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BJP विधायक प्रहलाद लोधी को HC से बड़ी राहत, सजा पर 2 महीने के लिए लगाई रोक

प्रहलाद लोधी ने विशेष कोर्ट के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी जिसपर गुरुवार को सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट में लोधी को राहत देते हुए सजा पर 7 जनवरी 2020 तक लिए रोक लगा दी है.

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aajtak.in
रवीश पाल सिंह नई दिल्ली, 07 November 2019
BJP विधायक प्रहलाद लोधी को HC से बड़ी राहत, सजा पर 2 महीने के लिए लगाई रोक बीजेपी विधायक प्रह्लाद लोधी

  • तहसीलदार से पिटाई के मामले में स्पेशल कोर्ट ने माना था दोषी
  • जबलपुर हाई कोर्ट ने 7 जनवरी 2020 तक के लिए लगा दी रोक

मध्यप्रदेश विधानसभा से हाल ही में सदस्यता गंवा चुके पवई से बीजेपी विधायक प्रहलाद लोधी को बड़ी राहत मिली है. जबलपुर हाई कोर्ट ने लोधी की सजा पर 2 महीने तक रोक लगा दी है.

दरअसल, तहसीलदार से पिटाई के एक पुराने मामले में प्रहलाद लोधी को जनप्रतिनिधियों के लिए भोपाल में बनी स्पेशल कोर्ट ने दोषी मानते हुए 2 साल की सजा सुनाई थी. हालांकि लोधी को जमानत मिल गयी थी. लेकिन सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के तहत मध्यप्रदेश विधानसभा के स्पीकर एनपी प्रजापति ने सदन में एक पद रिक्त होने की सूचना चुनाव आयोग को भेज दी थी और विधानसभा से प्रहलाद लोधी की सदस्यता रद्द हो गई थी.

7 जनवरी 2020 तक मिली राहत

प्रहलाद लोधी ने विशेष कोर्ट के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी जिसपर गुरुवार को सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट में लोधी को राहत देते हुए सजा पर 7 जनवरी 2020 तक लिए रोक लगा दी है. वहीं हाई कोर्ट से पवई से बीजेपी विधायक प्रहलाद लोधी को राहत देने के मामले पर बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह का बयान भी सामने आया है.

हाई कोर्ट के फैसले के बाद भोपाल में पत्रकारों से बात करते हुए राकेश सिंह ने कहा, 'बीजेपी विधायक प्रहलाद लोधी की सदस्यता खत्म करने का फैसला राजनैतिक द्वेष से लिया गया था. अपने बहुत के लिए कांग्रेस ने फायदा उठाया था.' राकेश सिंह ने कहा, 'विधानसभा के अध्यक्ष के द्वारा जिस तरह से जल्दबाजी में, जिस हड़बड़ी में सदस्यता समाप्त की थी उसके द्वारा ना सिर्फ मध्य प्रदेश में बल्कि देश में यह संदेश गया था कि किस तरह से राजनीतिक द्वेष में समाप्त की.'

उन्होंने कहा, 'बगैर राज्यपाल और बगैर उच्च न्यायालय की अनुमति के मध्यप्रदेश विधानसभा अध्यक्ष ने जल्दबाजी में आनन-फानन में उनकी सदस्यता समाप्त करने की घोषणा कर दी. उस समय तब भी हमने कहा था कि मध्यप्रदेश विधानसभा कि हमारे मन में गरिमा और सम्मान है. लेकिन इस तरह से निर्णय नहीं लिया जाते.'

निर्णय दुर्भाग्यपूर्ण

आगे उनका कहना है कि इस निर्णय ने यह साबित कर दिया है कि मध्यप्रदेश में कमलनाथ की सरकार बहुमत में आए इसके लिए कांग्रेस किसी भी स्थिति में किसी भी कीमत पर जाने के लिए तैयार है. इसके लिए उन्होंने टूल के रूप में मध्यप्रदेश विधानसभा अध्यक्ष का उपयोग किया जो कि दुर्भाग्यपूर्ण है.

वहीं मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के आज के आदेश ने यह साबित कर दिया कि मध्यप्रदेश विधानसभा अध्यक्ष के द्वारा लिया गया निर्णय पूर्णता द्वेष कुंठा अपरिपक्व था और राजनीतिक था. हम आभारी हैं माननीय उच्च न्यायालय के कि हमको वहां से न्याय प्राप्त हुआ.

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