एडवांस्ड सर्च

पहले रोकी होतीं ट्रेनें तो तेजी से नहीं बढ़ती कोरोना मरीजों की संख्या: शिवसेना

सामना के संपादकीय में आशंका जताई गई है कि भारत भी इटली और जर्मनी के रास्ते पर हो सकता है जिन्होंने महामारी के खतरे को पहले गंभीरता से नहीं लिया, जिसकी वजह से वहां हजारों लोगों की जान चली गई. सामना ने लिखा है, प्रधानमंत्री (नरेंद्र मोदी) लोगों को अपने फैसलों से “हैरान” करने के लिए जाने जाते हैं.

Advertisement
aajtak.in
सौरभ वक्तान‍िया मुंबई, 23 March 2020
पहले रोकी होतीं ट्रेनें तो तेजी से नहीं बढ़ती कोरोना मरीजों की संख्या: शिवसेना महाराष्ट्र में तेजी से फैल रहा है कोरोना वायरस (PTI)

  • मोदी सरकार पर सीधा निशाना साधा
  • हैरान करने के लिए जाने जाते हैं PM

देश में सबसे अधिक कोरोना वायरस पॉजिटिव केस महाराष्ट्र से सामने आए हैं. इनकी बढ़ती संख्या के बीच शिवसेना ने केंद्र सरकार पर देरी से एक्शन में आने की बात कही है. पार्टी सांसद संजय राउत ने शिवसेना के मुखपत्र सामना के संपादकीय और एक ट्वीट के जरिए मोदी सरकार पर निशाना साधा है.

सामना के लेख में कहा गया, 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी पर अचानक फैसला लिया था, ऐसा ही रुख अब अपनाना चाहिए था और रेल सेवाओं को बहुत पहले ही निलंबित कर दिया जाना चाहिए था. अगर रेल सेवाओं (मुंबई लोकल ट्रेन समेत) को पहले ही निलंबित कर दिया जाता तो कोरोना वायरस मरीजों की संख्या तेजी से न बढ़ती.'

ये भी पढ़ें: कोरोना से निपटने के लिए पीएम मोदी ने मीडिया प्रमुखों से की बात

सामना के संपादकीय में आशंका जताई गई है कि भारत भी इटली और जर्मनी के रास्ते पर हो सकता है, जिन्होंने महामारी के खतरे को पहले गंभीरता से नहीं लिया, जिसकी वजह से वहां हजारों लोगों की जान चली गई. सामना ने लिखा है, प्रधानमंत्री (नरेंद्र मोदी) लोगों को अपने फैसलों से 'हैरान' करने के लिए जाने जाते हैं. नोटबंदी में उन्होंने लोगों को प्रतिक्रिया के लिए बहुत कम वक्त दिया था, फिर इस महामारी के वक्त इतना वक्त क्यों लिया गया? मुंबई में उपनगरीय सेवाएं प्राथमिकता के आधार पर निलंबित की जानी चाहिए थीं लेकिन भारतीय रेलवे के अधिकारी इसके लिए इच्छुक नहीं थे.

हमें स्थिति की गंभीरता समझनी चाहिए क्योंकि बीते दो दिन में ही 40% मरीज बढ़े हैं. हमारे यहां 50,000 लोगों के अनुपात में एक अस्पताल बेड है क्योंकि हमारी आबादी 1 अरब 30 करोड़ है. इटली के लोगों ने पहले सोशल डिस्टेन्सिंग की सलाह की अनदेखी की और सड़कों पर आते रहे. उन्होंने अनुशासन नहीं दिखाया और अब भुगत रहे हैं. इसी तरह भारतीयों को भी सामाजिक कार्यक्रमों में एकत्र होने और ताली बजाओ जैसे इवेंट नहीं करने चाहिए. असली देशभक्ति घर में रहने में है.

ये भी पढ़ें: कोरोना पॉजिटिव सहकर्मी के साथ ले रहे थे सेल्फी, 6 पाकिस्तानी अधिकारी सस्पेंड

सेना ने कहा, 1896 में प्लेग महामारी के दौरान लोकमान्य तिलक और गोपाल गणेश अगरकर ने खुद को क्वारनटाइन किया था. लोग शहर छोड़कर तंबू में रहने लगे थे जिससे प्लेग के फैलने को रोका जा सके. अब हमें घरों पर रहना है. इस बीच शिवसेना नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने ट्वीट में कहा-

हमारे प्रधान मंत्री की चिंता है कि,'लाॅकडाऊन' को अभी भी लोग गंभीरता से नहीं ले रहे हैं. प्रिय प्रधान मंत्री जी, आपने डर और चिंता के माहौल मे भी तयौहार जैसी स्थिती पैदा कर दि तो ऐसा ही होगा. सरकार गंभीर होगी तो जनता गंभीर होगी

जय हिंद जय महाराष्ट्र

— Sanjay Raut (@rautsanjay61) March 23, 2020

“हमारे प्रधान मंत्री की चिंता है कि 'लॉकडाउन' को अभी भी लोग गंभीरता से नहीं ले रहे हैं. प्रिय प्रधानमंत्री जी,आपने डर और चिंता के माहौल में भी त्योहार जैसी स्थिति पैदा कर दी तो ऐसा ही होगा. सरकार गंभीर होगी तो जनता गंभीर होगी, जय हिंद जय महाराष्ट्र”

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें. डाउनलोड करें
Advertisement
Advertisement

संबंधित खबरें

Advertisement

रिलेटेड स्टोरी

No internet connection

Okay