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एक हफ्ते में दलितों की 4 बारात को धमकी, मेवानी बोले- दलितों के लिए गुजरात नर्क

शादी परिवार में खुशी का माहौल लेकर आती है, लेकिन शादी और बारात को लेकर गुजरात में इन दिनों काफी तंग माहौल चल रहा है. गुजरात में पिछले एक सप्ताह के दौरान एक या दो नहीं बल्कि 4 ऐसी वारदात सामने आई है, जिसमें दलित की बारात को पुलिस सुरक्षा के बीच निकालना पड़ा.

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गोपी घांघर [Edited by: मलाइका इमाम]नई दिल्ली, 13 May 2019
एक हफ्ते में दलितों की 4 बारात को धमकी, मेवानी बोले- दलितों के लिए गुजरात नर्क जिग्नेश मेवानी

शादी परिवार में खुशी का माहौल लेकर आती है, लेकिन शादी और बारात को लेकर गुजरात में इन दिनों काफी तंग माहौल चल रहा है. गुजरात में पिछले एक सप्ताह के दौरान एक या दो नहीं बल्कि चार ऐसी वारदात सामने आई है, जिसमें दलित की बारात को पुलिस सुरक्षा के बीच निकालना पड़ा. इसे लेकर दलित नेता जिग्नेश मेवानी ने सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा है कि गुजरात दलितों के लिए नर्क बन गया है.

शुरुआत मेहसाणा जिले की कडी तहसील से हुई जहां एक दुल्हे की बारात क्या निकाली गांव के सरपंच समेत सभी सवर्णों ने गांव के दलितों का बहिष्कार करना शुरू कर दिया. यही नहीं गांव वालों ने उनके दूध, पानी, शब्जी जैसी जीवन निर्वाह की चीजें भी बंद कर दीं. आखिरकार पुलिस को इस पूरे मामले को लेकर बीच में आना पड़ा और चार लोगों को गिरफ्तार करने के बाद मामला शांत हुआ.

अभी इस बात को दो दिन ही बीते थे, तभी साबरकांठा के प्रांतिज के सीतवाड़ा गांव में एक दलित पुलिस कांस्टेबल को खुद की बारात निकालने के लिए पुलिस सुरक्षा लेनी पड़ी. जैसे ही दलित पुलिस कांस्टेबल की शादी के कार्ड में बारात का वक्त लिखा दिखा तो धमकी मिलनी शुरू हो गई. यही नहीं उसे यहां तक कहा गया था कि अगर बारात नाचते हुए गांव से निकली, तो दलितों के लिए अच्छा नहीं होगा. वैसे में उसने पुलिस सुरक्षा के साथ खुद की बारात निकाली.  

दो दिन पहले ही साबरकांठा के ही वडाली में भी दलित को बारात निकालने और घोड़ी पर बैठने पर गांववालों ने धमकाया और कहा कि दलितों को घोड़ी पर बैठने का हक नहीं है, जिसके बाद परिवारवालों ने कलेक्टर को अर्जी दी. इसके बाद बारात को पुलिस सुरक्षा के बीच घर से निकाला गया.

यही नहीं रविवार देर शाम अरवल्ली के मोडासा के खंबीसार गांव में जब दुल्हे जयेश राठौड़ घोड़ी पर चढ़ बारात निकला तो गांव की सवर्ण जाति की महिलाएं बारात के आगे आ गईं और वहीं सड़क पर ये कहते हुए बैठकर भजन गाने लगीं कि दलित के दुल्हे घोड़ी पर नहीं बैठते हैं और उनकी बारात में नाचना गाना नहीं होता है, जिसके बाद मामला इतना बिगड़ा कि दोनों ही जाति के लोग आमने-सामने आ गए और पथराव करना शुरू कर दिया. पुलिस बीच में आई और काफी मशक्कत के बाद हालात को काबू किया गया. सभी आलाअधिकारी वहां इकट्ठा हुए जिसके बाद आज बरात पुलिस सुरक्षा के साथ नाचते गाते निकाली गई.

शादी में घोड़ी पर बैठने और गांव के बीच से बारात को नाचते गाते ले जाते वक्त हुए हमलों को लेकर दलित नेता जिग्नेश मेवानी ने भी ट्वीट किया और लिखा कि... गुजरात दलितों के लिए बना नर्क.. लगातार चौथे दिन घोड़ी चढ़ने के मामले में दलितों पर जुल्म-अत्याचार. अभी इस वक्त गुजरात के अरवल्ली जिले के खंभासर गांव में दलित बहनों को बेरहमी के साथ मारा जा रहा है, कुछ लोग जान बचाने के लिए खेतों में छिप गए हैं.

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