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महाराष्ट्र में गडकरी बोले- क्रिकेट और राजनीति में सब संभव, गेम कब पलट जाए पता नहीं

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने महाराष्ट्र में जारी सियासी घटनाक्रम के बीच बड़ा बयान दिया है. गुरुवार को महाराष्ट्र पहुंचे नितिन गडकरी ने कहा कि क्रिकेट और राजनीति में कुछ भी संभव है.

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aajtak.in
aajtak.in मुंबई, 14 November 2019
महाराष्ट्र में गडकरी बोले- क्रिकेट और राजनीति में सब संभव, गेम कब पलट जाए पता नहीं नितिन गडकरी (फाइल फोटो)

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने महाराष्ट्र में जारी सियासी घटनाक्रम के बीच बड़ा बयान दिया है. गुरुवार को महाराष्ट्र पहुंचे नितिन गडकरी ने कहा कि क्रिकेट और राजनीति में कुछ भी संभव है. कभी आपको लगता है कि आप मैच हार रहे हैं, लेकिन परिणाम एकदम विपरीत हो जाता है.

उन्होंने कहा कि मैं अभी दिल्ली से आया हूं, मुझे महाराष्ट्र की राजनीति की पूरी जानकारी अभी नहीं है. वहीं केंद्रीय मंत्री से जब पूछा गया कि अगर महाराष्ट्र में गैर-बीजेपी सरकार बनती तो मुंबई में जारी परियोजनाओं का क्या होगा. इसके जवाब में उन्होंने कहा कि सरकार बदलती है, लेकिन परियोजनाएं जारी रहती हैं. मुझे इससे कोई समस्या नहीं है. सरकार किसी की भी बने हम सकारात्मक नीतियों का समर्थन करेंगे.

हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में बहुमत मिलने के बाद भी मुख्यमंत्री पद की दावेदारी को लेकर भाजपा-शिवसेना का गठबंधन टूट चुका है.

वहीं, महाराष्ट्र में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और शिवसेना के अलग होने के कारण विभाजित कांग्रेस और उसकी सहयोगी शरद पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) एक बार फिर एकजुट हो गई हैं. उनके लिए यह घटनाक्रम किसी वरदान से कम नहीं है. यही नहीं भाजपा की सहयोगी रही शिवसेना ने भी कांग्रेस और शिवसेना के साथ हाथ मिला लिया है.

तीन बैठकों से महाराष्ट्र में बदला सत्ता का खेल

पहली बैठक में कांग्रेस और एनसीपी के प्रदेश अध्यक्ष ने शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे से मुलाकात की. वहीं दूसरी बैठक में एनसीपी और कांग्रेस के नेता शामिल हुए. इस बैठक में एनसीपी से छगन भुजबल, नवाब मलिक और कांग्रेस की तरफ से पृथ्वीराज चौहान, विजय वडेत्तीवार, माणिक राव ठाकरे शामिल हुए. इसके बाद तीसरी बैठक में तीनों पार्टियों (एनसीपी, कांग्रेस और शिवसेना) के नेताओं ने बातचीत की.

एनसीपी कांग्रेस और शिवसेना की जो बैठक हुई हुई उससे संदेश गया है कि सरकार बनाने के लिए तीनों ही पार्टियां एक कदम और आगे बढ़ी हैं. ये बैठक साझा कार्यक्रम तय करने के लिए बुलाई गई थी.

साझा कार्यक्रम के 5 बड़े एजेंडे तय हो गए

> किसानों की कर्जमाफी

> फसल बीमा की समीक्षा

> न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ोतरी

> रोजगार निर्माण योजना

> शिवाजी और अंबेडकर की भव्य मूर्ति

दरअसल सोनिया गांधी चाहती हैं कि सरकार के एजेंडे में किसानों और नौजवानों को सबसे ऊपर रखा जाए. और इसपर सहमति भी बन गई है. हालांकि, साझा कार्यक्रम बनने के बाद भी सबसे बड़े मुद्दों पर असहमति लगातार बनी हुई है.

वो 5 मुद्दे जिनपर अटकी हुई है बात

> गठबंधन का मुख्यमंत्री कौन होगा?

> सीएम ढाई-ढाई साल या पांच साल?

> किस पार्टी के कितने मंत्री होंगे?

> मंत्रालय का बंटवारा कैसे होगा?

> विधानसभा अध्यक्ष किस पार्टी का?

> तीनों पार्टियों में तालमेल कैसे होगा?

जब तीनों ही दलों के प्रदेश अध्यक्ष और नेता विधायक दल सारे मुद्दों पर सहमत हो जाएंगे तब उसे तीनों दलों के अध्यक्षों के पास भेजा जाएगा. फिर शरद पवार, उद्धव ठाकरे और सोनिया गांधी मिलकर तय करेंगे कि शपथ की तैयारी कब करनी है और सरकार कैसे चलानी है.

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