बर्बादी का मंजर नजर आता है. यही नहीं गांव का मंदिर, दुकानें, सड़क, पानी का कुआं, पुलिया सब कुछ बाढ़ की भेंट चढ़ चुका है. इसके बावजूद लोग जिंदगी को फिर से पटरी पर लाने की कोशिश में जुटे हैं. वे बचा-खुचा सामान धूप में रखकर बचाने की कोशिश कर रहे हैं.

देश का पेट भरने वाला पंजाब राज्य आज बुरे दौर से गुजर रहा है. बाढ़ के पानी ने हर घर के कीमती सामान को बर्बाद कर दिया है. यहां तक कि पहनने के लिए कपड़े और खाने के लिए कुछ नहीं बचा है. यह लोग सिर्फ धार्मिक संस्थाओं और स्थानीय गुरुद्वारे से आने वाले खाने पर जिंदा हैं. यहां तक कि उनको कपड़े भी दान में लेने पर मजबूर होना पड़ा है. हालांकि गांव में धार्मिक संस्थाएं दवाइयों से लेकर स्कूलों की कॉपी किताबों, खाने-पीने और कपड़ों का इंतजाम कर रही है. सरकार ने मदद का भरोसा तो जरूर दिया है, लेकिन अभी तक इन बाढ़ प्रभावित इलाकों तक सरकार की मदद नहीं पहुंची है.

विधवा बलवीर कौर के लिए बाढ़ बनी एक मुसीबत

फूलकला गांव की 70 वर्षीय विधवा बलवीर कौर के लिए बाढ़ एक मुसीबत बनकर आई. बाढ़ ने उनके परिवार का सब कुछ बर्बाद कर दिया. उनके पति और देवर अब इस दुनिया में नहीं है. देवर अपने पीछे दो अविवाहित बेटियां और एक बेटा छोड़कर गया है. एक बेटी की अभी शादी होने वाली थी, लेकिन बाढ़ ने सारे किए कराए पर पानी फेर दिया है. शादी के लिए खरीदा गया सारा सामान बाढ़ के पानी ने बर्बाद कर दिया.

उनके घर में 4 से 5 फीट तक बाढ़ का पानी घुस आया जिससे घर का सारा सामान बर्बाद हो गया. हालांकि गांव के दूसरे लोगों की तरह उनको भी स्थानीय गुरुद्वारे और दूसरी धार्मिक संस्थाओं से मदद मिल रही है, लेकिन सरकार की तरफ से अभी तक कोई मदद नहीं मिली है.

पीड़ित की मांग, नहीं चाहिए सरकार से पैसा, बस बनवा दें घर

गांव की एक अन्य विधवा अमरो सरकार से पैसा नहीं लेना चाहतीं. बल्कि चाहती है कि सरकार बाढ़ में नष्ट हुए उसके घर को फिर से बना कर दें. कच्चे घर में रह रही अमरो को डर है कि उसके घर की दीवारें कभी भी गिर सकतीं हैं.

दूसरी ओर पीड़ित छिंदर कौर पर भी बाढ़ कहर बनकर टूटी है. छिंदर कौर का पति पिछले 8 सालों से लापता है और वह हर रोज काम करके सिर्फ 3000 प्रतिमाह कमा पाती हैं. भगवान ने उनको दो बेटे तो जरूर दिए, लेकिन उनकी आंखों की रोशनी चली गई. अब बाढ़ का पानी उतर चुका है लेकिन उनके घर की दीवारों को कमजोर कर दिया है. उनको भी गांव के दूसरे लोगों की तरह सरकार की मदद की दरकार है.

उधर जब पंजाब के कैबिनेट मंत्री चरणजीत सिंह चन्नी से सरकारी मदद को लेकर जब सवाल किया गया तो उन्होंने कहा, 'गांव में खाने-पीने और दवाइयों आदि के शिविर लगाए गए हैं और केंद्र सरकार से जल्द फौरी राहत मिलने की उम्मीद है.' चन्नी के मुताबिक बाढ़ ने गांव को पूरी तरह से तहस-नहस कर दिया है, जिसे सुधारने में कम से कम एक महीने का वक्त लगेगा.

रूपनगर के जिलाधीश सुमित जांगराल ने आज तक को बताया, 'पंजाब में लगभग 600 के करीब गांव बाढ़ प्रभावित हैं जिनमें से 175 गांव रूपनगर जिला में  हैं. रूपनगर के 50 घर पानी में डूब गए थे जिसमें से 23 परिवारों को सुरक्षित ठिकानों पर पहुंचाया गया था.'

उनका कहना है कि हमारी पहली कोशिश लोगों की जान बचाने की थी जो हम बचा पाए. उसके बाद लोगों के खाने-पीने की व्यवस्था करना था. इसके अलावा उनके पशुओं के चारे की व्यवस्था भी की गई. अब बाढ़ से हुए नुकसान का जायजा लिया जाएगा और हर संभव मदद की जाएगी.

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