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झारखंड में 24 घंटों से मूसलाधार बारिश, पानी बचाने की कोशिश में सरकार

झारखंड में बीते 24 घंटों से मूसलाधार बारिश हो रही है. हर साल यहां तकरीबन 1200 से 1400 मिमी वर्षा होती है जो राज्य की ज़रूरतों के लिए काफी है. लेकिन दुर्भाग्य है कि इसका 92% हिस्सा हर साल बर्बाद हो जाता है.

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aajtak.in
aajtak.in रांची, 03 July 2019
झारखंड में 24 घंटों से मूसलाधार बारिश, पानी बचाने की कोशिश में सरकार झारखंड में बीते 24 घंटों से झमाझम बारिश हो रही है.(प्रतीकात्मक फोटो)

देश  के कुछ राज्य सूखे की मार झेल रहे हैं तो कुछ राज्यों में झमाझम बारिश हो रही है. उत्तर भारत से  मॉनसून यूं तो अभी दूरी बनाए हुए है. लेकिन झारखंड में बीते 24 घंटों से मूसलाधार बारिश हो रही है. हर साल यहां तकरीबन 1200 से 1400 मिमी वर्षा  होती है. जो राज्य की ज़रूरतों के लिए काफी है लेकिन दुर्भाग्य है कि इसका 92% हिस्सा हर साल  बर्बाद हो जाता है.

 देश भर में बारिश साल दर साल औसत स्तर से कम होती जा रही है. प्राकृतिक जलाशय भी सूखने की कगार पर है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार 2020 तक देश के कुछ शहरों में पीने योग्य पानी नहीं मिलेगा. यही सही समय है चिंतन-मनन करने का कि किस प्रकार पानी का कम से कम उपयोग कर हम जल आपूर्ति करें ताकि आने वाली नस्लों को पर्याप्त पानी मिल सके.

लिहाज़ा मॉनसून से पहले पानी की हर बूंद को बचाने को लेकर प्रधानमंत्री के आह्वान पर राज्य सरकार ने भी कदम उठाए हैं. जिसके तहत हर सरकारी बिल्डिंग पर रेन वॉटर हार्वेस्टिंग के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने समेत कई शुरुआत सरकार ने की हैं.

झारखंड में मॉनसून का आगाज़ हो चुका है. यही सही वक्त होता है जल संचयन का. प्रधानमंत्री ने अपने रेडियो कार्यक्रम मन की बात में पानी की हर बूंद को बचाने का आह्वान किया था. ऐसे में केंद्र की सोच को हकीकत में उतारने में आगे झारखंड सरकार ने हर सरकारी बिल्डिंग पर रेन वॉटर हार्वेस्टिंग के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने के निर्देश दिए हैं. इस कड़ी में सरकार ने एक वेब पोर्टल भी लांच किया है जिसमें उन लोगों से सुझाव आमंत्रित किए गए हैं जो अपने घरों में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग करते आए हैं. सरकार उसे गुड न्यूज के तौर पर शेयर करेगी.

रांची के टी.एन. मिश्रा 7 सालों से रेन वॉटर हार्वेस्टिंग के ज़रिए जल संचयन करते आए हैं. इन्हें देखकर पानी का अभाव झेल चुके मोहल्ले के कई लोगों ने भी रेन वॉटर हार्वेस्टिंग तकनीक को अपनाया है. साल दर साल वर्षा का 92% जल बर्बाद हो जाता है. ऐसा इसलिए क्योंकि लगातार बारिश के बावजूद भी किसानों को जल संचयन का एक-आध तरीका ही मालूम है, जो पर्याप्त नहीं है. इसलिए इस तकनीक को जन-जन तक ले जाना ही सबसे बड़ी चुनौती है.

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मुख्य सचिव ने राज्य के तमाम सरकारी भवनों में वॉटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर बनाने का निर्देश देते हुए कहा कि इसकी शुरुआत समाहरणालय भवन से करें. साथ ही जल शक्ति अभियान को शहर से लेकर गांव तक पहुंचाने की महत्ता बताते हुए उन्होंने इसके लिए हर वर्ग और संस्थान को जोड़ने पर बल दिया. लाभदायक सुझावों और जलाशयों तक वर्षा जल सुचारु रुप से पहुंचे इसकी व्यवस्था करने का भी निर्देश दिया.

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