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इंडिया टुडे की खबर का असर, संगरूर में बच्चे की मौत मामले में केंद्र और राज्य सरकार तलब

एक जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने आज एनडीआरएफ, केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है. यह नोटिस संगरूर के भगवानपुरा गांव में दो साल के बच्चे की बोरवेल में गिरकर मौत के मामले में जारी किया गया है. इंडिया टुडे में छपी खबर के आधार पर कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई थी.

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मनजीत सहगल [Edited by: सुजीत कुमार]नई दिल्ली, 17 June 2019
इंडिया टुडे की खबर का असर, संगरूर में बच्चे की मौत मामले में केंद्र और राज्य सरकार तलब पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट (फाइल फोटो)

इंडिया टुडे में एक खबर छपी थी. जिसमें विस्तार से बताया गया था कि संगरूर के भगवानपुरा गांव में दो साल के बच्चे के बोरवेल में गिरने के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन में देर हुई थी. खबर में बताया गया था कि बोरवेल के समानांतर सुरंग बनाने में देरी हुई थी. स्थानीय प्रशासन के पास रेस्क्यू के लिए पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं था. यहां तक कि रेस्क्यू के दौरान बोरवेल की सही गहराई का अनुमान भी नहीं लगाया जा सका था. इसी खबर के आधार पर कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई थी.

भारत के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सत्यपाल जैन ने बताया कि केंद्र और राज्य सरकार के अलावा पंजबा के मुख्य सचिव को भी नोटिस देकर कोर्ट ने रेस्क्यू ऑपरेशन की विस्तार से रिपोर्ट मांगी है. जैन ने बताया, 'कोर्ट के माननीय जज ने केंद्र सरकार, एनडीआरएफ, संगरूर के उपायुक्त, संगरूर के एसपी और संगरूर के मजिस्ट्रेट को भी नोटिस देकर उनसे जवाब मांगा है.'

सत्यपाल जैन ने बताया कि पंजाब के मुख्य सचिव को भी तलब कर जवाब मांगा गया है. उनसे पूछा गया है कि किन कारणों से घटना घटी, उन्हें रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए थे और बच्चे के रेस्क्यू में क्या कमियां रह गई. इसकी विस्तृत रिपोर्ट दें.

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर कितना हुआ अमल

मुख्य सचिव से कोर्ट ने यह भी पूछा है कि सुप्रीम कोर्ट ने 2010 में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कुछ दिशा-निर्देश जारी किए थे. उस पर अमल के लिए क्या कदम उठाए गए. इसकी भी स्टेट्स रिपोर्ट पेश करें. सत्यपाल जैन ने बताया कि जनहित याचिका दायर करने का उद्देश्य बच्चे की मौत के पीछे कौन जिम्मेदार है, यह जानना है. उन्होंने कहा कि अगर राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन किया होता तो शायद निर्दोष बच्चे की जान नहीं गई होती. इसमें जिन अधिकारियों ने लापरवाही बरती है, उनकी जिम्मेवारी तय करनी होगी.

कैसे गई थी दो साल के बच्चे की जान

गौरतलब है कि संगरूर के भगवानपुरा गांव में 6 जून को फतेहवीर नाम का दो साल का बच्चा बोरवेल में गिर गया था. 109 घंटे बाद उसे बोरवेल से निकाला गया था. जिसे तुरंत अस्पताल भेजा गया. लेकिन अस्पताल ने उसे मृत घोषित कर दिया था. बाद में बच्चे के परिजनों ने भूख हड़ताल कर दी थी और स्थानीय प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया था.

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