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झारखंड: सीट शेयरिंग को लेकर फंसा पेंच, महागठबंधन कहीं हो न जाए खंड-खंड

झारखंड में विधानसभा चुनाव के लिए महागठबंधन के बीच सीट शेयरिंग के फॉर्मूले पर अब तक सहमति नहीं बन पाई है. झारखंड मुक्ति मोर्चा ने आधी से ज्यादा विधानसभा सीटों पर दावेदारी करके कांग्रेस सहित बाकी सहयोगी दलों की बेचैनी बढ़ा दी है.

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aajtak.in
कुबूल अहमद नई दिल्ली, 18 July 2019
झारखंड: सीट शेयरिंग को लेकर फंसा पेंच, महागठबंधन कहीं हो न जाए खंड-खंड झारखंड में महागठबंधन के नेता (फोटो-PTI)

झारखंड में विधानसभा चुनाव की बिसात बिछाई जाने लगी है. बीजेपी पूरी तरह से कमर कसकर मैदान में उतर चुकी है. जबकि महागठबंधन के बीच सीट शेयरिंग के फॉर्मूले पर अभी तक सहमति नहीं बन पाई है. झारखंड मुक्ति मोर्चा ने आधी से ज्यादा विधानसभा सीटों पर दावेदारी करके कांग्रेस सहित बाकी सहयोगी दलों की बेचैनी बढ़ा दी है.

झारखंड की कुल 82 विधानसभा सीटें हैं, जिनमें से 81 पर चुनाव होते हैं और एक सदस्य को मनोनीत किया जाता है. जेएमएम 41 सीटें मांग रहा है. इस तरह से बाकी बची 40 विधानसभा सीटों से ही विपक्षी दलों को संतोष करना पड़ेगा. इसमें कांग्रेस, जेएमएम, आरजेडी और वामदलों को आपस में सींटे बांटनी पड़ेंगी.

झारखंड में कांग्रेस 25 सीटें मांग रही है. इसके अलावा बाबूलाल मरांडी के नेतृत्व वाली झारखंड विकास मोर्च की दावेदारी भी कम से 15 सीटों की है. ऐसे में आरजेडी सहित वामदलों के लिए सीटों की गुंजाइश नहीं बच रही है. यही वजह है कि जेएमएम ने बाकी सहयोगी दलों की बेचैनी बढ़ा दी है.

जेएमएम के नेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पिछले विधानसभा चुनाव में हमारी पार्टी का प्रदर्शन बाकी सहयोगी दलों से बेहतर था. हम अकेले लड़कर भी 25 सीटें जीतने में कामयाब रहे थे. वहीं, कांग्रेस नेता प्रदीप बलमुचू ने कहा कि विधानसभा सीटों को लेकर अभी कुछ तय नहीं हुआ है. अभी हम पहले अपने कांग्रेस को प्रदेश में मजबूत करने में लगे हैं. लोकसभा में हार के कारणों को पता कर रहे हैं.

दरअसल 10 जुलाई को जेएमएम के अध्यक्ष हेमंत सोरेन के नेतृत्व में विपक्षी दलों की बैठक हुई थी, जिसमें तय हुआ था कि जीती हुई सीटों को कोई भी पार्टी नहीं छोड़ेगी. हालांकि बची हुई सीटों पर किसी तरह की कोई सहमति नहीं बन सकी थी. इस मुद्दे पर अभी तक यह तय नहीं हो सका है कि जेएमएम के टिकट पर जीते उन छह विधायकों की सीटें किसे मिलेगी जो बाद में बीजेपी में शामिल हो गए थे.

पिछले विधानसभा चुनाव में राजद का भी खाता नहीं खुल पाया था. वामदलों की हिस्सेदारी भी नगण्य रह गई थी. जबकि मासस से एक और भाकपा (माले) से एक विधायक जीतकर विधानसभा पहुंच पाए थे. वामदलों के कुनबे में भाकपा, माकपा, फारवर्ड ब्लॉक आदि दल शामिल हैं.

लोकसभा चुनाव में गठबंधन के बावजूद आरजेडी ने सिर्फ चतरा सीट से कैंडिडेट उतारा था. काफी मशक्कत के बाद भी आरजेडी ने अपने प्रत्याशी को नहीं बिठाया था. वहीं, लोकसभा चुनाव के दौरान वामदलों को गठबंधन से बाहर रखा गया था.

इस बार भी महागठबंधन में शामिल होने को लेकर वामदल ज्यादा उतावले नहीं दिखते. यही वजह है कि हेमंत सोरेन के यहां हुई बैठक में सिर्फ मासस और फारवर्ड ब्लॉक के नेताओं ने शिरकत की थी. सीपीआई, सीपीएम और भाकपा (माले) आदि ने बैठक से दूरी बनाए रखी थी.

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