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AAP पार्टी की मांग, राणा गुरजीत सिंह दें मंत्री पद से इस्तीफा!

कैबिनेट मंत्री राणा गुरजीत सिंह के रसोइए वाले विवाद की आग बढ़ती ही जा रही है. उन्होंने हाल ही में ओपन भीड़ में हिस्सा लेकर 26 करोड़ से ज्यादा रुपए में एक खान खरीदी है. इस मामले को लेकर आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस सरकार पर हल्ला बोल दिया है.

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aajtak.in
सतेंदर चौहान नई दिल्ली, 30 May 2017
AAP पार्टी की मांग, राणा गुरजीत सिंह दें मंत्री पद से इस्तीफा! राणा गुरजीत सिंह और खानसामे अमित बहादुर

कैबिनेट मंत्री राणा गुरजीत सिंह के रसोइए वाले विवाद की आग बढ़ती ही जा रही है. उन्होंने हाल ही में ओपन भीड़ में हिस्सा लेकर 26 करोड़ से ज्यादा रुपए में एक खान खरीदी है. इस मामले को लेकर आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस सरकार पर हल्ला बोल दिया है. आम आदमी पार्टी के नेताओं ने कह दिया है कि जब तक राणा गुरजीत सिंह अपने मंत्री पद से इस्तीफा नहीं देंगे तब तक आम आदमी पार्टी पंजाब में धरने प्रदर्शन करती रहेगी और सुबह से विधानसभा से लेकर पंजाब के मुख्यमंत्री निवास तक एक मार्च भी निकालेगी. उसके बाद आम आदमी पार्टी के नेता, राणा गुरजीत के घर के बाहर धरना देंगे हालांकि इस मामले में कैप्टन अमरिंदर सिंह ने एक न्यायिक आयोग का गठन कर दिया है जो 1 महीने के भीतर पूरे मामले की जांच सरकार को सौंपेगा. लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस शख्स की बैंक खातों में सिर्फ 5000 रुपयें का बैलेंस है वो किस आधार पर 26 करोड़ रुपए की बोली लगाकर खान खरीद सकता है.

आज तक के संवाददाता सतेंद्र चौहान ने 26 करोड़ के इस मामले में राणा गुरजीत सिंह के खानसामे से बातचीत की और जानना चाहा कि किस तरीके से कुछ हजार रुपए महीने कमाने वाला व्यक्ति रातों रात करोड़पति बन सकता है. खानसामे ने कहा मैंने ही ओपन भीड़ में हिस्सा लिया है 26 करोड़ रुपए की बोली लगाकर खान हासिल की है राणा गुरजीत के साथ मेरा कोई संबंध नहीं है हां मैं पहले राणा गुरजीत के यहां पर काम करता था लेकिन 14 फरवरी को मैंने वहां से नौकरी छोड़ दी है अब मैं कैप्टन रंधावा साहब के साथ काम करता हूं और उन्होंने ही इस बोली के लिए पैसे लगाए हैं.

वहीं आरोप सारे पंजाब के बिजली और सिंचाई मंत्री राणा गुरजीत सिंह पर लगाए जा रहें हैं जिन्होंने अपने खानसामे अमित बहादुर के जरिए 26 करोड़ 51 लाख रुपए की ऑनलाइन बोली लगाकर रेत की खान का लाइसेंस हासिल कर लिया. हैरानी की बात ये है कि राणा गुरजीत सिंह के घर पर खाना बनाने वाला अमित बहादुर नेपाल का रहने वाला है और चंद हजार रुपए की नौकरी करता है. ऐसे में अब सवाल उठ रहा है कि आखिरकार कैसे इस साधारण से आदमी ने 26 करोड़ रुपए से ज्यादा की बोली लगाकर रेत की खान का लाइसेंस हासिल कर लिया.

बोली लगाकर गायब हो गए लोग
बता दें कि पंजाब सरकार ने 19 और 20 मई को 89 रेत खनन खानों की नीलामी की थी और 1000 करोड़ से ज्यादा की रिकॉर्ड आमदनी इन रेत की खानों से करने का दावा किया गया. इस ऑनलाइन बोली में शामिल होने वाले लोगों में से करीब 50% लोग या तो बोगस निकले या फिर भारी भरकम बोली लगाकर अचानक से गायब हो गए. आरोप है कि पंजाब सरकार के बिजली और सिंचाई मंत्री राणा गुरजीत सिंह की कंपनी राणा शुगर के 3 कर्मचारियों ने इस नीलामी में रेत की खानों के कॉन्ट्रैक्ट लाइसेंस हासिल कर लिए हैं. इस पूरे विवाद पर मंत्री राणा गुरजीत सिंह ने गोलमोल जवाब दिया और कहा कि अमित बहादुर नाम का खानसामा पहले उनके यहां पर काम किया करता था, लेकिन अब उनके ही एक और दोस्त के घर पर वह काम करता है.

 राणा गुरजीत ने की पल्ला झाड़ने की कोशिश
राणा ने कहा कि उनका ये दोस्त भी बोली लगाने वालों में शामिल था इसलिए उन्हें जानकारी नहीं है कि बोली अमित बहादुर के नाम पर लगी या किसी और व्यक्ति के नाम पर. राणा गुरजीत ने इस पूरे विवाद से अपना पल्ला झाड़ने की कोशिश की. उन्होंने दावा किया कि ऐसा पहली बार पंजाब में हो रहा है कि जब सरकार की पहल के बाद रेत की खानों से इतना भारी भरकम रेवेन्यू राज्य सरकार को मिल रहा है.

उन्होंने कहा कि अगर एक खानसामे को इतना बड़ा कॉन्ट्रैक्ट लाइसेंस हासिल हो जाता है तो ये दिखाता है कि पंजाब की कांग्रेस सरकार ने तमाम आम आदमियों को इस ऑनलाइन बोली में शामिल होने का मौका दिया. अगर कोई आम व्यक्ति इतना बड़ा कॉन्ट्रैक्ट लाइसेंस लेकर आगे बढ़ना चाहता है तो इसमें हर्ज ही क्या है.

खानसामे को कहां से मिली करोड़ों की फीस
हालांकि राणा गुरजीत इस सवाल का जवाब नहीं दे सके कि एक मामूली खानसामा रेत की खान का कॉन्ट्रैक्ट मिलने के बाद लाइसेंस फीस के रूप में जमा की जाने वाली करोड़ों की फीस को कहां से जमा करवा पाया है. AAP ने घेरा कांग्रेस को

आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस की पंजाब सरकार को इस पूरे मामले में घेरते हुए कहा कि पहले अकाली-बीजेपी सरकार ने खनन माफिया के सहारे इस पूरे सरकारी बिजनेस पर अपना कब्जा जमा रखा था. और अब कांग्रेस भी वही काम कर रही है. तमाम सरकारी व्यापारों पर कांग्रेसी नेताओं का ही वर्चस्व फैलाने की कोशिश की जा रही है.

आम आदमी पार्टी के पंजाब के सीनियर लीडर सुखपाल खैहरा ने कहा कि मंत्री राणा गुरजीत की कंपनी ने करोड़ों की बोली लगाकर जिस तरह से रेत की खानों के कॉन्ट्रैक्ट हासिल किए हैं. वो ये दिखाता है कि कांग्रेस के नेता और मंत्री अपने गुर्गों के नाम पर तमाम सरकारी बिजनेस पर अपना ही अधिकार रखना चाहते हैं. आम आदमी पार्टी ने इस पूरे मामले को उठाते हुए मंत्री राणा गुरजीत के इस्तीफे की मांग भी कर ली है.

अकालियों के निशाने पर कांग्रेस
अकाली दल ने भी पंजाब की कांग्रेस सरकार को निशाने पर लेते हुए कहा कि सिर्फ दिखावे के लिए नीलामी करके रेत की खानों की नीलामी की गई है, जबकि नीलामी में मोटी बोली लगाने वाले और लाइसेंस हासिल करने वाले लोग कांग्रेस के नेताओं और मंत्रियों से ही जुड़े हैं.

एच सी अरोड़ा ने ED को लिखी चिट्ठी
वहीं पहले से ही पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में राणा गुरजीत के खिलाफ मंत्री पद पर रहते हुए अपनी कंपनी से सरकार को बिजली बेचने के मामले में जनहित याचिका लगाने वाले एडवोकेट एच सी अरोड़ा ने भी इस मामले में ED को चिट्ठी लिखी है. उन्होंने इस पूरे मामले और रेत खानों की नीलामियों की जांच कराने की अपील की है.

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