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महाराष्ट्र में विपक्ष के 19 MLA 31 दिसंबर तक के लिए विधानसभा से सस्पेंड

महाराष्ट्र विधानसभा में बीते हफ्ते बजट पेश किए जाने के दौरान हंगामा करने के कारण विपक्षी दल कांग्रेस और एनसीपी के 19 विधायकों को सदन से नौ महीने के लिए निलंबित कर दिया गया.

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भाषा [Edited By : साद बिन उमर]मुंबई, 22 March 2017
महाराष्ट्र में विपक्ष के 19 MLA 31 दिसंबर तक के लिए विधानसभा से सस्पेंड महाराष्ट्र विधानसभा

महाराष्ट्र विधानसभा में बीते हफ्ते बजट पेश किए जाने के दौरान हंगामा करने के कारण विपक्षी दल कांग्रेस और एनसीपी के 19 विधायकों को सदन से नौ महीने के लिए निलंबित कर दिया गया. संसदीय मामलों के मंत्री गिरिश बापट ने इस संबंध में एक प्रस्ताव पेश किया और उसे विधानसभा ने स्वीकार कर लिया. इसके बाद कांग्रेस के 9 और एनसीपी के 10 सदस्यों को 31 दिसंबर तक सदन से निलंबित कर दिया गया.

बता दें कि विपक्षी सदस्यों ने किसानों का कर्ज माफ किए जाने की मांग को लेकर 18 मार्च को विधानसभा में वित्तमंत्री सुधीर मुनगंटीवार द्वारा बजट पेश किए जाने में बाधा पैदा की थी. बापट ने कहा कि विपक्षी विधायकों ने शर्मनाक और असंवैधानिक तरीके से व्यवहार किया. उन्होंने कहा कि हर किसी को अभिव्यक्ति का अधिकार है, लेकिन राज्य के बजट की प्रति को सदन के बाहर जलाने की घटना कभी नहीं हुई. उन्होंने कहा कि सदस्यों को बैनर दिखाने, झांझ बजाने, नारे लगाने और अध्यक्ष के निर्देशों का निरादर करने के लिए निलंबित किया गया है.

जिन विधायकों को निलंबित किया गया है, उनमें कांग्रेस के अमर काले, विजय वाडेतिवार, हर्षवर्द्धन सकपाल, अब्दुल सत्तार, डी पी सावंत, संग्राम थोप्टे, अमित जनक, कुणाल पाटिल, जयकुमार गोरे और एनसीपी के भास्कर जाधव, जितेंद्र अवहाद, मधुसूदन केंद्रे, संग्राम जगतप, अवधूत तटकरे, दीपक चव्हाण, दत्ता भरने, नरहरी जीरवल, वैभव पिचाड और राहुल जगतप शामिल हैं.

वहीं इस मामले पर विपक्ष के नेता राधाकृष्ण विखे पाटिल ने कहा कि सरकार सभी विपक्षी विधायकों को निलंबित कर सकती है लेकिन वे किसानों के मुद्दे उठाते रहेंगे. विखे पाटिल ने कहा कि विपक्ष तब तक कार्यवाही का बहिष्कार करेगा, जब तक निलंबन हटा नहीं दिया जाता.

इस बीच विपक्ष के सदस्यों की गैरमौजूदगी में 11 बजे प्रश्नकाल शुरू हुआ. बजट सत्र एक पखवाड़ा पहले शुरू हुआ था, तब से विधानसभा की कार्यवाही में किसानों की कर्ज माफी का मामला छाया हुआ है. विपक्ष पिछले कुछ वर्षों में लगातार सूखे और किसानों की आत्महत्या की घटनाएं बढ़ने के मद्देनजर किसानों के लिए राहत की मांग कर रहा है.

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