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J-K: बुरहान वानी की बरसी से पहले घाटी में तनाव, CRPF पर ग्रेनेड से हमला

जानकारी के मुताबिक, श्रीनगर से सटे बडगाम जिले के हैदरपोरा इलाके में आतंकियों ने सीआरपीएफ पार्टी पर ग्रेनेड से हमला किया है. बता दें, घाटी में हालात दिन पर दिन बिगड़ते ही जा रहे हैं.

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aajtak.in
रणविजय सिंह नई दिल्ली, 07 July 2018
J-K: बुरहान वानी की बरसी से पहले घाटी में तनाव, CRPF पर ग्रेनेड से हमला हैदरपोरा में आतंकियों ने सीआरपीएफ पार्टी पर ग्रेनेड से किया हमला

जम्मू-कश्मीर के बडगाम में आतंकियों ने सीआरपीएफ पार्टी पर ग्रेनेड से हमला कर दिया. इस हमले में एक सीआरपीएफ जवान घायल है, जिसे अस्‍पताल में भर्ती कराया गया है. सीआरपीएफ इलाके की घेराबंदी करके आतंकियों को खोजने के लिए सर्च ऑपरेशन चला रही है.    

जानकारी के मुताबिक, श्रीनगर से सटे बडगाम जिले के हैदरपोरा इलाके में आतंकियों ने सीआरपीएफ पार्टी पर ग्रेनेड से हमला किया है. बता दें, घाटी में हालात दिन पर दिन बिगड़ते ही जा रहे हैं. जम्मू-कश्मीर में कुलगाम जिले के खुदवाणी इलाके में शनिवार की सुबह सेना के सर्च ऑपरेशन के दौरान पत्थरबाजों ने हंगामा कर दिया. हालांकि, सेना ने जब उन्हें हटाने की कोशिश की तो पत्थरबाजों ने सेना के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. इस दौरान दोनों के बीच झड़प हुई और इसमें तीन नागरिकों की मौत हो गई.

मृतकों में एक नाबालिग लड़की भी शामिल है. वहीं, इस झड़प में 3 जवान समेत 13 से ज्यादा लोग घायल हो गए. बता दें कि हिंसक झड़प के बाद कुलगाम और अनंतनाग में इंटरनेट सेवा बंद कर दिया गया है.

बुरहान वानी की दूसरी बरसी पर बंद का आह्वान

सेना और पत्थरबाजों के बीच ये झड़प आतंकी बुरहान वानी की दूसरी बरसी से पहले बुलाए गए बंद के दौरान हुई. हिज्बुल मुजाहिदीन के कमांडर बुरहान वानी की दूसरी बरसी पर जम्मू कश्मीर में अलगाववादियों ने बंद का आह्वान किया है. आतंकी वानी 8 जुलाई, 2016 को दक्षिण कश्मीर में अनंतनाग जिले के कोकरनाग में सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में मारा गया था. उसके मारे जाने के बाद घाटी में लंबे समय तक प्रदर्शन हुआ था.

रविवार को रवाना होने वाली अमरनाथ यात्रा पर रोक

सुरक्षा के मद्देनजर सेना ने पुलवामा और त्राल समेत कई इलाकों में कर्फ्यू लगा दिया है. बंद के दौरान किसी भी अनहोनी से बचने के लिए रविवार को रवाना होने वाली अमरनाथ यात्रा पर रोक लगा दी गई है. जम्मू कश्मीर के डीजीपी डॉ. एसपी वैद ने इस बात की जानकारी दी है. उन्होंने कहा कि रविवार को आतंकी बुरहान वानी की बरसी पर कश्मीर बंद का आह्वान किया गया है, जिसके कारण सुरक्षा के मद्देनजर रविवार को अमरनाथ यात्रा पर रोक लगा दी गई है. इससे करीब 1000 की संख्या में अमरनाथ यात्रियों को कठुआ में रुकना पड़ा है. वहीं, 15000 हजार से ज्यादा यात्रियों को जम्मू, उधमपुर और रामबाण जिले में रोका गया है.

नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता के घर आतंकियों ने फेंका था ग्रेनेड

इससे पहले शुक्रवार को जम्‍मू कश्‍मीर के ट्राल में आतंकियों ने नेशनल कांफ्रेंस के नेता मोहम्‍मद अशरफ भट के आवास पर ग्रेनेड से हमला किया. इस हमले में कोई घायल नहीं हुआ. वर्ष 2014 में नेशनल कांफ्रेंस के टिकट पर त्राल विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ चुके मोहम्मद अशरफ भट के पिता मोहम्मद सुभान भट, भाई फैयाज अहमद व शौकत अहमद आतंकी हमलों में मारे गए हैं.

पुलिसकर्मी जावेद की अगवा कर हत्‍या

वहीं, गुरुवार शाम को ही आतंकियों ने शोपियां से पुलिसकर्मी जावेद अहमद डार को अगवा किया था, जिसके बाद उनका शव कुलगाम से मिला. डार की हत्या की जिम्मेदारी हिज्बुल मुजाहिद्दीन ने ली है. गौरतलब है कि चंद दिनों पहले ही आतंकियों ने सेना के जवान औरंगजेब की अगवा कर हत्या कर दी थी.  

अमरनाथ यात्रा की वजह से मुस्तैद हैं एजेंसियां

आपको बता दें कि अमरनाथ यात्रा की वजह से जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह से मुस्तैद हैं. खुफिया सूचना में कहा गया है कि पाकिस्तान का लश्कर-ए-तैयबा ने पवित्र गुफा की तरफ जाने वाले रास्ते में पड़ने वाले पिस्सू टॉप और शेशांग पर हमले की ताक में बैठा हुआ है. यह दोनों स्थान रणनीतिक लिहाज से बेहद संवेदनशील माने जाते हैं. सुरक्षा को देखते हुए एजेंसियों ने कई तरह की तैयारियां की हैं, ताकि किसी भी परिस्थिति से निपटा जा सके.

तीन आयामों पर काम कर रहीं एजेंसियां

1. जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद की समस्या से निपटने के लिए सुरक्षा एजेंसिया तीन आयामों पर काम कर रही है. एक तरफ ऑपरेशन ऑल आउट के जरिये आतंकियों का सफाया किया जा रहा है.

2. वहीं एनआईए और ईडी बड़े स्‍तर पर सीमा पार से आने वाले आर्थिक स्रोतों और आतंक के व्यापारियों पर नकेल कस रही है. इसी कड़ी में हुर्रियत नेताओं पर भी नकेल कसी जा रहा है. आजतक के "ऑपरेशन हुर्रियत" के बाद कई हुर्रियत नेता प्रवर्तन निदेशालय के मुकदमे और एनआईए की जांच का सामना कर रहे हैं.

3. तीसरा कदम ये है कि राज्यपाल शासन के दौरान भी सामाजिक पक्ष के सभी वर्गों से बात करने के लिए इंटरलॉक्यूटर काम करते रहेंगे. 

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