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MP: पुजारियों की रोजी-रोटी पर संकट, कांग्रेस बोली- एक जून से खुलें मंदिर

कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए लगाए गए लॉकडाउन की वजह से लोग घरों में कैद हो गए हैं, जिसका लोगों की आस्था के केंद्र यानी मंदिरों पर भी इसका असर पड़ा है. लॉकडाउन के चलते भक्त मंदिर नहीं जा पा रहे हैं और न ही कोई धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन हो रहा है.

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रवीश पाल सिंह उज्जैन/खंडवा, 31 May 2020
MP: पुजारियों की रोजी-रोटी पर संकट, कांग्रेस बोली- एक जून से खुलें मंदिर सांकेतिक तस्वीर (PTI)

  • केंद्र ने 8 जून से दी मंदिरों को खोलने की इजाजत
  • महाकालेश्वर मंदिर की आय में आई भारी कमी
  • मंदिरों में पुजारियों की संख्या करीब 20 लाख

लॉकडाउन से जहां एक तरफ अर्थव्यवस्था को लेकर बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है, तो दूसरी तरफ मंदिरों के पुजारियों के सामने रोजी-रोटी का संकट आ गया है. लॉकडाउन में श्रद्धालुओं के मंदिर न आने से दान पेटियां खाली हो गई हैं और मंदिर समिति परेशान हैं. अब केंद्र सरकार ने 8 जून से मंदिरों को खोलने के लिए गाइडलाइंस जारी कर दी है, लेकिन मध्य प्रदेश में कांग्रेस मांग कर रही है कि मंदिरों को एक जून से खोला जाए.

कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए लगाए गए लॉकडाउन की वजह से लोग घरों में कैद हो गए हैं, जिसका लोगों की आस्था के केंद्र यानी मंदिरों पर भी इसका असर पड़ा है. लॉकडाउन के चलते भक्त मंदिर नहीं जा पा रहे हैं और न ही कोई धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन हो रहा है. इसका असर मध्य प्रदेश के दो सबसे बड़े मंदिर और लोगों की आस्था के बड़े केंद्र उज्जैन के महाकालेश्वर और खंडवा के ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग में साफ देखा जा रहा है. लॉकडाउन के चलते महाकाल इन दिनों गर्भगृह में अकेले हैं.

इससे पहले महाकालेश्वर मंदिर में काफी संख्या में श्रद्धालु आते थे और पैर रखने की जगह नहीं होती थी, लेकिन लॉकडाउन के चलते हालात बदल गए हैं. कुछ यही हाल नर्मदा नदी के किनारे बसे ओंकारेश्वर मंदिर का भी है, जहां सन्नाटा पसरा हुआ है. बीते 2 महीने से मंदिर बंद होने से न तो श्रद्धालु आ रहे हैं और न ही चढ़ावा आ रहा है. इससे मंदिर की आय में भारी कमी आई है.

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लॉकडाउन के पहले उज्जैन में एक महीने में करीब एक लाख 50 हजार श्रद्धालु भगवान महाकाल के दर्शन करने आते थे. महीने भर में महाकाल मंदिर को दान-चढ़ावे से ही करीब दो करोड़ रुपये की आय होती थी. वहीं, मंदिर में काम करने वाले करीब 650 लोगों के स्टाफ पर हर महीने करीब एक करोड़ रुपये खर्च होते हैं.

इसी तरह खंडवा जिले में स्थित ओंकारेश्वर मंदिर में अप्रैल और मई महीने में करीब एक करोड़ रुपये का दान और चढ़ावा आया था. इसमें अब करीब 50 से 60 लाख रुपये की गिरावट दर्ज की गई है. मंदिर स्टाफ की सैलरी और मंदिर के रखरखाव पर हर महीने करीब 35 लाख रुपये खर्च होते हैं.

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इन दो मंदिरों के अलावा सतना के मैहर और इंदौर के खजराना मंदिर की आय भी लॉकडाउन के चलते कम हुई है. मध्य प्रदेश के अलग-अलग मठ और मंदिरों में कुल पंडे-पुजारियों की संख्या करीब 20 लाख है. लॉकडाउन के दौरान मध्य प्रदेश सरकार ने मंदिरों के लिए करीब 8 करोड़ रुपये जारी किए हैं, ताकि पुजारियों को तनख्वाह दी जा सके.

कांग्रेस ने कहा- मंदिरों में दान के नुकसान की भरपाई करे केंद्र

केंद्र सरकार ने 8 जून से धर्मस्थलों को खोलने की गाइडलाइंस जारी की है, लेकिन लगातार मंदिरों की आय को हो रहे नुकसान और पुजारियों की रोजी-रोटी पर आए संकट को देखते हुए कांग्रेस ने इसे राजनीतिक मुद्दा बना लिया है. मध्य प्रदेश के पूर्व धर्मस्व और अध्यात्म मंत्री पीसी शर्मा ने आजतक से खास बातचीत के दौरान मांग की कि सूबे में मंदिरों को एक जून से खोला जाए और 2 महीने में हुए दान के नुकसान की भरपाई केंद्र सरकार करे.

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