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मध्य प्रदेशः क्या उपचुनाव में प्रशांत किशोर लगाएंगे कांग्रेस की नैय्या पार

मध्य प्रदेश में कमलनाथ सरकार गिरने के बाद 24 सीटों पर उपचुनाव होने हैं. हालांकि इनकी तारीखों की घोषणा अब तक नहीं हुई है, लेकिन दोनों पार्टियां इसकी तैयारी में जुट गई हैं.

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aajtak.in
रवीश पाल सिंह भोपाल, 03 June 2020
मध्य प्रदेशः क्या उपचुनाव में प्रशांत किशोर लगाएंगे कांग्रेस की नैय्या पार प्रशांत किशोर (फाइल फोटो)

  • मध्य प्रदेश में 24 सीटों पर उपचुनाव होने हैं
  • महज डेढ़ साल चली थी कमलनाथ सरकार

मध्य प्रदेश में 15 साल बाद मुश्किल से मिली सत्ता को महज डेढ़ साल में गंवाने वाली कांग्रेस ने आगामी उपचुनाव में बीजेपी से बदला लेने के लिए प्रशांत किशोर की सेवा लेने का मन बना लिया है.

कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने आजतक से बात करते हुए कहा, 'प्रशांत किशोर आईटी के साथ ही नेशनल और इंटरनेशनल लेवल पर जाना पहचाना नाम हैं और बिहार में दूसरी पार्टी ने भी उनका साथ लिया था और बीजेपी भी कई बार उनकी मदद ले चुकी है. फील्ड पर तो नेता और कार्यकर्ता होते हैं, लेकिन आज सोशल मीडिया का समय है और सोशल मीडिया पर जो आइडिया आते हैं, इनके पास हर वो आइडिया है. इसलिए उपचुनाव में हम इनकी काबिलियत का इस्तेमाल करेंगे.'

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वहीं, उपचुनाव में कांग्रेस की रणनीति का काम प्रशांत किशोर को देने की खबरों पर मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने तंज कसते हुए कहा, 'कांग्रेस एक धक्कापेल गाड़ी बन गई है. सेल्फ स्टार्ट इस गाड़ी में है ही नहीं तो गाड़ी को धक्का देकर स्टार्ट करने कोई तो आएगा.'

चुनावी मैनेजमेंट के मास्टरमाइंड माने जाते हैं

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, सीएम अरविंद केजरीवाल, नीतीश कुमार के चुनावी मैनेजमेंट की बागडोर संभाल चुके प्रशांत किशोर को चुनावी रणनीति का मास्टरमाइंड कहा जाता है. 2014 लोकसभा चुनाव में चाय पर चर्चा का कॉन्सेप्ट बीजेपी को प्रशांत किशोर ने ही दिया था.

क्यों हो रहे हैं उपचुनाव

मध्य प्रदेश में कमलनाथ सरकार गिरने के बाद 24 सीटों पर उपचुनाव होने हैं. हालांकि इनकी तारीखों की घोषणा अब तक नहीं हुई है, लेकिन दोनों पार्टियां इसकी तैयारी में जुट गई हैं. 24 में से 22 सीटें तब खाली हुईं जब ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीजेपी में जाने के बाद कांग्रेस के 22 विधायकों ने विधानसभा से इस्तीफा दे दिया था और कमलनाथ सरकार गिर गई थी. वहीं, 2 सीटें विधायकों के निधन के बाद खाली हुई थीं.

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