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खिसकती जमीन से नक्सली बेहाल, 29 मई को बुलाया झारखंड बंद

नक्सलियों ने चेतावनी देते हुए कहा है कि आदिवासियों के हितों से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा. पोस्टर में जनता से सहयोगी की भी अपील की गई है. दरअसल घटते जनाधार की वजह से नक्सली काफी परेशान हैं.

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धरमबीर सिन्हा [Edited by: नंदलाल शर्मा]रांची, 28 May 2017
खिसकती जमीन से नक्सली बेहाल, 29 मई को बुलाया झारखंड बंद फाइल फोटो

सीएनटी-एसपीटी एक्ट में संशोधन और आदिवासी जमीन के सरकारी अधिग्रहण के विरोध में नक्सलियों ने 29 मई को 24 घंटे का झारखंड बंद बुलाया है. ग्रामीण इलाकों में चिपकाए गए पोस्टरों में कहा गया है कि इस दौरान आवश्यक सेवाओं को छोड़कर किसी भी दूसरी वाहनों के चलने पर रोक रहेगी.

नक्सलियों ने चेतावनी देते हुए कहा है कि आदिवासियों के हितों से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा. पोस्टर में जनता से सहयोगी की भी अपील की गई है. दरअसल घटते जनाधार की वजह से नक्सली काफी परेशान हैं.

ऐसे में एक बार फिर से जनता के बीच पैठ बनाने के लिए वे आदिवासियों से सम्बंधित मुद्दों पर बंद बुलाते रहते है. वैसे बंद के आह्वान को देखते हुए राज्य में खासकर राजमार्गों पर गहन चौकसी बरती जा रही है. पुलिस प्रशासन मामले पर नजर बनाए हैं.

बंद के सहारे संगठन में जान फूंकने की कोशिश
हाल के दिनों में माओवादियों के कई शीर्ष कमांडरों ने या तो सुरक्षाबलों के सामने आत्म-समर्पण कर दिया है या फिर वे मुठभेड़ में मारे गए हैं. वहीं संगठन के कई शीर्ष नेताओं के घरों की कुर्की जब्ती भी हुई है, जिससे यह पता चलता है कि इनका परिवार बेहद रईसी में रह रहा है.

ऐसे में लोगों का इन संगठनों से मोहभंग होने लगा है. इसकी वजह से माओवादी और नक्सली काफी परेशान हैं.

हाल के दिनों में नक्सलवाद पर केंद्र ने भी सख्ती के साथ पेश आना शुरू कर दिया है. नक्सलवाद को जड़ से खत्म करने के लिए कई अहम फैसले भी लिए हैं. इसमें हेलिकॉप्टर और ड्रोन का उपयोग करना मुख्य है. साथ ही नक्सल ऑपरेशन के लिए राज्यों के बीच एकीकृत कमान को और मजबूत बनाने की बात शामिल है.

25 से 31 मई तक माओवादियों का शहीदी सप्ताह
दरअसल माओवादी अपने मारे गए साथियों की याद में हर साल 25 से 31 मई तक शहीदी सप्ताह मनाते हैं. इस दौरान घने जंगलो के बीच उनकी सभा होती है और मारे गए कामरेड्स को श्रद्धांजलि दी जाती है. वहीं सुरक्षाबल के जवान भी इस दौरान काफी मुस्तैद रहते हैं क्यूंकि इन दिनों घातक हमले की संभावना अधिक होती है.

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