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J-K: आतंकियों के पुलिसकर्मियों के परिजनों का अपहरण करने के पीछे की कहानी

घाटी में इन दिनों आतंकियों की ओर से पुलिसकर्मियों के परिजनों को अगवा करने की वारदात बढ़ी है, आखिर आतंकी अचानक पुलिसवालों के परिजनों को क्यों अपना निशाना बना रहे हैं. जानिए इसके पीछे की कहानी.

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जितेंद्र बहादुर सिंह [Edited by: सुरेंद्र कुमार वर्मा]श्रीनगर, 31 August 2018
J-K: आतंकियों के पुलिसकर्मियों के परिजनों का अपहरण करने के पीछे की कहानी सांकेतिक तस्वीर

जम्मू-कश्मीर पुलिस के अपहृत परिजनों की तलाश तेज कर दी गई है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों की नजर इस पर है कि आखिर घाटी में आंतकियों ने पुलिसवालों के परिजनों को इतनी बड़ी संख्या में कैसे अपहृत कर लिया. जानकारी के मुताबिक जांच एजेंसियों को इसके बारे में कुछ पुख्ता जानकारियां हाथ लगी हैं.

सूत्रों के मुताबिक 2018 में अब तक सुरक्षा बलों ने ऑपरेशन ऑलआउट के तहत 142 आतंकियों को मौत के घाट उतार दिया. इसमें अलग-अंलग तंजीमों के कुख्यात आतंकी शामिल हैं.

जानकारी के मुताबिक इस साल सबसे ज्यादा लश्कर-ए-तैएबा और हिज्बुल मुजाहिद्दीन के आतंकी मार दिए गए. लिस्ट के मुताबिक हिज्बुल मुजाहिद्दीन के 34, लश्कर के 39, जैश-ए-मोहम्मद के 28 और अलबदर के 2 आतंकी मारे गए. इस साल मारे गए आतंकियों में पचास से ज्यादा आतंकी विदेशी हैं.

आतंकियों के बीच उपजी निराशा

जानकारों के मुताबिक आतंकियों की ये मुहिम सुरक्षा बलों की इस कड़ी कार्रवाई के खिलाफ उपजी हताशा से पैदा हुई है. सूत्रों के मुताबिक सुरक्षा बलों को मिली कामयाबी ज्यादातर ह्यूमन इंटेलीजेंसी पर आधारित है और उसमें भी सबसे बड़ा हिस्सा जम्मू पुलिस के इंटेलीजेंस विंग से हासिल हुआ.

यहां तक जैसे ही आतंकी सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर अपनी तस्वीरें साझा करते हैं उसी वक्त उनके बारे में जानकारी जम्मू पुलिस तक पहुंच जाती है. इसके बाद आतंकी की लोकेशन का पता लगाकर उसको ठिकाने लगाने के काम में सुरक्षा बलों के साथ जम्मू पुलिस का कॉर्डिनेशन का बड़ा हाथ रहा है.

सुरक्षा बलों ने फेल किए हर मंसूबे

इससे बौखलाए आतंकियों ने पहले तो पुलिस बलों और सुरक्षा बलों में काम कर रहे कश्मीरियों की बेदर्दी से कत्ल करने की साजिशों को अंजाम दिया और जब इससे भी पुलिस के हौंसलों पर असर नहीं पड़ा तो उन्होंने जम्मू-कश्मीर के पुलिसकर्मियों के परिजनों को निशाना बनाने का अभियान चला रखा है.

सुरक्षा बलों ने आतंकियों के हर मंसूबे को फेल कर दिया. यहां तक की भीड़ के सहारे बच निकलने की कोशिश या फिर सुरक्षा बलों से कोई गलती कराने की उनकी कोशिशें भी सुरक्षा बलों ने सयंम के साथ लगातार नाकाम किया है इस बात को लेकर भी आतंकियों में हताशा है.

सूत्रों को मिली जानकारी के मुताबिक पिछले कुछ समय से घुसपैठ में नाकाम आईएसआई के गुर्गे और उनके इशारों पर नाचने वाले आतंकी आकाओं की बौखलाहट का भी इसमें बड़ा रोल है. 600 से ज्यादा आतंकी इस वक्त पीओके के लॉन्चिंग पैड पर बैठे हैं, लेकिन वो सीमा पार करने में नाकाम हैं.

आतंकियों में बौखलाहट

इसके साथ-साथ बड़ी वारदात को अंजाम देने की कोशिश में इधर आए हुए आतंकियों को वारदात से पहले ही गोली का निशाना बनने से निराश आईएसआई ने इस नापाक मंसूबे को पाक में बैठे आतंकी सरगनाओं के साथ विचार कर रचा है. एजेंसियों को मिली जानकारी के मुताबिक इस तरह के इनपुट्स मिले हैं कि आईएसआईएस के हैंडलर कश्मीर में बैठे आतंकियों से सनसनीखेज वारदात करने पर जोर दे रहे थे. इसी के चलते आतंकियों ने इस कार्रवाई को अंजाम दिया है.

हाल के दिनों में जिस तरह से रियाज नाऊकु के घर पर छापा पड़ा, एनआईए ने हिज्बुल मुजाहिद्दीन के चीफ सैय्यद सलाउद्दीन के दूसरे बैटे सैय्यद शकील अहमद की गिरफ्तारी की है उसने भी आतंकियों में बौखलाहट पैदा कर दी. एनआईए के टेरर फंडिग पर लगातार प्रहार से आतंकियों को पाकिस्तान और विदेश से मिल रही आर्थिक मदद का बड़ा नेटवर्क टूट गया.

इससे आतंकियों को मिल रही मदद में काफी कमी दिखा आग गई दी जिसके चलते उनके ऑपरेशन के लिए लोग और संसाधन जुटाने में मुश्किलें पेश आ रही हैं.

इसके अलावा पिछले कुछ समय से केंद्र सरकार के कश्मीरी युवकों के लिए चलाएं गए भर्ती अभियानों की सफलता ने भी पाकिस्तान में बैठे आतंकियों के आकाओं और आईएसआई की पेशानी पर बल डाल दिए थे, जिसके चलते वो ऐसे वारदात करना चाहते हैं जिससे कि आम कश्मीरी मे मन में डर बैठ जाएं और वो आतंकियों के मंसूबों से हार मान लें.

आतंकियों की इस चाल को इस तरह से भी देखा जा रहा है कि जम्मू-कश्मीर पुलिस के मनोबल पर इतना असर डाल दिया जाएं कि वो किसी भी एनकाउंटर के वक्त मौके पर अपनी सक्रिय भूमिका को छोड़ दे ताकि सुरक्षा बलों और आम पत्थरबाजों के बीच सीधी मुठभेड़ हो जाएं और आतंकियों को प्रोपेगंडा करने में मदद मिल सके.

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