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MP: नसबंदी के लिए जारी फरमान पर शिवराज का सवाल- क्या ये कांग्रेस का इमरजेंसी पार्ट-2 है?

आदेश नसबंदी का लक्ष्य पूरा नहीं होने पर जारी किया गया. राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों को पुरूष नसबंदी के लक्ष्य पूरा ना करने पर वेतन में कटौती और अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने का आदेश दिया.

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aajtak.in नई दिल्ली, 21 February 2020
MP: नसबंदी के लिए जारी फरमान पर शिवराज का सवाल- क्या ये कांग्रेस का इमरजेंसी पार्ट-2 है? शिवराज सिंह चौहान (फाइल फोटो-आईएएनएस)

  • शिवराज सिंह चौहान ने कमलनाथ सरकार पर साधा निशाना
  • मध्य प्रदेश में अघोषित आपातकाल है: शिवराज सिंह चौहान

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कमलनाथ सरकार पर निशाना साधा है. शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट कर कहा है कि लक्ष्य पूरा नहीं होने पर वेतन रोकना और सेवानिवृत्त करने का फैसला तानाशाही है.

शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट करते हुए कहा, 'मध्य प्रदेश में अघोषित आपातकाल है. क्या ये कांग्रेस का इमरजेंसी पार्ट-2 है? एमपीएचडब्ल्यू (Male Multi Purpose Health Workers) के प्रयास में कमी हो, तो सरकार कार्रवाई करे, लेकिन लक्ष्य पूरे नहीं होने पर वेतन रोकना और सेवानिवृत्त करने का निर्णय, तानाशाही है.'

अपने ट्वीट के साथ ही शिवराज सिंह चौहान ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन का एक नोटिस भी पोस्ट किया है.

बता दें कि मध्य प्रदेश में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के एक आदेश से स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों की नींद उड़ी गई. यहां राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) ने नसबंदी को लेकर एक अजीबोगरीब फरमान जारी किया था. एनएचएम ने एमपी के स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को आदेश दिया कि कम से कम एक सदस्य की नसबंदी कराओ वरना उनको VRS दे दिया जाएगा.

यह भी पढ़ें: MP में स्वास्थ्यकर्मियों को फरमान- नसबंदी के लिए लोग लाओ वर्ना नौकरी गंवाओ

जानकारी के मुताबिक यह आदेश नसबंदी का लक्ष्य पूरा नहीं होने पर जारी किया गया. राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों को पुरूष नसबंदी के लक्ष्य पूरा ना करने पर वेतन में कटौती और अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने का आदेश दिया. इसके साथ ही आदेश में टारगेट पूरा ना करने पर नो पे, नो वर्क के आधार वेतन ना देने की बात कही गई.

यह भी पढ़ें: कमलनाथ ने फिर मांगा सर्जिकल स्ट्राइक का सबूत, पूछा- कितने मरे

दरअसल, परिवार नियोजन कार्यक्रम में कर्मचारियों के लिए पांच से दस पुरूषों की नसबंदी कराना अनिवार्य किया गया है. हालांकि अब मामले के तूल पकड़े जाने के बाद कमलनाथ सरकार ने वेतन रोकने और सेवानिवृत्त करने का अपना फैसला वापस ले लिया है.

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