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शिवराज के सामने अब कैबिनेट गठन बड़ी चुनौती, बागियों से कैसे निभा पाएंगे वादा?

मध्य प्रदेश की सत्ता पर 15 महीने के बाद एक बार फिर काबिज हुए शिवराज सिंह चौहान के सामने कैबिनेट गठन करना कम चुनौतीपूर्ण नहीं है. एक तरफ सिंधिया समर्थकों को जगह देने का वचन है तो दूसरी तरफ अपनों को तवज्जो देने की चुनौती है कि कहीं अपने ही बेगाने न हो जाएं. इसके अलावा निर्दलीय भी मंत्री पद की चाहत में हैं.

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aajtak.in
कुबूल अहमद नई दिल्ली, 25 March 2020
शिवराज के सामने अब कैबिनेट गठन बड़ी चुनौती, बागियों से कैसे निभा पाएंगे वादा? बीजेपी विधायक गोपाल भार्गव और सीएम शिवराज सिंह चौहान (PTI)

  • सिंधिया के 22 समर्थकों में कितने को मिलेगा मंत्री पद
  • निर्दलीय भी शिवराज कैबिनेट में जगह बनाने को बेताब

मध्य प्रदेश की सत्ता पर चौथी बार काबिज होते ही शिवराज सिंह चौहान ने विधानसभा में भले ही बहुमत आसानी से साबित कर दिया हो, लेकिन अपनी कैबिनेट का गठन करना भी एक बड़ी चुनौती है. शिवराज सरकार में मंत्री रह चुके पुराने दिग्गज विधायकों में से कई जोड़-तोड़ में सक्रिय हो गए हैं. वहीं कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया समर्थक भी अपने-अपने लिए गोटियां बिछा रहे हैं.

शिवराज सिंह चौहान के सामने कैबिनेट गठन करना आसान नहीं है. एक तरफ सिंधिया समर्थकों को जगह देने का वचन है तो दूसरी तरफ अपनों को तवज्जो देने की चुनौती है कि कहीं अपने ही बेगाने न हो जाएं. मध्य प्रदेश में कमलनाथ सरकार के गिरने की एक बड़ी वजह उन असंतुष्ट विधायकों को ना साध पाना भी रहा, जो मंत्री बनने की चाहत में थे. अब ऐसी ही परिस्थिति 15 महीने के बाद सत्ता में लौटे शिवराज सिंह चौहान के सामने भी है.

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मध्य प्रदेश विधानसभा में कुल 230 सीटें हैं. इस हिसाब से सरकार में मुख्यमंत्री सहित कुल 35 विधायक मंत्री बन सकते हैं. शिवराज की नई सरकार में सामाजिक समीकरण और क्षेत्रीय संतुलन साधने की कवायद होगी. क्षेत्रीय स्तर पर प्रदेश के सभी संभागों (मंडलों) से मंत्री बनाने के साथ सामाजिक समीकरण के स्तर पर क्षत्रिय, ब्राह्मण, पिछड़े, अनुसूचित जाति और आदिवासी समाज का प्रतिनिधित्व दिए जाने की संभावना है.

शिवराज सरकार में कितने बागी बनेंगे मंत्री

कमलनाथ सरकार के छह मंत्रियों समेत 22 विधायकों के इस्तीफा देने से ही मध्य प्रदेश में शिवराज को सरकार बनाने का अवसर मिला. इनमें प्रभुराम चौधरी, तुलसी सिलावट, इमरती देवी, गोविंद सिंह राजपूत, प्रद्युम्न सिंह तोमर और महेंद्र सिंह सिसोदिया मंत्री थे, जिन्होंने इस्तीफा देकर बीजेपी की सरकार तो बनवा दी. ऐसे में अब किए गए वादों को पूरा करने की बारी शिवराज सरकार और बीजेपी की है. इस लिहाज से शिवराज सरकार में भी इनका मंत्री बनना पूरी तरह से तय है.

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इसके अलावा कांग्रेस से बगावत करने वाले बिसाहूलाल सिंह, ऐंदल सिंह कंसाना, हरदीपसिंह डंग और राज्यवर्धन सिंह भी मंत्री पद के दावेदारों में शामिल हैं. इन नेताओं ने कमलनाथ सरकार से बगावत ही इसीलिए किया था, क्योंकि कमलनाथ ने इन्हें मंत्री नहीं बनाया था. ऐसे में इन्हें साधकर रखने के लिए शिवराज मंत्री पद का इनाम दे सकते हैं. हालांकि शिवराज कैबिनेट में मंत्रियों के चयन प्रक्रिया में ज्योतिरादित्य सिंधिया की अहम भूमिका होगी. बागियों में उन्हें ही मंत्री बनाया जाएगा, जिन पर सिंधिया मुहर लगाएंगे. ऐसे में अब देखना है कि 22 में से कितने नेताओं को मंत्री बनाया जाता है.

बीजेपी से मंत्री पद के प्रमुख दावेदार

मध्य प्रदेश में 15 महीनों से सत्ता से दूर बीजेपी में भी मंत्री पद के दावेदारों की फेहरिस्त अच्छी खासी लंबी है. कमलनाथ सरकार गिराने में बेहद अहम भूमिका निभाने वाले नरोत्तम मिश्रा का मंत्री बनना तय है. इसके अलावा पिछली शिवराज सरकार में मंत्री रहे नेताओं भी दौड़ में माने जा रहे हैं. नेता प्रतिपक्ष रहे गोपाल भार्गव, पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह, अरविंद सिंह भदौरिया, राजेंद्र शुक्ला, विश्वास सारंग, संजय पाठक, कमल पटेल, विजय शाह, हरिशंकर खटीक, गौरीशंकर बिसेन, अजय विश्नोई जैसे भाजपा के कई विधायक हैं, जिनके मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने के पूरी संभावना है.

निर्दलीय भी मंत्री बनने को बेताब

शिवराज सिंह चौहान को सपा, बसपा और निर्दलीय विधायकों का भी समर्थन हासिल है. यही वजह है कि निर्दलीय विधायकों ने भी मंत्री पद के लिए अपने-अपने समीकरण सेट करने शुरू कर दिए हैं. प्रदीप जायसवाल तो पहले ही बीजेपी सरकार में शामिल होने की बात कहकर माहौल गर्मा रखा है. बसपा और सपा के सदस्य भी दावेदारी में पीछे नहीं हैं. इसके अलावा अन्य निर्दलीय विधायक भी जुगाड़ लगाने में जुट गए हैं, जिनमें ठाकुर सुरेंद्र सिंह नवल सिंह (शेरा भैया) भी शामिल हैं.

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