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MP हनी ट्रैप: स्टेटस रिपोर्ट पर HC की नाराजगी, इंदौर बेंच करेगी जांच की निगरानी

मध्य प्रदेश हनी ट्रैप मामले में चल रही जांच की निगरानी हाई कोर्ट की इंदौर बेंच करेगी. हाई कोर्ट ने राज्य सरकार की स्टेटस रिपोर्ट पर नाराजगी जताई है.  

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aajtak.in
रवीश पाल सिंह भोपाल, 21 October 2019
MP हनी ट्रैप: स्टेटस रिपोर्ट पर HC की नाराजगी, इंदौर बेंच करेगी जांच की निगरानी हाई कोर्ट की इंदौर बेंच करेगी हनी ट्रैप मामले की निगरानी

  • हनी ट्रैप मामले की निगरानी हाई कोर्ट की इंदौर बेंच करेगी
  • इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को भेजा जाएगा फॉरेंसिक लैब

मध्य प्रदेश हनी ट्रैप मामले में चल रही जांच की निगरानी हाई कोर्ट की इंदौर बेंच करेगी. हाई कोर्ट ने एडीजी राजेंद्र कुमार को आदेश दिया कि आरोपियों के पास से मिले सभी इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य को हैदराबाद स्थित फॉरेंसिक लैब में भेजा जाए.

हाई कोर्ट ने राज्य सरकार की स्टेटस रिपोर्ट पर नाराजगी जताई है. हाई कोर्ट ने कहा कि बिना कोर्ट की अनुमति के जांच अधिकारी का तबादला नहीं किया जाएगा.

हाई प्रोफाइल हनी ट्रैप और जबरन वसूली मामले में भोपाल के कई पत्रकारों के नाम उभरकर सामने आए थे. मामले में कथित भूमिका वाले पत्रकारों में हिंदी समाचार पत्र का एक रेजिडेंट एडिटर, न्यूज चैनल का एक कैमरामैन और क्षेत्रीय सैटेलाइट टीवी चैनल का मालिक शामिल थे.

एसआईटी के मुताबिक अगर सबूतों में पाया गया कि नौकरशाहों ने सेक्स स्कैंडल के सरगनाओं की बात मानने के लिए अपने पद का दुरोपयोग किया है कि उनके खिलाफ मामला दर्ज किया जाएगा. सबसे महत्वपूर्ण कामों में नौकरशाहों और नेताओं द्वारा सेक्स-स्कैंडल के सरगना को आवंटित ठेकों का पता लगाना है.

सरकारी पदों के दुरुपयोग की पुष्टि होने के बाद अधिकारियों और नेताओं के खिलाफ भ्रष्टाचार रोकथाम अधिनियम के तहत मामले दर्ज किए जाएंगे.

मध्य प्रदेश के बहुचर्चित हनीट्रैप केस में एसआईटी चीफ को बदल दिया गया था. अब राजेंद्र कुमार को एसआईटी प्रमुख बनाया गया था. डीजीपी पर सवाल उठाने वाले साइबर सेल के डीजीपी का भी तबादला कर दिया गया था. नई टीम में मिलिंद कंसकर और रुचि वर्धन को सदस्य बनाया गया था. संजीव शमी को हनी ट्रैप मामले की जांच करने की जिम्मेदारी दी गई थी लेकिन उन्हें एसआईटी प्रमुख के पद से हटा दिया गया.

क्या है मामला?

भोपाल पुलिस ने 24 सितंबर को दो युवतियों और दो युवकों को गिरफ्तार किया था. दोनों युवतियां कॉलगर्ल्स थीं जो पहले ग्राहक के साथ जाकर एक रात के 10-15 हजार रुपये लेती थीं. इसके बाद गिरोह के पुरुष सदस्य उन्हीं ग्राहकों को फोन कर उन्हें रेप के मुकदमे का डर दिखाकर उनसे लाखों की रकम वसूलते थे. इस ट्रैप में नेताओं, पुलिस अधिकारियों पत्रकारों के साथ-साथ प्रशासनिक अधिकारियों के नाम भी सामने आए थे.

(IANS इनपुट के साथ)

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