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उद्धव ठाकरेः पिता की वजह से मिली शिवसेना विरासत और टकराव

जब तक बाला साहेब ठाकरे राजनीति में सक्रिय रहे तो उद्धव राजनीतिक परिदृश्य से लगभग दूर ही रहे या फिर उनके पीछे ही खड़े दिखे. हालांकि उद्धव पार्टी की कमान संभालने से पहले शिवसेना के अखबार सामना का काम देखते थे और उसके संपादक भी रहे. हालांकि बाद में बाल ठाकरे की बढ़ती उम्र और खराब सेहत के कारण उन्होंने पार्टी के कामकाज को देखना शुरू कर दिया था.

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सुरेंद्र कुमार वर्मानई दिल्ली, 15 March 2019
उद्धव ठाकरेः पिता की वजह से मिली शिवसेना विरासत और टकराव शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे (फाइल-ट्विटर)

महाराष्ट्र की राजनीति में ठाकरे परिवार की अपनी अलग पहचान है और राज्य में इसके बराबरी में कोई अन्य परिवार खड़ा नहीं हो सका है. खास बात यह है कि परिवार सत्ता से दूर रहता है, लेकिन सत्ता उसके आसपास ही रहती है. आज की तारीख में उद्धव ठाकरे शिवसेना के मुखिया हैं जो हिंदू राष्ट्रवादी पार्टी है और इस पार्टी का गठन जून, 1966 में उनके पिता बाला साहेब ठाकरे ने किया था.

जब तक बाला साहेब ठाकरे राजनीति में सक्रिय रहे तो उद्धव राजनीतिक परिदृश्य से लगभग दूर ही रहे या फिर उनके पीछे ही खड़े दिखे. हालांकि उद्धव पार्टी की कमान संभालने से पहले शिवसेना के अखबार सामना का काम देखते थे और उसके संपादक भी रहे. हालांकि बाद में बाल ठाकरे की बढ़ती उम्र और खराब सेहत के कारण उन्होंने 2000 के बाद पार्टी के कामकाज को देखना शुरू कर दिया था. इस दौरान वह पार्टी की चुनाव संबंधी गतिविधियों में शामिल होते थे.

2002 की जीत से बढ़ा कद

साल 2002 में बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉरपोरेशन (बीएमसी) के चुनावों में शिवसेना को जोरदार सफलता मिली और इसका श्रेय उन्हें दिया गया और उन्हें जनवरी 2003 से पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष बना दिया गया. हालांकि यहां तक का सफर उनके लिए बेहद चुनौतीपूर्ण रहा क्योंकि उनके चचेरे भाई राज ठाकरे पार्टी में बाल ठाकरे के निर्विवाद उत्तराधिकारी माने जा रहे थे, लेकिन बाल ठाकरे के अपने बेटे उद्धव को उत्तराधिकारी चुने से आहत राज ने 2006 में पार्टी छोड़ दी और नई पार्टी का गठन किया. हालांकि पार्टी पर उनकी 2004 से ही है और वह तभी से पार्टी से जुड़े हर बड़े फैसले लेते रहे हैं.

कम बोलने वाले उद्धव ठाकरे को जब बाल ठाकरे ने शिवसेना के उत्तराधिकारी के रूप में चुना तो कई लोगों को आश्चर्य हुआ था क्योंकि पार्टी के बाहर लोग उनका नाम तक नहीं जानते थे और राज ठाकरे संभावित उत्तराधिकारी के रूप में जाने जाते थे.

27 जुलाई, 1960 को मुंबई में जन्मे उद्धव ठाकरे के परिवार में पत्नी रश्मी ठाकरे के अलावा 2 बेटे आदित्य और तेजस हैं. उनका बड़ा बेटा आदित्य दादा और पिता की तरह राजनीति में सक्रिय है और शिवसेना की युवा संगठन युवा सेना का राष्ट्रीय अध्यक्ष है. आदित्य मुंबई जिला फुटबॉल संघ के अध्यक्ष भी हैं. हालांकि अपने पिता और बड़े भाई की तुलना में तेजस जनसंपर्क से दूर ही रहते हैं.

फोटोग्राफी का शौक

59 वर्षीय उद्धव राजनीतिक जीवन से इतर वाइल्‍डलाइफ फोटोग्राफी का शौक रखते हैं और इससे जुड़ी ढेरों प्रदर्शनियों और पर्यावरण से जुड़े कार्यक्रमों का आयोजन करते रहते हैं. फोटो पर आधारित उनकी कई फोटो बुक्स हैं जो कि राज्य के लोगों, जनजीवन और ऐतिहासिक विरासत से जुड़ी बातों का जिक्र करती है.

हालांकि बाल ठाकरे के दौर में पार्टी महाराष्ट्र में हमेशा मजबूत पार्टी के रूप में कायम रही और समान विचारधारा होने के कारण उसका भारतीय जनता पार्टी के साथ गठबंधन है. 2014 में नरेंद्र मोदी के केंद्र में आने से पहले शिवसेना इस गठबंधन में बड़े भाई की भूमिका में रहती थी, लेकिन इसके बाद बीजेपी वहां बड़े भाई की भूमिका में आ गई. 2014 में विधानसभा में गठबंधन को जीत के बाद शिवसेना अपना मुख्यमंत्री नहीं बना सकी.

2014 के बाद लंबे समय तक बीजेपी के साथ खटास बने रहने के बाद 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले उद्धव ठाकरे ने बीजेपी के साथ चुनाव को लेकर सीट का बंटवारा कर लिया. बीजेपी 25 और शिवसेना 23 सीटों से चुनाव लड़ेगी. अब देखना होगा कि पिछले 5 साल तक केंद्र की मोदी सरकार पर लगातार सवाल खड़े करने वाली शिवसेना को उद्धव ठाकरे इस बार कहां तक ले जा पाते हैं.

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