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अनुच्छेद 370 के खिलाफ SC में बहस, अब बुधवार को होगी सुनवाई

जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक बेंच में मंगलवार को सुनवाई हुई. जस्टिस एनवी रमण की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ ने मामले की सुनवाई की. पूर्व आईएएस अधिकारी शाह फैजल की तरफ से वरिष्ठ वकील राजू रामचंद्रन ने बहस की.

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aajtak.in
अनीषा माथुर नई दिल्ली, 10 December 2019
अनुच्छेद 370 के खिलाफ SC में बहस, अब बुधवार को होगी सुनवाई सुप्रीम कोर्ट (फोटो-PTI)

  • अनुच्छेद 370 को हटाने को सुप्रीम कोर्ट में दी गई है चुनौती
  • कोई बदलाव करने से पहले लोगों की सहमति जरूरी हैः वकील
  • अब सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को होगी 370 मामले की सुनवाई

जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक बेंच में मंगलवार को सुनवाई हुई. जस्टिस एनवी रमण की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ मामले की सुनवाई कर रही है. जस्टिस एनवी रमण के अलावा संविधान पीठ में जस्टिस एसके कौल, जस्टिस आर सुभाष रेड्डी, जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस सूर्यकांत शामिल हैं. पूर्व आईएएस अधिकारी शाह फैजल की तरफ से वरिष्ठ वकील राजू रामचंद्रन ने बहस की. अब मामले की सुनवाई बुधवार को होगी.

राजू रामचंद्रन ने कहा कि अनुच्छेद 356 की शक्तियों के संबंध में राष्ट्रपति का आदेश 272, 273 असंवैधानिक हैं. अनुच्छेद 370 को बिना राज्य विधानमंडल के विचार के हटाना संघीय विधान के सिद्धांतों का उल्लंघन है. जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम संविधान के अनुच्छेद 3 का उल्लंघन करता है.

राजू रामचंद्रन ने कहा कि अनुच्छेद 370 में कोई भी बदलाव करने से पहले जम्मू-कश्मीर की विधानसभा से अनुमित लेने की जरूरत होती यानी किसी बदलाव से पहले वहां के लोगों की अनुमति ली जानी चाहिए. इस मामले पर फैसला लेने से पहले केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर की जनता की इच्छा जानने की कोई कोशिश नहीं की.

राजू रामचंद्रन ने कहा कि राज्यपाल का यह कहना कि उनको इस बदलाव के बारे में अचानक पता चला, जो सरासर गलत है, क्योंकि अमरनाथ यात्रियों को घाटी से यह कहकर वापस भेजा गया था कि यात्रा और यात्रियों की सुरक्षा पर खतरा है. उन्होंने सवाल किया कि क्या सुरक्षा बलों का जमावड़ा और अन्य एहतियाती उपाय राज्यपाल को नहीं दिखे?

रामचंद्रन ने कहा कि सरकार लगातार कहती रही कि ये उपाय तो सुरक्षा के लिहाज से किए जा रहे हैं, लेकिन 5 अगस्त को राष्ट्रपति ने आदेश पर दस्तखत कर दिए, जिसमे अनुच्छेद 367 में पैरा 4 जोड़ दिया गया और इस पर अधिसूचना जारी कर दी. इसके तहत विधानसभा और चुनी हुई सरकार के अस्तित्व में न रहने पर राज्यपाल में ही सारी शक्तियां निहित हो जाती हैं.

रामचंद्रन ने कहा कि संवैधानिक व्यवस्था को बदलने का प्रस्ताव जम्मू-कश्मीर विधानसभा के माध्यम से लोगों पर छोड़ना चाहिए. इस तरह व्यवस्था को बदलने के लिए संसद की कोई भूमिका नहीं होती है. राजू रामचंद्रन ने कोर्ट से कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोगों के कहने पर ही बदलाव हो सकते हैं. फिर केंद्रीय सरकार अधिसूचना जारी करने के लिए कार्यकारी शक्ति का उपयोग कर सकती है, लेकिन इसके अलावा संसद की कोई भूमिका नहीं है.

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