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NCP की चिट्ठी ने लगवाया महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन? टाइमिंग पर सवाल

दरअसल, बीजेपी और शिवसेना के फेल होने के बाद राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने सोमवार (11 नवंबर) शाम राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) को सरकार बनाने का ऑफर दिया था. एनसीपी को दावा पेश करने के लिए मंगलवार रात 8.30 बजे तक का वक्त दिया गया था. लेकिन एनसीपी ने मंगलवार सुबह 11.30 बजे ही अपना पत्र राज्यपाल को भेज दिया और अधिक वक्त की मांग रखी.

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aajtak.in
जावेद अख़्तर मुंबई/नई दिल्ली, 13 November 2019
NCP की चिट्ठी ने लगवाया महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन? टाइमिंग पर सवाल एनसीपी चीफ शरद पवार के साथ अजित पवार

  • NCP के पास मंगलवार रात 8.30 बजे तक का था वक्त
  • एनसीपी ने सुबह 11.30 बजे ही राज्यपाल को भेजा पत्र
  • एनसीपी ने राज्यपाल से तीन दिन की  मोहलत मांगी

महाराष्ट्र में कोई भी दल या गठबंधन सरकार बनाने के लिए अपना दावा पेश नहीं कर पाया, जिसके चलते राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया. बीजेपी के अलावा सभी विपक्षी दल इस फैसले का विरोध कर रहे हैं और राज्यपाल पर सवाल उठाते हुए यह आरोप लगा रहे हैं कि उन्हें सरकार बनाने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया गया. हालांकि, एक हैरान करने वाली बात ये है कि एनसीपी ने मंगलवार को तय समय से पहले ही अपना पत्र राज्यपाल को भेज दिया था, जिसके बाद राष्ट्रपति शासन की सिफारिश की गई.

दरअसल, बीजेपी और शिवसेना के फेल होने के बाद राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने सोमवार (11 नवंबर) शाम राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) को सरकार बनाने का ऑफर दिया था. एनसीपी को दावा पेश करने के लिए मंगलवार रात 8.30 बजे तक का वक्त दिया गया था. लेकिन एनसीपी ने सुबह 11.30 बजे ही अपना पत्र राज्यपाल को भेज दिया.

एनसीपी के पत्र में क्या था?

एनसीपी ने जो लेटर राजभवन भेजा उसमें सरकार बनाने का दावा नहीं किया गया और न ही समर्थन पत्र की बात की गई. इस लेटर में एनसीपी ने राज्यपाल से तीन दिन की मोहलत मांगी. राज्यपाल ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया और एनसीपी के पत्र को आधार बना कर केंद्रीय गृह मंत्रालय से महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश कर दी.

समय से पहले एनसीपी ने क्यों भेजा पत्र?

अब सवाल ये भी उठ रहे हैं कि एनसीपी के पास मंगलवार रात 8.30 बजे तक का वक्त होने के बावजूद उसने सुबह 11.30 बजे ही राज्यपाल को अपना पत्र क्यों भेज दिया. ये सवाल इसलिए भी ज्यादा अहम हैं क्योंकि इसी दौरान दिल्ली में कांग्रेस वर्किंग कमेटी की अहम बैठक चल रही थी. कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी और एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने आपस में बातचीत भी की. इसी दौरान सोनिया गांधी ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं मल्लिकार्जुन खड़गे, अहमद पटेल और केसी वेणुगोपाल को मुंबई जाकर शरद पवार से मुलाकात करने की जिम्मेदारी सौंपी. लेकिन तीनों नेताओं के मुंबई पहुंचने और शरद पवार संग बैठक करने से पहले ही राष्ट्रपति शासन लगाने की तैयारी हो गई और शाम होते-होते इस बैठक से पहले ही महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लागू हो गया.

पीएम मोदी को निकलना था ब्राजील

एक और बड़ी बात ये है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ब्रिक्स समिट में शामिल होने के लिए ब्राजील निकलना था. पीएम मोदी दोपहर ढाई बजे के आसपास दिल्ली से रवाना हो गए, लेकिन इससे पहले ही उन्होंने दिल्ली में कैबिनेट मीटिंग की और महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन को मंजूरी दे दी.

अजित पवार ने बताया ये कारण

एनसीपी नेता अजित पवार ने इस मसले पर सफाई देते हुए कहा कि कांग्रेस नेता यहां मौजूद नहीं थे और सुबह के वक्त हालात एकदम अलग थे. इसीलिए हमने राज्यपाल को पत्र भेजा और तीन दिन की मोहलत देने की मांग की.

एक और दिलचस्प बात ये है कि राष्ट्रपति शासन और कम समय देने के मसले पर शिवसेना और कांग्रेस मुखर होकर विरोध कर रही हैं. शिवसेना तो सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गई है और कांग्रेस कह रही है कि जिस तरीके से सरकार ने राष्ट्रपति शासन लागू किया है, वह लोकतंत्र का मजाक है. जबकि एनसीपी राष्ट्रपति शासन को राहत के तौर पर देख रही है. मंगलवार शाम अपने बयान में एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने ये कहा कि राष्ट्रपति शासन दोनों दलों (कांग्रेस और एनसीपी) को चर्चा करने के लिए एक राहत की तरह है. यहां तक कि शरद पवार ने यह भी कहा है कि शिवसेना तीन दिन की मांग कर रही थी, अब राज्यपाल ने उन्हें 6 महीने का वक्त दे दिया है.

यानी एक तरफ जहां शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी साथ सरकार बनाने की कोशिश कर रही हैं, वहीं राष्ट्रपति शासन लागू होने पर एनसीपी शिवसेना और कांग्रेस से अलग खड़ी नजर आ रही हैं.

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