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मुख्यमंत्री अमरिंदर का मोदी सरकार पर हमला, कहा- देश में चल रहा हिटलर राज

पंजाब विधानसभा में CAA के खिलाफ लाए गए प्रस्ताव को लेकर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने केंद्र सरकार पर बड़ा हमला किया है. अमरिंदर ने कहा कि आप हिटलर की जीवनी निकाल कर पढ़ लीजिए, जो हिटलर के शासन में उस वक्त हो रहा था... वहीं आज हमारे देश में हो रहा है.

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aajtak.in
सतेंदर चौहान चंडीगढ़, 17 January 2020
मुख्यमंत्री अमरिंदर का मोदी सरकार पर हमला, कहा- देश में चल रहा हिटलर राज पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह (फाइल-ट्विटर)

  • पंजाब विधानसभा में सीएए के खिलाफ प्रस्ताव पेश
  • पूर्व केंद्रीय मंत्री चिदंबरम ने की इस कदम की तारीफ

पंजाब विधानसभा में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ लाए गए प्रस्ताव को लेकर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने केंद्र सरकार पर बड़ा हमला किया है. अमरिंदर ने कहा कि आप हिटलर की जीवनी निकाल कर पढ़ लीजिए, जो हिटलर के शासन में उस वक्त हो रहा था... वहीं आज हमारे देश में हो रहा है.

केरल की तरह पंजाब सरकार भी विधानसभा में संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के खिलाफ प्रस्ताव लेकर आई है. पंजाब की कैप्टन सरकार में कैबिनेट मंत्री ब्रह्म महिंद्रा ने विधानसभा में सीएए के खिलाफ प्रस्ताव पेश किया.

चिदंबरम ने की तारीफ

ब्रह्मा महिंद्रा की ओर से पेश प्रस्ताव पर विधानसभा में चर्चा चल रही है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम ने पंजाब सरकार के इस कदम की तारीफ की है.

कैप्टन अमरिंदर सिंह सरकार की ओर से पेश इस प्रस्ताव में कहा गया है कि नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) का प्रारूप देश के संविधान और इसकी मूल भावना के खिलाफ है. यह देश के कुछ धर्म विशेष के लोगों की पहचान को खत्म करने की कोशिश है.

'प्रवासी लोगों को बांटने की सोच'

प्रस्ताव में यह भी कहा गया कि इस एक्ट के जरिए प्रवासी लोगों को बांटने की सोच है और ये समानता के अधिकार के खिलाफ है. प्रस्ताव में यह भी कहा गया कि एनसीआर और एनपीआर को लेकर लोगों के शक और दुविधाएं हैं, उन्हें दूर करके ही इन्हें पारित किया जाए. सीएए में भी बदलाव किया जाना चाहिए.

इससे पहले मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने कहा था कि उनकी सरकार विभाजन करने वाले इस कानून को लागू नहीं होने देगी. यह कानून एनआरसी और एनपीआर के साथ भारतीय संविधान का उल्लंघन करता है.

पंजाब से पहले केरल विधानसभा ने इस विवादित कानून को खत्म करने के लिए प्रस्ताव पारित किया है. ऐसा करने वाला केरल पहला राज्य है. जबकि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पश्चिम बंगाल सरकार पहले ही कह चुकी है कि वह नए कानून के खिलाफ है.

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